G News 24 : नृपेन्द्र मिश्रा की भूमिका पर रखी पूरी बात, राम मंदिर निर्माण में नृपेंद्र मिश्रा ने ही अहम फैसले लिए !

ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर चंपत राय का बड़ा खुलासा...

नृपेन्द्र मिश्रा की भूमिका पर रखी पूरी बात, राम मंदिर निर्माण में नृपेंद्र मिश्रा ने ही अहम फैसले लिए !

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की 9 पन्नों की चिट्ठी सामने आई है। यह पत्र मंदिर निर्माण से जुड़े फैसलों, ट्रस्ट की आर्थिक व्यवस्था, श्रद्धालुओं को दी जा रही सुविधाओं और निर्माण समिति की भूमिका को लेकर कई अहम जानकारियां सामने रखता है। चिट्ठी में मंदिर निर्माण समिति के तत्कालीन अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा की भूमिका का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है।

यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब मंदिर निर्माण और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली से जुड़े आरोपों के बीच एसआईटी की जांच रिपोर्ट को लेकर क्लीन चिट मिलने की चर्चा है। चंपत राय ने अपने पत्र में ट्रस्ट की व्यवस्थाओं और मंदिर निर्माण प्रक्रिया से जुड़े कई सवालों पर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है।

ट्रस्ट की सेवाएं मुफ्त, दक्षिणा लेने की व्यवस्था नहीं

चंपत राय ने पत्र में स्पष्ट किया कि श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं को दी जाने वाली प्रमुख सेवाएं निशुल्क हैं। इनमें दर्शन पास, आरती पास और प्रसाद जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। मंदिर के अर्चकों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से पूजा-पाठ, वेद, रामायण और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ी है।पत्र के मुताबिक श्रद्धालुओं से पूजा कराने के नाम पर कोई शुल्क या दक्षिणा लेने की व्यवस्था नहीं है। मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने पर जोर दिया गया है।

चंपत राय ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मौजूद व्यवस्थाओं का भी जिक्र किया। उनके अनुसार मंदिर के निकास मार्गों पर श्रद्धालुओं को मुफ्त प्रसाद उपलब्ध कराया जाता है। सामान्य दिनों में दर्शन की प्रक्रिया अपेक्षाकृत व्यवस्थित रहती है और भीड़ के समय भी सामान्य दर्शन में अधिकतम करीब दो घंटे लगने का दावा किया गया है।

बुजुर्गों, दिव्यांगों, बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं के लिए सुगम दर्शन की विशेष व्यवस्था का भी पत्र में उल्लेख है। ऐसे श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त पास और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

तीन बैंक खातों में ट्रस्ट का पैसा

चंपत राय ने ट्रस्ट की आर्थिक व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। पत्र में बताया गया है कि ट्रस्ट के तीन बैंक खातों में धनराशि रखी जाती है। दावा किया गया है कि ट्रस्ट की ओर से कोई चेकबुक नहीं ली गई है और भुगतान ऑनलाइन आरटीजीएस के माध्यम से किए जाते हैं।

ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर चंपत राय ने कहा कि आंतरिक ऑडिट और वैधानिक ऑडिट अलग-अलग ऑडिट फर्मों से कराया जाता है। इसके अलावा जीएसटी, टीडीएस, स्टांप फीस, लेबर सेस, पीएफ और ईएसआई सहित विभिन्न सरकारी देनदारियों का भुगतान किए जाने की बात भी पत्र में कही गई है। इन व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए चंपत राय ने ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप और पारदर्शी बताया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ मंदिर निर्माण

चंपत राय के मुताबिक 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट का गठन किया।ट्रस्ट में कुल 15 ट्रस्टियों की व्यवस्था की गई। मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर समितियां बनाई गईं। इन्हीं में मंदिर निर्माण समिति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही।

पत्र में बताया गया है कि नृपेन्द्र मिश्रा मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष थे। निर्माण से जुड़े तकनीकी और महत्वपूर्ण फैसलों में समिति की केंद्रीय भूमिका रही। समिति की बैठक सामान्य तौर पर हर महीने आयोजित होने की बात कही गई है। जरूरत के अनुसार कुछ समय 15 दिन के अंतराल पर भी बैठकें हुईं।

नृपेन्द्र मिश्रा की भूमिका का विस्तार से जिक्र

चंपत राय की चिट्ठी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मंदिर निर्माण समिति और नृपेन्द्र मिश्रा की भूमिका से जुड़ा है। राय ने लिखा है कि मंदिर निर्माण से जुड़े फैसलों में समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही और अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय इसी स्तर पर लिए गए।

चिट्ठी में नृपेन्द्र मिश्रा के योगदान का सकारात्मक उल्लेख भी किया गया है। चंपत राय के मुताबिक कोरोना काल के दौरान मंदिर निर्माण का काम आगे बढ़ाना बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद जून 2020 में शुरू हुआ पत्थरों का विशाल मंदिर निर्माण जून 2026 तक पूरा होकर समाज को समर्पित किए जाने की बात कही गई है।राय ने मंदिर निर्माण की इस पूरी प्रक्रिया में नृपेन्द्र मिश्रा के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया है। पत्र के अनुसार निर्माण से जुड़े फैसलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही और निर्माण समिति के स्तर पर ही महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते थे।

हालांकि चिट्ठी सामने आने के बाद मंदिर निर्माण से जुड़े पुराने विवाद और अलग-अलग स्तर पर उठाए गए सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। विशेष रूप से निर्माण प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी और निर्णय किस स्तर पर लिए गए, इस पर पत्र ने नई जानकारी सामने रखी है।

एलएंडटी और टाटा को जिम्मेदारी कैसे मिली?

