जागरुक करने के लिए अनौखी पहल...
जप्त की गई पॉलीथिन व प्लास्टिक से बनाया गाय का मॉडल
ग्वालियर दिनांक 04 फरवरी 2020 - गाय हमारी आस्था की प्रतीक है, हम सभी गाय को माता के रुप में पूजते हैं, लेकिन उन्हीं गौ माता के लिए खाने पीने की चीजें पॉलीथिन में बाहर डालते हैं जिससे गायें खाने के साथ-साथ पॉलीथिन भी खा जाती हैं और एक-एक गाय के पेट से 40 से 50 किलो तक पॉलिथीन निकलती है।
गायों के पेट में इतना कचरा जमा हो जाता है कि चारे के लिए जगह ही नहीं बचती और भूख से उनकी मौत हो जाती है। इन्ही सब के प्रति आम नागरिकों को जागरुक करने तथा पॉलीथिन और प्लास्टिक के दुष्प्रभाव से गौ माता को बचाने का संदेश देने के लिए नगर निगम ग्वालियर द्वारा जप्त की गई पॉलीथिन व प्लास्टिक से गाय का मॉडल बनाया गया है जो कि नागरिकों के आकर्षण का केन्द्र बन रहा है।
ग्वालियर नगर निगम द्वारा नवाचार के माध्यम से स्वच्छता के प्रति आमजन में जनजागरूकता लाने के लिए नित नये नये प्रयोग किये जा रहे हैं। इसी के तहत अपर आयुक्त श्री नरोत्तम भार्गव की पहल पर नोडल अधिकारी श्री केशव सिंह चौहान व श्री गौरव परिहार के प्रयासों से बाजार से जप्त की गई, पॉलीथिन और वेस्टेज प्लास्टिक से गाय का मॉडल बनाकर स्टेशन के पास बस स्टैंड तिराहे पर लगाया गया है, जिस पर लाइटिंग कर चौराहे को वेस्टेज वस्तुओं से सजाया गया है।
जो आकर्षण का केन्द्र बना हुुआ है। वहां से निकलने वाले राहगीर एक बार गाय के मॉडल को देखकर उसके साथ फोटो खिचाना नहीं भूलते हैं। साथ ही गाय को बचाने के लिए किये जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा करते हैं।ग्वालियर नगर निगम की गौशाला के पशु चिकित्सक डॉ. उपेन्द्र यादव ने बताया कि प्लास्टिक से हो रही गाौ वंश की मृत्यु और पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए स्थापित यह मॉडल लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।
पशु चिकित्सक डॉ. उपेन्द्र यादव का कहना है कि गायों की मौत का प्रमुख कारण गायों के पेट से भारी मात्रा में पॉलीथीन की थैलियां बल्कि प्लास्टिक की बोतलों के ढक्कन, लोहे की कीलें, सिक्के, ब्लेड, पत्थर और मंदिरों में चढ़ावे से निकला कचरा शामिल है। गायों के पेट में इतना कचरा जमा हो जाता है कि चारे के लिए जगह ही नहीं बचती और भूख से उनकी मौत हो जाती है। उनमें खून की कमी होती है और उनका पेट प्लास्टिक खाने से फूला होता है जिसके चलते उन्हें बचा पाना मुश्किल होता है।


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