फैसला आते ही प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी...
हाईकोर्ट के आदेश से पहले नहीं होंगे प्रमोशन,कानूनी सलाह के बाद सरकार बैकफुट पर !
भोपाल। प्रदेश के करीब साढ़े चार लाख सरकारी कर्मचारियों को लंबे समय से इंतजार करा रही पदोन्नति प्रक्रिया एक बार फिर कानूनी पेच में फंस गई है। सरकार ने कर्मचारियों को प्रमोशन देने की दिशा में कदम बढ़ाए जरूर थे, लेकिन अब हाईकोर्ट की अवमानना की आशंका के चलते फिलहाल पूरी प्रक्रिया रोक दी गई है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय आने के बाद ही पदोन्नति पर कोई फैसला लिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने हाल ही में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की संभावनाओं पर विधि एवं विधायी कार्य विभाग और वरिष्ठ कानून विशेषज्ञों से राय ली थी। विभाग ने स्पष्ट सलाह दी कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने और सरकार द्वारा पूर्व में कोर्ट के समक्ष दिए गए आश्वासन को देखते हुए अभी प्रमोशन शुरू करना अवमानना की श्रेणी में आ सकता है।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने यह भरोसा दिलाया था कि न्यायालय का फैसला आने तक पदोन्नति प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। भले ही यह लिखित अंडरटेकिंग के रूप में दर्ज नहीं हुई, लेकिन अदालत में मौखिक रूप से सरकार की ओर से यही रुख रखा गया था, जिसके वीडियो रिकॉर्ड भी उपलब्ध बताए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि सरकार अभी प्रमोशन आदेश जारी करती है और कोई कर्मचारी संगठन या याचिकाकर्ता इसे अदालत में चुनौती देता है, तो सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की आशंका बन सकती है। इसी वजह से सरकार ने फिलहाल कोई जोखिम नहीं लेने का निर्णय लिया है।
दस साल से रुकी पदोन्नति
प्रदेश में वर्ष 2016 से पदोन्नति पर रोक लगी हुई है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं और आरक्षण संबंधी विवादों के कारण प्रमोशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसका सबसे बड़ा असर कर्मचारियों के कैरियर पर पड़ा है। पिछले लगभग दस वर्षों में एक लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी बिना पदोन्नति पाए ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सरकारी कर्मचारियों के बीच लगातार बढ़ते असंतोष को देखते हुए मोहन सरकार ने 17 जून 2025 को मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को मंजूरी दी थी। इसके बाद विभिन्न विभागों ने विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें बुलाने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
नई नियमावली पर हाईकोर्ट ने लगा दी थी रोक
सरकार की नई पदोन्नति नीति को सामान्य वर्ग के कुछ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में चुनौती दी। 7 जुलाई 2025 को पहली ही सुनवाई में हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगाने के निर्देश दिए। सरकार ने भी अदालत के समक्ष इस पर सहमति व्यक्त की, जिसके बाद सभी 54 विभागों में प्रमोशन प्रक्रिया ठप हो गई। इस मामले की सुनवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने की। 17 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। हालांकि आदेश आने से पहले ही मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा का सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नयन हो गया और न्यायमूर्ति विनय सराफ का तबादला इंदौर पीठ हो गया। अब इस मामले की सुनवाई नई पीठ करेगी, जिससे निर्णय आने में और समय लग सकता है।
सरकार ने तैयारी नहीं रोकी, 2029 तक की सीनियरिटी लिस्ट मांगी
भले ही प्रमोशन फिलहाल रुका हो, लेकिन सरकार ने भविष्य की तैयारियां तेज कर दी हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने करीब 20 विभागों को वर्ष 2029 तक की अद्यतन सीनियरिटी सूची तैयार कर शीघ्र भेजने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को मंत्रालय में उप सचिव स्तर के अधिकारियों की बैठक में सभी विभागों से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अनारक्षित वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों का पूरा सेवा रिकॉर्ड अपडेट करने को कहा गया। साथ ही जनवरी और जुलाई में नियमित रूप से सीनियरिटी सूची अपडेट करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
फैसला आते ही तत्काल होंगे प्रमोशन
सरकार का उद्देश्य है कि जैसे ही हाईकोर्ट से हरी झंडी मिले, विभागों को अलग से तैयारी का समय न लगे और तुरंत विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकें आयोजित कर आदेश जारी किए जा सकें। इसलिए सभी विभागों को अधिकारियों और कर्मचारियों की सीनियरिटी, रिक्त पदों और प्रमोशन संबंधी रिकॉर्ड पूरी तरह अपडेट रखने के निर्देश दिए गए हैं।
युवाओं के लिए भी खुलेंगे रोजगार के अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होती है तो बड़ी संख्या में वरिष्ठ पद खाली होंगे। इससे विभागों में नई भर्ती का रास्ता खुलेगा और हजारों युवाओं को सरकारी नौकरी के अवसर मिल सकेंगे। फिलहाल प्रदेश के करीब 4.5 लाख कर्मचारी हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जिस पर उनके कैरियर की अगली दिशा तय होगी।


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