मंदिर निर्माण के लिए प्रमुख निर्माण एजेंसी और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया का भी चिट्ठी में उल्लेख किया गया है।चंपत राय के अनुसार स्वर्गीय अशोक सिंहल के पुराने सुझावों को ध्यान में रखते हुए लार्सन एंड टुब्रो यानी एलएंडटी को मंदिर निर्माण का काम सौंपा गया। वहीं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स यानी टीसीई को जिम्मेदारी दी गई।

मंदिर के वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा के चयन का भी पत्र में उल्लेख है। राय के मुताबिक चंद्रकांत सोमपुरा का चयन अशोक सिंहल ने वर्ष 1986 में किया था और आगे भी मंदिर की वास्तु संबंधी जिम्मेदारी उन्हीं के पास रही।मंदिर परिसर में बनने वाले अन्य भवनों के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म को जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी भी पत्र में दी गई है।

निर्माण समिति में ही लिए जाते थे फैसले

चंपत राय ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि मंदिर निर्माण से जुड़े ज्यादातर फैसलों में नृपेन्द्र मिश्रा की मुख्य भूमिका रही। उनके मुताबिक ऐसा कोई काम नहीं हुआ, जिसका फैसला निर्माण समिति में न लिया गया हो।

इस दावे का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया लंबे समय तक अलग-अलग तकनीकी और प्रशासनिक निर्णयों से गुजरती रही। निर्माण की डिजाइन, तकनीकी मानकों, एजेंसियों के चयन और समयसीमा जैसे विषयों पर लगातार बैठकें होती रहीं।राय के अनुसार निर्माण समिति की बैठकों में इन विषयों पर चर्चा होती थी और आवश्यक निर्णय लिए जाते थे।

अनूप मित्तल का भी अहम योगदान

पत्र में पूर्व एनबीसीसी चेयरमैन अनूप मित्तल की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। चंपत राय के अनुसार अनूप मित्तल सिविल इंजीनियर के रूप में नृपेन्द्र मिश्रा के इंजीनियरिंग सलाहकार रहे।मंदिर निर्माण समिति की बैठकों में भी उनके नियमित रूप से शामिल होने की बात कही गई है। पत्र में दावा किया गया है कि नृपेन्द्र मिश्रा के लिखित काम को तैयार करने में भी अनूप मित्तल की भूमिका रही।इससे यह संकेत मिलता है कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया केवल धार्मिक या प्रशासनिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि विशेषज्ञ इंजीनियरिंग सलाह और तकनीकी निगरानी के साथ आगे बढ़ाई गई।

जून 2026 में मंदिर निर्माण पूरा होने का दावा

चंपत राय के अनुसार कोरोना महामारी के दौर में शुरू हुआ मंदिर निर्माण कई चुनौतियों के बावजूद लगातार चलता रहा। जून 2020 से शुरू हुई पत्थरों के विशाल मंदिर की निर्माण प्रक्रिया जून 2026 तक पूरी होने का दावा किया गया है।राय ने इस उपलब्धि में निर्माण समिति, इंजीनियरों, वास्तु विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने विशेष तौर पर नृपेन्द्र मिश्रा के प्रयासों को मंदिर निर्माण की गति और व्यवस्था से जोड़कर देखा है।

एसआईटी रिपोर्ट के बीच सामने आई चिट्ठी

चंपत राय की यह 9 पन्नों की चिट्ठी ऐसे समय में सामने आई है, जब मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विवादों और आरोपों की जांच को लेकर एसआईटी रिपोर्ट की चर्चा है। ट्रस्ट को क्लीन चिट मिलने की बात सामने आने के बाद अब राय के पत्र ने मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया पर एक अलग तस्वीर पेश की है।हालांकि चिट्ठी में किए गए दावे और उसमें बताई गई व्यवस्थाएं ट्रस्ट की ओर से रखे गए पक्ष को सामने लाती हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच रिपोर्ट के आधिकारिक विवरण अलग विषय हैं।

कुल मिलाकर चंपत राय की 9 पन्नों की चिट्ठी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया, ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और निर्माण समिति की भूमिका से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। खास तौर पर नृपेन्द्र मिश्रा की भूमिका को लेकर पत्र में दी गई जानकारी इस पूरे विवाद में सबसे अहम हिस्सा बनकर सामने आई है।

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