G News 24 : एक सप्ताहीय क्षमता विकास कार्यक्रम का हुआ सफल समापन

 प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर के विधि विभाग द्वारा आयोजित ...

एक सप्ताहीय क्षमता विकास कार्यक्रम का हुआ सफल समापन

ग्वालियर। प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर के विधि विभाग द्वारा आयोजित एक सप्ताहीय क्षमता विकास कार्यक्रम (Capacity Development Programme) का सफल समापन आज दिनांक 31 जुलाई, 2026 को ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हुआ। दिनांक 24 जुलाई से 31 जुलाई, 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय "उच्च शिक्षा का रूपांतरण : दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम, डिजिटल एकीकरण एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण" रहा। कार्यक्रम के दौरान देश एवं विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, परिणाम-आधारित शिक्षा, अनुसंधान, डिजिटल शिक्षण एवं शैक्षणिक गुणवत्ता जैसे समसामयिक विषयों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के छह दिनों में देश एवं विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने विभिन्न समसामयिक विषयों पर अपने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। प्रथम दिवस पर प्रो. (डॉ.) आलोक वर्मा ने दक्षता-आधारित शिक्षा की आधारभूत अवधारणाए, द्वितीय दिवस पर प्रो. (डॉ.) आनंद पवार ने पाठ्यचर्या निर्माण एवं पाठ्यक्रम सुधार, तृतीय दिवस पर प्रो. (डॉ.) सगी सेथु ने डिजिटल एकीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरण एवं मिश्रित शिक्षण, चतुर्थ दिवस पर प्रो. (डॉ.) उदय देशपांडे ने विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धति एवं सूक्ष्म शिक्षण, तथा पंचम दिवस पर प्रो. (डॉ.) वंदना अरोड़ा ने शोध नैतिकता एवं गुणवत्ता आश्वासन विषय पर अपने विचार साझा किए।

समापन सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) तपन के. चंदोला , प्रोफेसर एवं निदेशक, एमिटी लॉ स्कूल (ALS), एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ रहे। उन्होंने "शोध नैतिकता एवं अनुसंधान सुशासन" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय अनुसंधान के लिए शोध नैतिकता का पालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ईमानदारी, पारदर्शिता, मौलिकता एवं उत्तरदायित्व शोध के मूल आधार हैं। शोध में साहित्यिक चोरी, डेटा में हेरफेर तथा अनैतिक शोध पद्धतियों से बचना प्रत्येक शोधकर्ता का दायित्व है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावी अनुसंधान सुशासन, संस्थानों में अनुसंधान की गुणवत्ता, उत्तरदायित्व एवं वैश्विक मानकों के अनुरूप शोध संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विधि विभाग की प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) राखी सिंह चौहान ने कहा कि यह एक सप्ताह का कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा। उन्होंने कहा कि विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए अनुभव एवं विचार शिक्षकों और शोधार्थियों को अपनी शिक्षण एवं अनुसंधान क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के कार्यक्रम भविष्य में भी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं शोध उत्कृष्टता को नई दिशा प्रदान करेंगे।

कार्यक्रम के समन्वयक  सह-प्राध्यापक  आबिल हुसैन ने सभी मुख्य वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों से शिक्षकों, अधिवक्ताओं, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम ज्ञान के आदान-प्रदान, शैक्षणिक सहयोग तथा अनुसंधान संस्कृति को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। सह-समन्वयक सह-प्राध्यापक  डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव प्रतिभागियों के शिक्षण, अनुसंधान तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता को नई दिशा प्रदान करेंगे।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में विधि विभाग के समस्त संकाय सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. अक्षय भार्गव , राहुल श्रीवास्तव , साहिल वर्मा , सह-प्राध्यापिका डॉ. दीक्षा भदौरिया , मानसी गुप्ता , ऋचा मित्तल , मानसी सोनी , जिज्ञासा वोहरा एवं  सहित विभाग के सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम के सफल संचालन में सहयोग प्रदान किया।

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