G News 24 : मध्य प्रदेश लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (SPE) अब RTI के दायरे में आया !

 सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला ...

मध्य प्रदेश लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (SPE) अब RTI के दायरे में आया !

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में मध्य प्रदेश सरकार की उस अधिसूचना को असंवैधानिक और अवैध करार दे दिया, जिसके जरिए लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (SPE) को सूचना के अधिकार कानून की पहुंच से दूर रखा गया था। यह अधिसूचना 25 अगस्त 2011 को जारी की गई थी और पिछले डेढ़ दशक से पारदर्शिता की राह में एक बड़ी रुकावट बनी हुई थी।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकायुक्त का SPE न तो कोई खुफिया संगठन है और न ही कोई सुरक्षा एजेंसी। इसलिए आरटीआई अधिनियम की धारा 24(4) के तहत उसे किसी भी प्रकार की छूट देना कानूनन उचित नहीं ठहराया जा सकता।

इस मामले की पृष्ठभूमि एक ऐसे पुलिस इंस्पेक्टर से जुड़ी है जो स्वयं भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे थे और उन्होंने लोकायुक्त जांच से संबंधित जानकारी आरटीआई के तहत मांगी थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पहले ही वह जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अब पूरी तरह सही ठहरा दिया है।

इस निर्णय का व्यापक महत्व यह है कि अब कोई भी आम नागरिक लोकायुक्त के इस जांच विंग से भ्रष्टाचार के मामलों सहित किसी भी विषय पर जानकारी मांग सकेगा। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लोकायुक्त संस्थाएं पहले से ही आरटीआई के दायरे में काम कर रही हैं। मध्य प्रदेश अब उस कतार में शामिल हो गया है जहां भ्रष्टाचाररोधी तंत्र खुद भी जवाबदेही के दायरे में होगा। यह फैसला उस बुनियादी सिद्धांत को पुष्ट करता है कि जो संस्था दूसरों के भ्रष्टाचार की जांच करती है, वह खुद भी सार्वजनिक जांच से ऊपर नहीं हो सकती।

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