G NEWS 24 : वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद !

नियुक्त सदस्य पर लगाए गंभीर आरोप...

वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद !

मध्य प्रदेश में नए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने की तैयारी पर सियासी और सामाजिक विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर मुस्लिम समाज के कई संगठनों ने कड़ा विरोध जताते हुए अदालत जाने की बात कही है, जबकि कांग्रेस विधायक ने भी इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। दूसरी ओर, कुछ संगठनों ने नियुक्त किए गए सदस्यों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय नए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत की जा रही नियुक्तियों को लेकर घमासान मचा हुआ है। इस फैसले से जहां मुस्लिम समाज के कई संगठन नाराज हैं, वहीं कांग्रेस विधायक ने भी इस मामले को अदालत में ले जाने की बात कही है। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के प्रावधान लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है। इसके तहत राज्य वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की तैयारी की गई है।

गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल किए जाने के फैसले का मुस्लिम समाज के कई संगठनों ने विरोध किया है। संगठनों का कहना है कि वे इस निर्णय के खिलाफ अदालत का रुख करेंगे। उनका तर्क है कि वक्फ की संपत्ति अल्लाह की अमानत होती है और उसकी देखरेख वही व्यक्ति करे, जो इस्लाम को मानता हो। उनका कहना है कि वक्फ करने वाला व्यक्ति मुस्लिम होता है और उसकी वसीयत या अन्य दस्तावेज अक्सर उर्दू भाषा में होते हैं। ऐसे में किसी गैर-मुस्लिम के लिए उन दस्तावेजों को समझना और वक्फ करने वाले की मंशा के अनुरूप संपत्ति का उपयोग सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है।

मुस्लिम संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि वक्फ बोर्ड में शामिल किए गए दो गैर-मुस्लिम सदस्यों में से एक इंदौर के मनोज मालपानी हैं, जिन पर भू-माफिया होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। संगठनों का दावा है कि उनका संबंध संघ से जुड़े संगठनों और बजरंग दल सहित अन्य संगठनों से रहा है। साथ ही आरोप लगाया गया कि पूर्व में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने थाने में प्रवेश कर थाना प्रभारी की कुर्सी पर बैठने जैसी घटना को अंजाम दिया था। 

मुस्लिम संगठनों ने आरोप लगाया कि ऐसे व्यक्ति को वक्फ बोर्ड में शामिल करने से वक्फ संपत्तियों पर कब्जे की आशंका बढ़ सकती है। हालांकि, मनोज मालपानी या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हुई है। मामले को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है और अब सभी की नजरें संभावित कानूनी कार्रवाई और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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