G News 24 : 10 बजे से पहले शिक्षकों को लगानी होगी ऑनलाइन हाजिरी, देरी से आने वालों को बताना होगा कारण !

 MP में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस पर सख्ती ...

10 बजे से पहले शिक्षकों को लगानी होगी ऑनलाइन हाजिरी, देरी से आने  वालों को बताना होगा कारण !

भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर विभाग सख्त रुख अपना रहा है। वर्तमान व्यवस्था के तहत शिक्षकों को सुबह 9.30 बजे से 10.45 बजे के बीच अनिवार्य रूप से ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करानी होती है। यदि 10.45 के बाद अटेंडेंस लगाई जाती है तो उसे मान्य नहीं किया जाएगा। शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति यानी ई-अटेंडेंस को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने व्यवस्था को और सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है।

नए नियम के तहत नियमित शिक्षकों को अब सुबह 10 बजे से पहले अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करानी होगी। सरकारी शिक्षकों की ऑनलाइन अटेंडेंस की समय सीमा 10:45 बजे से घटाकर सुबह 10 बजे तक करने की तैयारी है। वहीं नेटवर्क विहीन स्कूलों में काम कर रहे करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों की री-ज्वाइनिंग और रुके मानदेय की समस्या दूर करने के लिए DPI ने जिलों से जानकारी मांगी है।  MP में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस पर सख्ती: अब सुबह 10 बजे से पहले लगानी होगी ऑनलाइन हाजिरी, 10:30 बजे तक अटेंडेंस लगाने वालों को देना होगा देरी का कारण। विभाग के इस बदलाव के बाद सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने की कवायद तेज हो गई है।

दूसरी ओर, ऑनलाइन प्रक्रिया और मोबाइल नेटवर्क की समस्या से परेशान प्रदेश के करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के ऐसे स्कूल, जहां मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता कमजोर या नहीं है, वहां ऑनलाइन री-ज्वाइनिंग और अन्य डिजिटल प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाने के कारण कई अतिथि शिक्षकों का मानदेय अटक गया है। अब DPI ने ऐसे स्कूलों और वहां कार्यरत अतिथि शिक्षकों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं, ताकि लंबित मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

पहले 9:30 से 10:45 बजे तक थी हाजिरी की व्यवस्था

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पहले सुबह 9:30 बजे से 10:45 बजे तक का समय निर्धारित था। इस दौरान शिक्षक मोबाइल के माध्यम से अपनी ई-अटेंडेंस दर्ज कर सकते थे। हालांकि, विभाग की ओर से अब इस व्यवस्था में बदलाव की तैयारी की जा रही है।

नए समय के अनुसार शिक्षकों को सुबह 10 बजे से पहले स्कूल पहुंचकर अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इससे विभाग का उद्देश्य शिक्षकों की स्कूल में समय पर मौजूदगी सुनिश्चित करना है। विभाग का मानना है कि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को प्रभावी बनाने से स्कूलों में अनुशासन और नियमितता को बेहतर किया जा सकेगा।

10 बजे के बाद हाजिरी पर बताना होगा कारण

नई व्यवस्था में सुबह 10 बजे की समयसीमा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी शिक्षक की ई-अटेंडेंस 10 बजे के बाद दर्ज होती है तो उसकी देरी को रिकॉर्ड में लिया जा सकता है। वहीं, सुबह 10:30 बजे तक उपस्थिति दर्ज कराने वाले शिक्षकों से देरी का कारण बताने को कहा जा सकता है। इस व्यवस्था से शिक्षकों की समय पर स्कूल पहुंचने की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। विभाग की कोशिश है कि ऑनलाइन हाजिरी केवल औपचारिकता न रहकर वास्तविक उपस्थिति की निगरानी का प्रभावी माध्यम बने। हालांकि, नेटवर्क संबंधी तकनीकी समस्या, सर्वर की दिक्कत या अन्य व्यावहारिक परेशानियों की स्थिति में शिक्षकों के सामने आने वाली समस्याओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की स्थिति कई स्थानों पर अभी भी चुनौती बनी हुई है।

