G NEWS 24 : अमेरिका ने मानी हार, ईरान की शर्तों से बढ़ी समझौते की उम्मीद !

होर्मुज संकट पर ट्रंप बैकफुट पर...

अमेरिका ने मानी हार, ईरान की शर्तों से बढ़ी समझौते की उम्मीद !

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य अब सबसे बड़ा रणनीतिक दबाव बनता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के बदले अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में नरमी के संकेत सामने आए हैं। माना जा रहा है कि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की स्थिति में अमेरिका युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। यही वजह है कि मौजूदा हालात में ट्रंप प्रशासन पर रणनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के लिए ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाना आसान नहीं है। 

ईरान के पास बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें और भूमिगत सैन्य ठिकाने हैं। भूमिगत सुरंगों में मौजूद मिसाइलों, लॉन्चरों और कमांड सेंटरों को पूरी तरह नष्ट करना अमेरिकी सेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। लंबे समय तक चल रहे संघर्ष से सैन्य खर्च के साथ अमेरिका पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और संघर्ष को समाप्त करना अमेरिकी रणनीति में महत्वपूर्ण विकल्प बनता जा रहा है। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। ड़ी क्षेत्र से निकलने वाले कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ता है। 

मौजूदा संकट के कारण पैदा हुई अनिश्चितता ने अमेरिका समेत कई देशों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में होर्मुज को दोबारा खोलना संभावित अमेरिका-ईरान समझौते का सबसे अहम मुद्दा माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने के बदले अमेरिका से कई मांगें कर रहा है। इनमें अमेरिकी प्रतिबंध हटाना, ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों और धमकियों को रोकना, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई जैसी शर्तें शामिल बताई जा रही हैं। इसके अलावा विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को रिलीज करने तथा ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ अमेरिकी आक्रामक कार्रवाई रोकने की मांग भी सामने आई है।

यदि अमेरिका इन शर्तों पर बातचीत के लिए आगे बढ़ता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात सामान्य होता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सुधरने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। भारत के लिए यह बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में कमी से आयात बिल और विदेशी मुद्रा पर दबाव घट सकता है। इससे महंगाई, परिवहन और उद्योगों की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद होगी। भारत के लिए होर्मुज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति में इस जलडमरूमध्य की बड़ी भूमिका है। 

हालांकि ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए भारत ने अपने आयात स्रोतों में विविधता बढ़ाने और वैकल्पिक सप्लाई रूट विकसित करने पर भी जोर दिया है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक समझौता नहीं हुआ है, इसलिए इसे अंतिम स्थिति मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन होर्मुज को लेकर ईरान की शर्तों और अमेरिका के बदलते रुख ने बातचीत की संभावनाओं को जरूर बढ़ा दिया है। यदि दोनों देशों के बीच समझौता होता है और होर्मुज खुलता है, तो यह न केवल संघर्ष को कम करने की दिशा में बड़ा कदम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी राहत लेकर आ सकता है।

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