G News 24 : अचानक बादलों से खाली हुआ 80% भारत, अल नीनो नहीं... अब ये समुद्री तूफान बना 'विलेन'!

 बारिश की उम्मीद के बीच लगा बड़ा झटका...

अचानक बादलों से खाली हुआ 80% भारत, अल नीनो नहीं... अब ये समुद्री तूफान बना 'विलेन'!

एक ओर जून में सूखा जैसे हालात थे, तो वहीं जुलाई के शुरुआत में ही देश के ज्यादातर हिस्सों में जोरदार बरसात देखने को मिली. बरसात हुई तो ऐसी हुई कि मुंबई-गुजरात के बड़े शहरों में बाढ़ जैसे हालात हो गए. मौसम के इस यू-टर्न ने न सिर्फ बरसात कराया, बल्कि वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है. 

बारिश की भारी तबाही के बाद मानसून पर अचानक ब्रेक लग गया है. सैटेलाइट तस्वीरों में देश का 80% हिस्सा बादलों से खाली और सूखा नजर आ रहा है. अल नीनो नहीं, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर में उठा एक भयंकर समुद्री तूफान इसका असली विलेन बनकर सामने आया है. जहां एक तरफ अल नीनो की वजह से कम बारिश की संभावना थी, वहीं मॉनसून ने शुरुआत में ही जोरदार बारिश हुई. लेकिन अब बार फिर से बदलों ने बगावती तेवर दिखाना शुरू कर दिया है.

 11 जुलाई, शनिवार को सामने आईं सैटेलाइट तस्वीरों ने देश की धड़कनें बढ़ा दी हैं. भारत का लगभग 70 से 80 फीसदी हिस्सा इस समय पूरी तरह बादलों से खाली और सूखा नजर आ रहा है. आखिर पीक सीजन में मानसून अचानक कहां गायब हो गया? चौंकाने वाली बात यह है कि भारत को सुखाने वाला यह 'विलेन' देश में नहीं, बल्कि यहां से हजारों किलोमीटर दूर बैठा है. 

हजारों किलोमीटर दूर छिपा है असली 'विलेन'

आखिर मानसून को किसने रोक दिया? इसका जवाब भारत में नहीं, बल्कि यहां से हजारों किलोमीटर दूर पश्चिमी प्रशांत महासागर में छिपा है. दरअसल, इस समय प्रशांत महासागर में एक बेहद ताकतवर समुद्री तूफान आया हुआ है. यह तूफान इतना भयावह है कि यह भारतीय उपमहाद्वीप से नमी और हवा के दबाव को अपनी ओर खींच रहा है. इस वजह से भारत में बारिश लाने वाला मानसून ट्रफ यानी कम दबाव का क्षेत्र बहुत ही कमजोर हो गया है और देश में बारिश पर ब्रेक लग गया है.

अभी और बढ़ेगा पारा-IMD

IMD के अनुसार, मध्य और दक्षिणी भारत में अगले कुछ दिनों तक बारिश बहुत कम होगी. देश के कई हिस्सों में बादल न होने के कारण से दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है, यानी गर्मी और उमस परेशान कर सकती है. अब अच्छी बारिश के लिए प्रशांत महासागर के इस तूफान के कमजोर होने का इंतजार करना होगा.

इस साल का मानसून शुरुआत से ही डरा रहा है...

  • जून के महीने में सामान्य से 40% कम बारिश हुई, जो हाल के सालों में सबसे खराब शुरुआत थी.
  • जून के आखिरी और जुलाई के पहले हफ्ते में हुई भारी बारिश से यह घाटा कम होकर 14% पर आ गया.
  • 9 जुलाई को मानसून ने पूरे देश को कवर तो कर लिया, लेकिन अब यह एक कमजोर फेज में चला गया है.

आगे क्या होगा...!

मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई के बचे हुए दिनों में सामान्य से कम यानी लगभग 94% से कम बारिश होगी. इसके साथ ही प्रशांत महासागर में अल नीनो का खतरा भी मंडरा रहा है, जो आगे चलकर मानसून को और कमजोर कर सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून गायब नहीं हुआ है, बल्कि कुछ समय के लिए ब्रेक पर है. अब देखना होगा कि भारतीय मानसून कितनी जल्दी अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ पाता है.

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