5 साल के फंड की SIT करेगी जांच...
राम मंदिर चढ़ावा गिनती में निजी-आउटसोर्सिंग एजेंसी के 'खेल' का पर्दाफाश !
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी (SIT) की जांच में खुलासा हुआ है कि आउटसोर्सिंग और निजी एजेंसियां की भी बड़ी भूमिका सामने आई है. राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती में आउटसोर्सिंग और निजी एजेंसियों पर अत्यधिक निर्भरता बड़ी चूक साबित हुई. हाउसकीपिंग (सफाई) स्टाफ से नकदी गिनने का काम कराया जा रहा था और बैंक की आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मचारी ही इस घोटाले के मास्टरमाइंड निकले.
ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच चढ़ावे को लेकर समझौता हुआ था. इसमें दानपात्र की नकदी, सोना और चांदी की गणना के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तय किया गया था. एसओपी का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना था. इसी व्यवस्था में बड़ी सेंध आउटसोर्सिंग के जरिए लगी. समझौते की मूल भावना यह थी कि गिनती कक्ष में केवल ट्रस्ट और बैंक के अधिकृत अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहेंगे. लेकिन करोड़ों की गणना के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत का हवाला देकर बैंक ने वाराणसी की निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी की सेवाएं ले लीं. एजेंसी के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को गिनती कक्ष तक नियमित पहुंच मिली. सूत्रों का कहना है कि बाद में जिन पर चढ़ावे में हेराफेरी के आरोप लगे.
अब व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं...
- क्या इतनी संवेदनशील प्रक्रिया में निजी कर्मचारियों को शामिल करने से पहले उनका सत्यापन किया गया था ? यदि किया गया था तो जिम्मेदारी किसकी थी?
- आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मचारियों का पुलिस व बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किसने कराया?
- गिनती कक्ष में प्रवेश की अंतिम अनुमति किस स्तर से जारी होती थी?
- बैंक के पर्यवेक्षण की व्यवस्था होने के बावजूद कथित अनियमितताएं लंबे समय तक कैसे नहीं पकड़ी गईं?
- क्या पूरी व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए शुरुआत से ही सुनियोजित तरीके से ‘अपने’ लोगों को शामिल कराया गया?
- जांच के घेरे में ये बड़े सवाल एसओपी में अधिकृत कर्मियों की व्यवस्था होने के बावजूद निजी एजेंसी की जरूरत क्यों पड़ी?
पुलिस सूत्रों के अनुसार निजी सुरक्षाकर्मियों पर शक है, जिन्हें पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया जाएगा.
सुभाष और टिन्नू यादव ने कैसे की गड़बड़ी
पुलिस, एसएसएफ, पीएसी और सीआरपीएफ की तैनाती मंदिर की सुरक्षा में है. प्रत्येक 15 दिन में सभी के ड्यूटी प्वाइंट बदले जाते हैं, लेकिन गणना में ऐसा नहीं था. एक-दो साल से अधिकतर वही कर्मी गणना में लगे थे, क्योंकि ड्यूटी गणना इंचार्ज सुभाष व टिन्नू यादव लगाते थे. इसलिए हेरफेर होता रहा. निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका जांची जा रही है. चर्चा तो ये भी है कि आयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच सीबीआई को दी जा सकती है.
अनिल मिश्रा, गोपाल राव और चंपत राय की बढ़ेंगी मुश्किलें...
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने अब एक नया और बड़ा मोड़ ले लिया है. इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पिछले पांच सालों के पूरे फंड का ऑडिट करने जा रही है. शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर फाइनेंशियल गड़बड़ियों की आशंका जताई गई है, जिसके बाद सरकार ने SIT की जांच की अवधि को दो हफ्ते के लिए और बढ़ा दिया है.
हर एक ट्रांजैक्शन पर SIT की नजर
SIT को अब तक की जांच में कुछ ऐसे अहम सबूत मिले हैं, जो सीधे तौर पर फाइनेंशियल गड़बड़ियों की तरफ इशारा करते हैं. यही वजह है कि अब ट्रस्ट के बैंक खातों और हर एक फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच की जाएगी. SIT के अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दान में आया पैसा कहां और कैसे इस्तेमाल हुआ. इसके साथ ही मंदिर निर्माण के काम में भी कमिशनखोरी के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी भी गहन जांच की जाएगी.
ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों पर संकट
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि जांच की आंच अब ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों तक पहुंच सकती है. सूत्रों के मुताबिक, जांच में जो सबूत सामने आ रहे हैं, उससे ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य अनिल मिश्रा, गोपाल राव और चंपत राय की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं. निर्माण कार्य में कमीशनखोरी के आरोपों के चलते अनिल मिश्रा पर विशेष रूप से शिकंजा कस सकता है.
दान में मिली ज्वेलरी का हिसाब देना बड़ी चुनौती
इस पूरे विवाद में ट्रस्ट के लिए सबसे बड़ी मुसीबत दान में मिले सोने-चांदी और गहनों का हिसाब देना साबित हो सकती है. सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट ने अब तक इस ज्वेलरी का कोई प्रॉपर ऑडिट नहीं कराया है. ऐसे में SIT के सामने यह साफ करना कि कितना सोना-चांदी आया और वह इस वक्त कहां है, ट्रस्ट के लिए एक बेहद मुश्किल टास्क होने वाला है.
गुरुवार को बड़ी मीटिंग, फिर अयोध्या जाएगी टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT के तीन बड़े अधिकारी लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस, और स्पेशल फाइनेंस सेक्रेटरी नील रतन गुरुवार को एक अहम बैठक करने वाले हैं. इस बैठक में अब तक की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, जिसके तुरंत बाद यह हाई-लेवल टीम आगे की कार्रवाई के लिए अयोध्या रवाना होगी. माना जा रहा है कि इस डिटेल्ड ऑडिट रिपोर्ट के सामने आने के बाद कई ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, जो राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करेंगे.


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