कलेक्टर ने अल्लाबेली चैक पाॅइन्ट का निरीक्षण किया…
किसी भी प्रवासी मजदूर को पैदल नहीं चलने दिया जायेगा :  श्रीमती दास

मुरैना। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रमिक विभिन्न प्रदेशों से पैदल चलकर मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलों में आ रहे है। इस गर्मी के मौसम में श्रमिकों को पैदल कतई नहीं चलने देना है। राज्य शासन द्वारा इस संबंध में कलेक्टरों को निर्देश जारी किये गये थे। निर्देशों के तहत कलेक्टर प्रियंका दास ने जिले के चैक पाॅइंट जैसे निरावली, अल्लाबेली, अटारघाट और बुधारा पर अधिकारियों की टीम लगा दी गई है। यह टीम निरंतर प्रतिदिन 100 से 120 बसों के माध्यम से 4 से 5 हजार मजदूरों को भेजने का कार्य कर रही है। 

कलेक्टर ने कहा कि किसी भी मजदूर को मध्यप्रदेश की सीमा में पैदल नहीं चलने दिया जायेगा। यह बात उन्होंने मंगलवार को अल्लावेली चैक पाॅइंट पर अवलोकन करते हुये पत्रकारों से कही । कलेक्टर ने कहा कि जिले की राजस्थान सीमा पर श्रमिक पैदल प्रवेश कर रहे हैं। उन्हें उचित स्थान पर आराम करने, पीने का पानी और भोजन कराने की व्यवस्था की गई है। भोजन एवं आराम के पश्चात् मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के श्रमिकों को उनके जिलों के लिये बसों में बिठाकर रवाना किया जा रहा है। 

अभी तक जिले की सीमा पर 62 हजार 788 श्रमिकों में से  45 हजार 51 ऐसे श्रमिक है, जिन्हें अन्य जिलों के लिये 888 बसों से रवाना किया गया है। उनकी सूची में नाम तथा पता, फोन नंबर की जानकारी राज्य कंट्रोल रूम को भेजी जा चुकी है। जो श्रमिक मध्यप्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के हैं, उन्हें भोजन एवं आराम के पश्चात् यथा संभव बस के माध्यम से मध्यप्रदेश की सीमा तक छोड़ने की व्यवस्था प्रतिदिन की जा रही है। 

मध्यप्रदेश की राजस्थान सीमा अल्लाबेली मुरैना पर ग्वालियर से उत्तरप्रदेश सीमा में झांसी से टीकमगढ, छत्तरपुर, सागर और दूसरा रास्ता होते हुये ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, राजगढ, भोपाल के रास्ते इन्दौर, देवास, अन्य जिलों के लिए रवाना किया जा चुका है। इसके अलावा मुरैना से अम्बाह, पोरसा, मेहगांव भिण्ड, सेवड़ा पहुंचाया गया। मुरैना से जौरा, सबलगढ, विजयपुर, श्योपुर से बड़ोदा पहंुचाया गया है। 

कलेक्टर श्रीमती दास ने बताया कि इसके अलावा 17 हजार 737 श्रमिकों को मुरैना विकासखण्डों के अन्तर्गत बसों से भेजे गये है। इन ट्रांजिट पाॅइंट पर कुछ बसें रखीं गई है, अन्य प्रांतों से आने वाले इन चैक पाॅइन्टों पर उन्हें दूसरी बसों में बिठाकर उनके प्रदेश की सीमाओं तक पहुंचाया जा रहा है। निर्देशों के तहत स्वास्थ्य, सफाई, सोशल डिस्टेंसिंग एवं बसों को सैनेटाइज करने का कार्य किया जा रहा है।