G News 24 : विधिक संस्थानों को समाज की जरूरतों के अनुरूप बदलना जरूरी है: प्रो. (डॉ.) रतन सिंह

PIMR ग्वालियर के विधि विभाग में  दो दिवसीय"द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय विधि सेमिनार" का हुआ शुभारंभ... 

विधिक संस्थानों को समाज की जरूरतों के अनुरूप बदलना जरूरी है: प्रो. (डॉ.) रतन सिंह

ग्वालियर। प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर के विधि विभाग द्वारा दिनांक 18 से 19 सितंबर 2026 तक स्वर्गीय श्री न्यायमूर्ति एम.ए. शाह की स्मृति में दो दिवसीय "द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय विधि सेमिनार" का आयोजन किया जा रहा है। सेमिनार के प्रथम दिवस 18 सितंबर 2026 को उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का मुख्य विषय कानून, प्रौद्योगिकी, सतत विकास, सुशासन एवं आर्थिक विकास में अंतर-अनुशासनिक दृष्टिकोण रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

सेमिनार का मुख्य उद्देश्य विधि, प्रौद्योगिकी, सतत विकास, सुशासन एवं आर्थिक विकास जैसे परस्पर जुड़े क्षेत्रों में उभर रही चुनौतियों एवं संभावनाओं पर अंतर-अनुशासनिक दृष्टिकोण से विचार-विमर्श करना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षाविदों एवं विधि व्यवसायियों को एक ऐसा मंच प्रदान करने का प्रयास किया गया है, जहाँ वे बदलते वैश्विक परिदृश्य में कानूनी ढांचे को अधिक समावेशी, तकनीक-अनुकूल एवं भविष्योन्मुखी बनाने हेतु नवीन विचारों एवं शोध-आधारित समाधानों का आदान-प्रदान कर सकें।

प्रो. (डॉ.) रतन सिंह , मुख्य अतिथि एवं कुलगुरु, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, पटियाला ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक विकास एवं सुशासन की स्थिरता के लिए विधिक संस्थानों को समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को अंतर-अनुशासनिक शोध के प्रति प्रोत्साहित किया तथा संस्थान के इस प्रयास की सराहना की।

प्रो. (डॉ.) एस. अली नवाज़ ज़ैदी , प्रोफेसर, विधि विभाग, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में सेमिनार के विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने कानूनी ढांचे के समक्ष नई चुनौतियां एवं संभावनाएं प्रस्तुत की हैं, तथा सतत विकास एवं सुशासन को सुनिश्चित करने के लिए विधिक व्यवस्था को समयानुकूल एवं अंतर-अनुशासनिक दृष्टिकोण अपनाना होगा।

श्री कुबेर बोध, अधिवक्ता, माननीय सर्वोच्च न्यायालय, भारत ने सम्मानित अतिथि (गेस्ट ऑफ ऑनर) के रूप में अपने उद्बोधन में कहा कि वैश्वीकरण एवं तकनीकी परिवर्तन के इस दौर में विधिक व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सशक्त एवं समयानुकूल बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध एवं व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से विधि क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने हेतु प्रेरित किया।

श्री एफ.ए. शाह , अधिवक्ता, माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर ने अपने संबोधन में कहा कि विधि के विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक न्यायिक प्रक्रियाओं की भी गहन समझ होनी चाहिए। उन्होंने स्वर्गीय न्यायमूर्ति शाह के न्यायिक जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए विद्यार्थियों को नैतिकता एवं निष्ठा के साथ विधि व्यवसाय अपनाने की प्रेरणा दी।

प्रो. (डॉ.) राखी सिंह चौहान , प्राचार्या, विधि विभाग, पीआईएमआर ने अपने स्वागत भाषण एवं उद्घाटन उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में विधि, प्रौद्योगिकी, सुशासन एवं सतत विकास के मध्य समन्वय स्थापित करना समय की मांग है, तथा यह संगोष्ठी विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को इन अंतर-अनुशासनिक विषयों पर गहन चिंतन का अवसर प्रदान करेगी।

सह-प्राध्यापिका मानसी गुप्ता, ने स्वर्गीय श्री न्यायमूर्ति एम.ए. शाह के जीवन एवं न्यायिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका विधि क्षेत्र के प्रति समर्पण एवं न्यायिक दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने बताया कि यह संगोष्ठी उन्हीं की स्मृति को समर्पित है।

कार्यक्रम के दौरान सेमिनार बुक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया, तत्पश्चात मुख्य अतिथियों एवं वक्ताओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सेमिनार के तकनीकी सत्रों में रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉ. पूजा गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, ग्वालियर लॉ कॉलेज; डॉ. नीति पांडे , प्राचार्या, माधव विधि महाविद्यालय; डॉ. डी.डी. मिश्रा, एसोसिएट प्रोफेसर, ग्वालियर लॉ कॉलेज; डॉ. वीर नारायण , डायरेक्टर ऑफ रिसर्च, डीन ऑफ लॉ एवं डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर, विक्रांत विश्वविद्यालय, ग्वालियर; तथा प्रो. नुसरत अली रिज़वी , असिस्टेंट प्रोफेसर, एम.एल.बी. कॉलेज, ग्वालियर उपस्थित रहेंगे तथा अपने विषय-विशेषज्ञता के माध्यम से विद्यार्थियों को लाभान्वित करेंगे ।

इस अवसर पर विधि विभाग के सह-प्राध्यापक आबिल हुसैन, सह-प्राध्यापक राहुल श्रीवास्तव , सह-प्राध्यापिका मानसी सोनी, सह-प्राध्यापक साहिल वर्मा , सह-प्राध्यापक डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा ,  तथा इस अवसर पर सेमिनार की समन्वयक सह-प्राध्यापिका  डॉ0 ऋचा मित्तल  तथा सह-समन्वयक सह-प्राध्यापिका  डॉ0 दीक्षा भदोरिया उपस्थित रही । सह-प्राध्यापिका  जिज्ञासा वोहरा, ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया।

Reactions

Post a Comment

0 Comments