G News 24 : ऐतिहासिक,संगीत एवं धार्मिक नगरी ग्वालियर में हर तरफ स्थाई रूप में विराजमान हैं श्रीजी !

सबके आराध्य देव गणेश की चतुर्थी पर आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं

             ऐतिहासिक,संगीत एवं धार्मिक नगरी ग्वालियर में हर तरफ स्थाई रूप में विराजमान हैं श्रीजी !

ग्वालियर। गणेश उत्सव के समय ग्वालियर शहर में भगवान गणेश के प्राचीन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में विराजमान गणेश प्रतिमाओं की अपनी अलग मान्यताएं और इतिहास हैं।खासगी बाजार के चौराहे पर सिंदूर से सजे मोरे गणेशजी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। बाजार के बीचों-बीच विराजमान मोटे गणेशजी की खासियत यह है कि उनका पेट काफी बड़ा है। बच्चे कहते हैं कि बाजार के सारे लड्डू, जलेबी और समोसे की खुशबू उन्हें अपनी ओर खींच लेती है।

बताया जाता है कि एक बार बाजार में आग लग गई थी और कई दुकानें जल गई थीं, लेकिन गणेशजी की प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं हुआ। तभी से लोगों की आस्था इस मंदिर के प्रति और भी मजबूत हो गई।आज भी भीड़ में यदि ध्यान से देखें तो खासगी बाजार के चौराहे पर सिंदूर लगे मोरे गणेशजी बैठे दिखाई देते हैं। श्रद्धालु यहां भगवान गणेश के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना पूरी होती है।

लगभग 500 वर्ष पुराने इस मंदिर में विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा विशाल है। मान्यता है कि पुराने समय में एक सेठ ने सपने में भगवान गणेश को देखा था। सपने में भगवान ने कहा कि “मुझे यहीं रहने दो, बरकत बनी रहेगी।” इसके बाद सेठ ने उसी स्थान पर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित कराई। धीरे-धीरे आसपास दुकानें बढ़ीं और बाजार विकसित होता गया। आज भी दुकानदार अपनी दुकान खोलने से पहले मोटे गणेशजी को प्रणाम करते हैं।

350 साल पुराना है अर्जी वाले गणेश का दरबार

ग्वालियर। छावनी स्थित अर्जी वाले गणेश मंदिर अपनी चमत्कारिक मान्यता के कारण प्रसिद्ध है। करीब 350 साल पुराने इस मंदिर में भक्त विवाह, मुकदमा, संतान, व्यापार और नौकरी जैसी मनोकामनाओं के लिए अर्जी लगाते हैं।मान्यता है कि यहां बुधवार को विशेष रूप से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि भगवान गणेश के दरबार में अर्जी लगाने और लगातार 11 बुधवार तक दर्शन करने से मनोकामना पूरी होती है।

मंदिर के बाहर आज बाजार और निर्माण कार्य के कारण परिस्थितियां बदल गई हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था आज भी पहले जैसी ही है। मंदिर की तीन परिक्रमा लगाने की परंपरा भी बताई जाती है। मंदिर में गणेशजी के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु नारियल और दक्षिणा चढ़ाकर अपनी मनोकामना रखते हैं।

मंदिर के संबंध में यह भी मान्यता बताई जाती है कि इसका संबंध झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और गंगादास की शाला से जुड़े इतिहास से रहा है। बुजुर्गों के अनुसार, पुराने समय में मंदिर का मुख्य द्वार अलग दिशा में था और वहां से संबंधित ऐतिहासिक स्थल दिखाई देते थे।आज भी अर्जी वाले गणेशजी के दरबार में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी मनोकामना लेकर भगवान के सामने अर्जी लगाते हैं।

जीवाजीगंज में विराजे हैं गणेशजी के भाई कार्तिकेय

जीवाजीगंज क्षेत्र में भगवान गणेश के भाई कार्तिकेय जी का प्राचीन मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में कार्तिकेय जी के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। बताया जाता है कि यहां कार्तिकेय जी की प्रतिमा विशेष स्वरूप में विराजमान है। मंदिर की ऐतिहासिकता और प्राचीन प्रतिमाएं इसे शहर के धार्मिक स्थलों में विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यहां स्थापित भगवान गणेश और उनके साथ विराजमान अन्य प्रतिमाएं हैं। श्रद्धालु इन प्रतिमाओं के दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं।

मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। मान्यता है कि विशेष दिनों में दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ग्वालियर को ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में जाना जाता है। शहर के इन प्राचीन मंदिरों में आज भी लोगों की गहरी आस्था दिखाई देती है। गणेश उत्सव के दौरान इन मंदिरों की रौनक और श्रद्धालुओं की भीड़ इसे और खास बना देती है।

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