सोने में तबाही,18 साल की सबसे बड़ी गिरावट !
₹50000 सस्ता हुआ सोना (गोल्ड), अभी खरीदें या और गिरेगा भाव !
सोने की कीमत संभल नहीं पा रही है. साल के शुरुआत में जो सोना रिकॉर्ड तोड़ रहा था, अब सोना लगातार चौथे महीने सस्ता हो रहा है. ऐसे में सवाल ये कि क्या ये सोना खरीदने का सही समय है या दाम अभी और गिरने वाले हैं ? आज उसकी कीमतें संभल नहीं पा रही है. 2026 के शुरुआती दिन MCX पर 1,92,991 रुपये प्रति 10 ग्राम के आंकड़े तो छूने वाले गोल्ड ने अब 18 साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. सोने में साल 2008 के बाद से सबसे खराब मासिक गिरावट देखी जा रही है.
50,600 रुपये से अधिक सस्ता हो चुका है सोना
आज सोना अपने ऑल टाइम हाई से 50,600 रुपये से अधिक सस्ता हो चुका है. सोने की कीमत अपने पीक प्राइस से 26 फीसदी तक गिर चुकी है. इंटरनेशनल मार्केट में सोने में सबसे बड़ी मंथली गिरावट देखने को मिली है, जिसने अक्टूबर 2008 के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिर्फ जून महीने में गोल्ड करीब 12% टूट चुका है. मंगलवार, 30 जून को स्पॉट गोल्ड के दाम 0.8% गिरकर 3,985.57 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गए. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक आज स्पॉट गोल्ड की कीमत 1 फीसदी तक फिसल गई. जून में स्पॉट गोल्ड करीब 13% गिरा.
MCX पर सोना कितना सस्ता हुआ?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर जून 2026 में सोना19,700 रुपए सस्ता हो चुका है. 1 जून 2026 को 24 कैरेट वाले सोने की कीमत 1.60 लाख रुपये थी. 30 जून तो यह गिरकर 1,42,320 रुपये पर पहुंच चुका है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट पर जारी रेटलिस्ट के मुताबिक 1 जून को 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने का भाव 1,55,599 रुपये प्रति 10 ग्राम था. 30 जून को वो गिरकर 1,40,382 रुपये पर आ चुका है. यानी करीब 15,217 रुपये से अधिक की गिरावट आ चुकी है.
2008 में सोना कितना गिर गया था और क्यों ?
2008 के वैश्विक वित्तीय संकट (Global Financial Crisis) के दौरान सोना क्रैश हो गया था. सितंबर 2008 में लेहमैन ब्रदर्स के दिवालिया होने के बाद भारी नकदी किल्लत के चलते सोने की कीमत अपने उच्चतम स्तर से लगभग 25% तक गिर गई थी. मार्च 2008 में सोना करीब $1,000 प्रति औंस के करीब था, वो अक्टूबर 2008 में गिरकर $692 पर पहुंच गया था.
क्यों इतना सस्ता हो रहा है सोना ?
आमतौर पर देखा जाता है कि अनिश्चितता, महंगाई, युद्ध और तनाव की स्थिति में सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार सोना अलग ही रूप दिखा रहा है. ईरान युद्ध की वजह से सोने की कीमतों पर दवाब बढ़ा है. युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से मंहगाई बढ़ी है, जिसके चलते इस बात की आशंका प्रबल है कि अमेरिकी फेडरल की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है.
कौन हैं सोने के असली दुश्मन?
CME FedWatch Tool के अनुसार, सितंबर 2026 में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 64% है. ब्याज दर बढ़ने और डॉलर बॉन्ड की मजबूती सोने की चमक को कमजोर कर देती है. निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगाने लगते हैं, क्योंकि वहां उन्हें इंटरेस्ट मिलता है. अमेरिकी मार्केट एक्सपर्ट एडवर्ड मीर की माने, तो ऊंची महंगाई, ब्याज दरों में बढ़ोतरी का डर और मजबूत डॉलर सोने के दुश्मन बने हुए हैं.
सोना चढ़ेगा या अभी और गिरेगा ?
सिंगापुर की फाइनेंशियल फर्म ओवरसी-चाइनीज बैंकिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एक्सपर्ट क्रिस्टोफर वोंग की माने तो सोने में मजबूती लौटे, इसके लिए जरूरी है कि बॉन्ड यील्ड में गिरावट हो या डॉलर कमजोर हो या फिर ब्याज दरों को लेकर फेरडल रिजर्व का रूख में नरमी हो. अगर ऐसा होता है, तो सोना वापसी कर सकता है.
क्या यह सोना खरीदने का सही समय है ?
सोने के दाम में लगातार हो रही गिरावट के बाद लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या ये खरीदारी का सही समय है? अगर अमेरिकी लेबर मार्केट का डेटा कमजोर आता है, या महंगाई से राहत मिलती है, तो सोना रिकवरी कर सकता है. सोना $4,100-$4,150 प्रति औंस के रेंज में वापसी कर सकता है. अगर ऐसा नहीं होता है, तो सोना $4,000 के आसपास कारोबार कर सकता है. कमोडिटी एक्सपर्ट मानते हैं कि एक साथ खरीदारी या और गिरावट का इंतजार करने के बजाए आप सिस्टमैटिक तरीके से खरीदारी कर सकते हैं, यानी थोड़ा-थोड़ा करके निवेश कर सकते हैं. SIPs के जरिए गोल्ड ETFs, सॉवेरन गोल्ड या डिजिटल गोल्ड में निवेश कर सकते हैं.


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