G News 24 : पंजाब में महिलाओं पर डंडे और दिल्ली उपद्रवियों पर दुलार !

महिला कर्मचारियों पर लाठीचार्ज और दिल्ली में उपद्रवियों के समर्थन की राजनीति...

पंजाब में महिलाओं पर डंडे और दिल्ली उपद्रवियों पर दुलार !

पंजाब में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक धरने पर बैठी महिला सफाई कर्मचारियों पर जिस तरह पंजाब पुलिस के पुरुष आरक्षकों ने लाठियां बरसाईं, उसने आम आदमी पार्टी की कथनी और करनी के बीच का अंतर उजागर कर दिया है। वे महिलाएं अपने वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं की मांग कर रही थीं। उनके हाथों में न हथियार थे, न हिंसा का कोई इरादा। फिर भी उन्हें बलपूर्वक हटाने के लिए डंडों का सहारा लिया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस घटना पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल एक शब्द भी बोलेंगे? क्या वे पंजाब सरकार से जवाब मांगेंगे? क्या वे उन महिला कर्मचारियों से मिलने जाएंगे, जिन पर उनकी ही सरकार की पुलिस ने लाठियां बरसाईं?

विडंबना देखिए कि दूसरी ओर दिल्ली में जब जंतर-मंतर पर हुए उपद्रव के दौरान पुलिस बल पर हमला हुआ, महिला पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की हुई, पुलिस अधिकारियों के घायल होने की खबरें सामने आईं और सरकारी व्यवस्था को चुनौती देने वाले लोगों का समर्थन किया गया, तब उन्हीं उपद्रवियों के पक्ष में खड़े होने की राजनीति भी देखने को मिली। यदि एक ओर पुलिस पर हमला करने वालों के प्रति सहानुभूति दिखाई जाए और दूसरी ओर अपने ही शासन में शांतिपूर्ण महिला कर्मचारियों पर डंडे बरसाए जाएं, तो स्वाभाविक रूप से राजनीतिक दोहरे मापदंडों पर प्रश्न उठेंगे।

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है। लेकिन यह अधिकार किसी राजनीतिक दल की सुविधा के अनुसार बदल नहीं सकता। यदि किसी राज्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली महिलाओं पर बल प्रयोग होता है, तो उसकी भी उतनी ही तीखी आलोचना होनी चाहिए, जितनी दूसरे राज्यों की घटनाओं की की जाती है। लोकतंत्र में सिद्धांत व्यक्ति या दल देखकर नहीं बदलते।

जनता पूछ रही है…

क्या संवेदनशीलता केवल तब दिखाई जाएगी, जब घटना किसी दूसरे राज्य में हो? क्या अपने शासन में महिलाओं पर लाठीचार्ज और दूसरे राज्यों में मानवाधिकारों की बातें करना राजनीतिक ईमानदारी कहलाएगा? क्या यह वही राजनीति नहीं है, जिसमें अपने लिए अलग और दूसरों के लिए अलग पैमाना अपनाया जाता है?

जनता की साइलेंट चेतावनी !

सत्ता में बैठी हर सरकार को यह याद रखना चाहिए कि जनता सब देख रही है। महिलाओं पर डंडे बरसाकर और उपद्रवियों पर राजनीतिक संरक्षण बरसाकर लोकतंत्र मजबूत नहीं होता। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब कानून सब पर समान रूप से लागू हो, चाहे वह प्रदर्शनकारी हो, पुलिसकर्मी हो या सत्ता में बैठा कोई राजनीतिक दल।

दोहरे मापदंडों की राजनीति अल्पकालिक लाभ तो दे सकती है, लेकिन जनता का विश्वास खोने की कीमत अंततः हर राजनीतिक दल को चुकानी पड़ती है।

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