शिक्षकों में बढ़ी चिंता

ई-अटेंडेंस का समय कम किए जाने की तैयारी से सरकारी स्कूलों के शिक्षकों में चर्चा तेज हो गई है। शिक्षकों का कहना है कि कई ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में परेशानी आती है। ऐसे में यदि उपस्थिति की समयसीमा और कम की जाती है तो तकनीकी दिक्कतों के कारण शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। विभाग की ओर से जहां एक तरफ समय पर ई-अटेंडेंस को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ नेटवर्क विहीन स्कूलों की जानकारी जुटाने का निर्णय यह संकेत देता है कि ऑनलाइन व्यवस्था की व्यावहारिक समस्याओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

नेटवर्क विहीन स्कूलों की मांगी जानकारी

इसी बीच लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर नेटवर्क विहीन स्कूलों और वहां कार्यरत अतिथि शिक्षकों की जानकारी मांगी है। विभाग का उद्देश्य ऐसे स्कूलों की पहचान करना है, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण ऑनलाइन री-ज्वाइनिंग अथवा अन्य आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूल ऐसे स्थानों पर संचालित होते हैं, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर रहती है। कई बार मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण शिक्षक ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते। इसका सीधा असर उनके मानदेय पर पड़ता है।अब DPI इन समस्याओं का विवरण एकत्र कराकर संबंधित अतिथि शिक्षकों के लंबित भुगतान का रास्ता साफ करने की तैयारी में है।

महीनों से अटका है कई अतिथि शिक्षकों का मानदेय
ऑनलाइन री-ज्वाइनिंग नहीं हो पाने के कारण कुछ अतिथि शिक्षकों का मानदेय महीनों से अटका हुआ है। अतिथि शिक्षक स्कूलों में अपनी सेवाएं देने के बाद भी डिजिटल प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाने के कारण भुगतान संबंधी समस्या का सामना कर रहे हैं। ऐसे में DPI की ओर से नेटवर्क विहीन स्कूलों का पूरा विवरण मांगा जाना अतिथि शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध हो जाती है तो विभाग लंबित मामलों का परीक्षण कर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।

करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों को राहत की उम्मीद
मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 70 हजार अतिथि शिक्षक स्कूलों में कार्यरत हैं। इनमें बड़ी संख्या ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में सेवाएं देने वाले शिक्षकों की है।

ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद जहां प्रशासन को शिक्षकों की उपस्थिति और सेवाओं से संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने में सुविधा हुई है, वहीं नेटवर्क की समस्या ने कई अतिथि शिक्षकों के लिए मुश्किलें भी पैदा की हैं। अब नेटवर्क विहीन स्कूलों और वहां कार्यरत अतिथि शिक्षकों का विवरण जुटाए जाने से उम्मीद है कि तकनीकी कारणों से रुका भुगतान जल्द निपटाया जा सकेगा।

एक तरफ सख्ती, दूसरी तरफ राहत
DPI की हालिया कवायद में दो अलग-अलग पहल दिखाई दे रही हैं। नियमित शिक्षकों की ई-अटेंडेंस को लेकर विभाग समयसीमा को सख्त करने की तैयारी में है, जबकि अतिथि शिक्षकों को नेटवर्क संबंधी समस्या से राहत देने के लिए विशेष जानकारी जुटाई जा रही है।

इससे विभाग का फोकस एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने पर है, तो दूसरी ओर डिजिटल व्यवस्था के कारण सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने पर भी है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि ई-अटेंडेंस के नए समय को लेकर विभाग अंतिम रूप से क्या निर्देश जारी करता है और 10 बजे के बाद उपस्थिति दर्ज कराने वाले शिक्षकों के लिए कारण बताने की प्रक्रिया किस तरह लागू की जाती है।

वहीं अतिथि शिक्षकों के मामले में नेटवर्क विहीन स्कूलों की सूची तैयार होने के बाद लंबित मानदेय के भुगतान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होगी। यदि प्रक्रिया तेजी से पूरी होती है तो लंबे समय से भुगतान का इंतजार कर रहे हजारों अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
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