G News 24 : भारत के वोटर आईडी कार्ड का सात समंदर पार अमेरिका में बज रहा है डंका !

भारत की चुनावी व्यवस्था की ट्रंप ने की तारीफ,मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तारीफों के बांधे पुल...

भारत के वोटर आईडी कार्ड का सात समंदर पार अमेरिका में बज रहा है डंका !

भारत के चुनाव आयोग, देश के चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और देश के वोटर आईडी कार्ड कार्ड का डंका, सात समंदर पार अमेरिका में बज रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनाव व्यवस्था की तारीफ करते हुए दुनिया के सबसे विशाल लोकतंत्र की चुनावी व्यवस्था का लोहा माना है.

भारत की जिस चुनावी व्यवस्था को विपक्षी दलों के नेता ईवीएम और 'वोट चोरी' का नारा लगाकर सरकार को घेरते हैं, वहीं इसी व्यवस्था की तारीफ दुनिया की सबसे पुरानी डेमोक्रेसी और सुपरपावर अमेरिका के राष्ट्रपति ने की है. इस तरह चुनाव आयोग और भारत का वोटर आईडी कार्ड इस बार बिना किसी चुनावों के सुर्खियों में है. दरअसल राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को अमेरिकी मतदाताओं के लिए फोटो आईडी कार्ड अनिवार्य करने की मांग दोहराते हुए भारत की चुनाव व्यवस्था और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए उनकी तारीफों के पुल बांध दिए हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप ने न सिर्फ अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका जिक्र किया, बल्कि अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भी भारत के चुनावी सिस्टम की तारीफ की है. ट्रंप का ये बयान ‘सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी यानी SAVE अमेरिका एक्ट’ पारित कराने की कोशिश के बीच आया है.

इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने कहा था बोगस वोटिंग रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के मामले में अमेरिका कई देशों से पीछे है. भारत में वोटर आईडी को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ा है, जबकि अमेरिका में नागरिकता के लिए मुख्य रूप से मतदाताओं के खुद दिए गए प्रमाण पर भरोसा किया जाता है.

ट्रंप का कहना है कि भारत की तरह हर अमेरिकी नागरिक के पास वैध फोटो वोटर आईडी कार्ड होना चाहिए. ये सेव अमेरिका एक्ट पास होने से संभव होगा. क्योंकि इस कानून का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि संघीय चुनावों में फैसला लेने का अधिकार केवल अमेरिकी नागरिकों के पास हो.

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की हुई मुलाकात...

आपको बताते चलें कि ट्रंप की ये पोस्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मुलाकात के एक हफ्ते बाद आई है. दोनों ने चुनाव प्रबंधन और चुनाव कर्मचारियों की ट्रेनिंग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई थी.

भारत की चुनाव व्यवस्था का हवाला

अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर ट्रंप ने लिखा- इस महीने की शुरुआत में, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त, ज्ञानेश कुमार ने हमारे प्रशासन से पूछा था कि आप बिना वैध फोटो ID कार्ड के अमेरिका में चुनाव कैसे करवा सकते हैं? ट्रंप ने इसी बात को आधार बनाते हुए हर अमेरिकी मतदाता के लिए फोटो आईडी को अनिवार्य करने की पैरवी की है.

ट्रंप ने ये भी कहा कि भारत के पिछले संसदीय चुनावों में 64 करोड़, 64 लाख से ज्यादा लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. उनमें एक फीसदी से भी कम ने डाक के जरिए मतदान किया था. वहीं वोट डालने के लिए हर मतदाता के पास वैध फोटो पहचान दस्तावेज होना जरूरी था. इसलिए हमें अभी 'द सेव अमेरिका एक्ट' पास करने की जरूरत है.

ट्रंप का दावा है कि इससे अमेरिका में निष्पक्ष चुनाव होंगे और गलत तरीके से अमेरिका में रह रहे लोगों की पहचान करके न सिर्फ ‘चुनावी धोखाधड़ी’ रोकने में आसानी होगी, बल्कि ऐसे लोग देश की जिन सुविधाओं और संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो अमेरिका के मूल निवासियों के लिए काम आ सकेंगे.

ट्रंप फोटो वोटर आईडी पर क्यों अड़े?

अमेरिका में वोटर आईडी को अनिवार्य करने वाले कानून लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं. अमेरिका में करीब 12 फीसदी रजिस्टर्ड मतदाताओं के पास जन्म प्रमाणपत्र या वैध पासपोर्ट जैसे आम दस्तावेजी प्रमाण नहीं हैं. ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी का मानना है कि ये अप्रवासी लोग गलत तरीके से अमेरिका में बस गए और ऐसे मतदाता डेमोक्रेट्स पार्टी का कोर वोट बैंक है. कई राज्यों में ऐसे मतदाता जीत-हार के लिए निर्णायक स्थित में है. 

बताते चलें कि अमेरिकी स्टेट कंसास में अधिक सख्त वोटर आईडी कानून लागू किए जाने के बाद करीब 31,000 ऐसे अमेरिकी नागरिक वोटर के तौर पर पंजीकरण नहीं करा सके, जो कि मतदान के योग्य थे. ऐसे में ट्रंप और SAVE America Act के आलोचकों का कहना है कि मौजूदा कानूनों के तहत गैर-अमेरिकी नागरिकों को पहले से ही मतदान करने की अनुमति नहीं है. इसलिए ऐसे प्रावधानों की जरूरत नहीं है.

SAVE अमेरिका एक्ट

ट्रंप लंबे समय से SAVE अमेरिका एक्ट पारित कराने पर जोर दे रहे हैं. उनका दावा है कि इससे चुनावी धोखाधड़ी और 'वोटचोरी' दोनों को रोकने में मदद मिलेगी. इस कानून को पारित कराने वाला विधेयक 29 जनवरी को पेश किया गया था. हालांकि, इस मुद्दे पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों में मतभेद हैं. 

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