20623 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम मशीन में कैद...
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के पहले फेज की वोटिंग संपन्न !
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के मतदान का पहला चरण बुधवार (09 सितंबर) को संपन्न हो गया. इस चुनाव में करीब 76.04 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले. हालांकि अंतिम आंकड़ा आना अभी बाकी है. 162 नगर निकायों के 5393 वार्डों के लिए वोटिंग हुई. छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हुआ. 20623 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम मशीन में कैद हो गई. दूसरे चरण के चुनाव की वोटिंग 11 सितंबर को होगी. राजस्थान नगर निकाय चुनाव के पहले फेज में सर्वाधिक 91.98 प्रतिशत मतदान प्रतापगढ़ जिले के अरनोद नगर पालिका में दर्ज किया गया. वहीं चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में सबसे कम 61.49 प्रतिशत मतदान हुआ.
सीकर जिले में 79.23% मतदान दर्ज किया गया. सीकर के रींगस में सबसे अधिक 85.67 फीसदी मतदान हुआ. वहीं, फतेहपुर में सबसे कम 66.72 प्रतिशत वोटिंग हुई. जिले में कुल 3.06 लाख से अधिक मतदाताओं ने 1230 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला किया. सिरोही जिले की तीन नगरपालिकाओं में मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गई. आबूरोड, शिवगंज और मंडार में मतदान हुआ. आबूरोड में 75.77% मतदाताओं ने किया मतदान. मंडार में सबसे ज्यादा 77.89% मतदान दर्ज. वहीं, शिवगंज में 69.57% मतदान दर्ज किया गया. अब 11 सितंबर को सिरोही, पिंडवाड़ा और माउंट आबू में मतदान है.
सिरोही में पिंडवाड़ा के वार्ड 21 में विवाद से चुनावी माहौल गरमा गया. निर्दलीय प्रत्याशी चपत मेवाड़ा ने बीजेपी प्रत्याशी के समर्थकों पर मारपीट के आरोप लगाए. वहीं, बीजेपी प्रत्याशी चेलाराम देवासी ने आरोपों से इनकार किया. देवासी ने निर्दलीय प्रत्याशी पर मतदाताओं को पैसे बांटने का आरोप लगाया. पैसे बांटने की सूचना के बाद विवाद की स्थिति बनने का दावा किया जा रहा है. इस संबंध में सूचना मिलने के हबाद पर एएसआई अमरसिंह सहित पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंचा. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली. मामले की जांच जारी है. पिण्डवाड़ा नगरपालिका क्षेत्र में 11 सितंबर को मतदान होना है.
राजस्थान में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए 162 नगर निकायों में वोटिंग हुई. इसमें जयपुर जिले के 18 निकाय भी शामिल थे. जयपुर जिले के दूदू के वार्ड एक, बारां जिले के वार्ड 16 और 18, भीलवाड़ा के वार्ड 22, जालोर के वार्ड 34 और भरतपुर के वार्ड 29 में फर्जी वोटिंग की खबरें आईं. सुजानगढ़ नगर परिषद के वार्ड 39 और बीकानेर के वार्ड 52 में ईवीएम में खराबी के कारण एक मतदान केंद्र पर मतदान बाधित हुआ. अलवर शहर में एक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के काम न करने पर मतदाताओं ने नाराजगी जाहिर की. सवाई माधोपुर और जोधपुर में भी ईवीएम में तकनीकी खराबी के कारण मतदाताओं की लंबी कतारें लग गईं.
पहले चरण में पार्षद के 5393 पदों के लिए 20000 से ज़्यादा उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे. जिन 162 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव हुए उनमें चार नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगरपालिकाएं शामिल हैं. राजस्थान बीजेपी के चीफ मदन राठौर ने प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के पहले फेज में उत्साह और उमंग के साथ मतदान करने वाले सभी सम्मानित मतदाताओं का शुक्रिया अदा किया है. उन्होंने कहा, ''लोकतंत्र के इस महापर्व में प्रदेशवासियों ने जिस जागरूकता और उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया, वह लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिचायक है.
सुबह से ही मतदान केंद्रों पर उमड़ा उत्साह यह दर्शाता है कि जनता अपने शहर और स्थानीय क्षेत्र के विकास, सुशासन एवं सशक्त जनप्रतिनिधित्व के लिए पूरी तरह सजग है.'' इसके साथ ही उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील है कि जिन क्षेत्रों में 11 सितंबर को मतदान होना है, वहां अधिक से अधिक संख्या में मतदान कर लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें. उन्होंने कहा, ''राजस्थान की जनता का बीजेपी के प्रति विश्वास हमारे लिए संकल्प और सेवा की नई ऊर्जा है. बीजेपी जनता के इस विश्वास पर सदैव खरा उतरने और प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण के लिए निरंतर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है.'' राजस्थान में हुए नगर निकाय चुनाव के पहले चरण के मतदान पर कांग्रेस पार्टी की प्रतिक्रिया सामने आई है.
प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया है कि पहले चरण के मतदान में बीजेपी को बड़ा नुकसान होता हुआ दिख रहा है. उन्होंने कहा, ''सरकार के कामकाज से नाराज होकर लोगों ने कांग्रेस पार्टी के पक्ष में वोट डाले हैं. दूसरे चरण में बीजेपी को और भी नुकसान उठाना पड़ेगा.'' प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आगे कहा, ''मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आज राजधानी जयपुर में हुआ रोड शो पूरी तरह से फ्लॉप रहा. पूरे रोड शो में सिर्फ डेढ़ सौ कार्यकर्ता और समर्थक ही मौजूद थे. इसे रोड शो के बजाय फ्लॉप शो कहना ज्यादा बेहतर होगा. लोग बीजेपी और उसकी सरकारों के कामकाज से बेहद नाराज हैं इसलिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने और दबाव डालने के बावजूद लोग बीजेपी के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो रहे हैं.''




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