जनता ने विपक्ष को हंगामा करने नहीं, सरकार से जवाब मांगने भेजा है...
याद रखिए,संसद जनता की है, किसी पार्टी की निजी संपत्ति नहीं !
विपक्ष को शायद यह भ्रम हो गया है कि संसद में जितना अधिक शोर होगा, उतना ही बड़ा विपक्ष दिखाई देगा। लेकिन लोकतंत्र में शोर को जनसेवा और हंगामे को संघर्ष समझने की भूल ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकती।राहुल गांधी और विपक्षी दलों को सबसे पहले यह समझना होगा कि संसद किसी आंदोलन का एक्सटेंशन नहीं है। संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक बहस का मंच है।
- अगर सरकार से कोई सवाल है, पूछिए।
- अगर सरकार से कोई शिकायत है, बहस कीजिए।
- अगर किसी घटना पर आपत्ति है, जांच की मांग कीजिए।
- अगर आपके पास प्रमाण हैं, संसद के पटल पर रखिए।
- लेकिन केवल आरोप लगाकर संसद ठप कर देना विपक्ष की ताकत नहीं, उसकी राजनीतिक कमजोरी का प्रदर्शन है।
- पैलेट गन के मामले में भी यही सवाल।
यदि किसी आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव हुआ और पुलिस कार्रवाई में कोई व्यक्ति घायल हुआ, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन राहुल गांधी से देश पूछ रहा है तो फिर...
- मेडिकल रिपोर्ट कहां है?
- घटना का पूरा वीडियो कहां है?
- पुलिस रिकॉर्ड क्या कहता है?
- कितने लोग घायल हुए?
- घटना की वास्तविक समयरेखा क्या है?
किसी एक व्यक्ति को मीडिया के सामने खड़ा करके पूरी घटना का अंतिम सत्य घोषित नहीं किया जा सकता।राजनीति में भावनाएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन संसद में प्रमाण ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।
आंदोलन खत्म,तो फिर मुद्दा जिंदा क्यों?
अगर संबंधित आंदोलन समाप्त हो चुका है, प्रदर्शनकारी अपने घर लौट चुके हैं और सरकार की ओर से संबंधित विषय पर कार्रवाई हो चुकी है, तो फिर उसी मुद्दे को संसद की कार्यवाही रोकने के लिए लगातार इस्तेमाल करने का औचित्य क्या है?
- क्या हर राजनीतिक मुद्दे को अनिश्चितकाल तक 'ऑन मोड' में रखा जाएगा?
- क्या विपक्ष का उद्देश्य सरकार को जवाबदेह बनाना है या संसद को काम न करने देना?
- यह सवाल अब सरकार से ज्यादा विपक्ष से पूछा जाना चाहिए।
- संसद बंद करके विपक्ष आखिर साबित क्या करना चाहता है?
- जनता के पैसे से संसद चलती है।
- सांसदों को वेतन मिलता है।
- संसदीय कर्मचारी काम करते हैं।
- सुरक्षा व्यवस्था रहती है।
- प्रशासनिक खर्च होता है।
- संसदीय समय निर्धारित होता है।
- और यदि यही पूरा तंत्र हंगामे के कारण काम न करे तो नुकसान किसका है?
यह पैसा देश का है, किसी पार्टी का नहीं...
जो विपक्ष जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाली संसद को लगातार बाधित करता है, उसे जनता को यह भी बताना चाहिए कि वह जिस व्यवस्था को रोक रहा है,उसकी जवाबदेहि किसके प्रति है।
विपक्ष को एक आईना दिखाना जरूरी है...
- सरकार का विरोध करना आपका अधिकार है, लेकिन संसद का विरोध करना आपका अधिकार नहीं हो सकता।
- सरकार को घेरना आपका अधिकार है, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं को ठप करना उपलब्धि नहीं है।
- सवाल पूछना लोकतंत्र है, जवाब सुनने से इनकार करना लोकतंत्र नहीं।
- आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हर आंदोलन को संसद के गतिरोध में बदल देना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी नहीं।
जनता विपक्ष को भी नंबर देती है,जनता विपक्ष का भी रिपोर्ट कार्ड बनाती है...
- विपक्ष शायद भूल रहा है कि चुनाव में केवल सरकार का रिपोर्ट कार्ड नहीं बनता।
- कितने सवाल पूछे?
- कितनी सार्थक बहस की?
- कितने मुद्दों पर तथ्य रखे?
- कितने विधेयकों पर गंभीर चर्चा की?
- जनता के कितने मुद्दे संसद में उठाए?
- और इसके साथ एक और कॉलम भी होता है—
- कितने दिन संसद रोक दी?
- यही वह आईना है जिससे विपक्ष को भागना नहीं चाहिए।
प्रधानमंत्री बनने का सपना देखना अच्छी बात है...
- लोकतंत्र में हर राजनीतिक नेता को जनता का विश्वास जीतने का अधिकार है।
- लेकिन प्रधानमंत्री बनने के लिए केवल सरकार विरोधी नारों की जरूरत नहीं होती।
- देश चलाने की क्षमता दिखानी पड़ती है।
- नीतियों का विकल्प देना पड़ता है।
- अर्थव्यवस्था की समझ दिखानी पड़ती है।
- राष्ट्रीय मुद्दों पर जिम्मेदारी दिखानी पड़ती है।
और सबसे महत्वपूर्ण...
- लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान दिखाना पड़ता है।
- संसद चलने न देना सत्ता की वैकल्पिक क्षमता का प्रमाण नहीं है।
विपक्ष यदि लगातार यही रास्ता अपनाता रहा तो उसे यह समझना होगा, कि जनता केवल यह नहीं पूछेगी कि “सरकार ने क्या किया?”
जनता यह भी पूछेगी...
“आपने विपक्ष में रहकर क्या किया?”
- सरकार को हराने के लिए जनता का विश्वास चाहिए।
- जनता का विश्वास पाने के लिए सकारात्मक राजनीति चाहिए।
सकारात्मक राजनीति के लिए केवल विरोध नहीं,विकल्प चाहिए...
- इसलिए हंगामा कम कीजिए।
- तथ्य बढ़ाइए।
- नारे कम लगाइए।
- बहस बढ़ाइए।
- संसद रोकना बंद कीजिए।
- संसद में सरकार को घेरना शुरू कीजिए।
देश को ऐसा विपक्ष चाहिए जो सरकार से कठिन सवाल पूछे...
- न कि ऐसा विपक्ष जो संसद को ही सवालों से भागने का रास्ता बना दे।
- याद रखिए,संसद जनता की है, किसी पार्टी की निजी संपत्ति नहीं।



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