G NEWS 24 : MP पुलिस का "सेफ क्लिक 2.0" अभियान के जरिए ग्वालियर पुलिस ने छेड़ी साइबर सुरक्षा की मुहीम

अब साइबर अपराधियों से पहले पहुंच रही पुलिस की जागरूकता...

MP पुलिस का "सेफ क्लिक 2.0" अभियान के जरिए ग्वालियर पुलिस ने छेड़ी साइबर सुरक्षा की मुहीम

ग्वालियर। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित प्रदेशव्यापी विशेष साइबर जागरूकता अभियान सेफ क्लिक 2.0 के अंतर्गत ग्वालियर पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के प्रति जनजागरूकता का व्यापक अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर धर्मवीर सिंह के निर्देशन एवं अभियान के नोडल अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजावल जग्गा के मार्गदर्शन में अभियान के पाँचवें दिवस जिले के समस्त थाना क्षेत्रों में पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों ने गांव-गांव, गली-मौहल्ला और सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचकर जनचौपाल आयोजित की जाकर आमजन को साइबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। 

साइबर जागरूकता अभियान सेफ क्लिक 2.0 के तहत जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आज व्यापक स्तर पर जनचौपाल लगाकर पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों, महिलाओं, विद्यार्थियों, व्यापारियों, कर्मचारियों एवं युवाओं से संवाद स्थापित कर उन्हें साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए-नए तरीकों से अवगत कराया। लोगों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने तथा ऑनलाइन लेन-देन के दौरान आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान के दौरान एसडीओपी बेहट/डीएसपी अपराध मनीष यादव ने उटीला में जन चौपाल लगाकर महिलाओं व आमजनों को डिजिटल अरेस्ट एवं म्यूल बैंक खातों के संबंध में विशेष रूप से जागरूक किया।

 उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग अथवा अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को डराते-धमकाते हैं और तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में होने का झांसा देकर धनराशि ट्रांसफर कराने का प्रयास करते हैं, जबकि भारतीय कानून में ऐसी कोई प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि कई लोग लालच या अनजाने में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड अथवा इंटरनेट बैंकिंग सुविधा दूसरों को उपलब्ध करा देते हैं, जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की राशि के लेन-देन के लिए करते हैं। 

ऐसे खातों को म्यूल बैंक खाते कहा जाता है और इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर खाताधारक के विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड अथवा बैंकिंग संबंधी जानकारी उपलब्ध न कराएं तथा किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करें। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों को बताया कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी फर्जी लिंक, नकली वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वीडियो कॉल, ऑनलाइन निवेश, कस्टमर केयर और डिजिटल भुगतान के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। 

आमजन से अपील की गई कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें तथा अपना ओटीपी, बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सीवीवी, पासवर्ड या अन्य बैंकिंग जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या ऑनलाइन ऑफर मिलने पर तत्काल सतर्क रहें। अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों ने विशेष रूप से नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने माता-पिता एवं वरिष्ठजनों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी वीडियो कॉल, ऑनलाइन निवेश, बैंक अधिकारी बनकर की जाने वाली ठगी एवं अन्य साइबर अपराधों के बारे में समय-समय पर जानकारी दें। जागरूक परिवार ही साइबर अपराधों से प्रभावी सुरक्षा का सबसे मजबूत माध्यम है। 

ग्वालियर जिले के समस्त थाना क्षेत्रों में जनचौपाल लगाकर आमजन को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को सोशल मीडिया पर साइबर क्राइम से बचाव हेतु आवश्यक सुरक्षा टिप्स दिए एवं ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय विशेष सावधानी रखने हेतु आगाह किया गया। साथ ही अनजान नंबर से आए वीडियो कॉल, लिंक, संदेश पर जांच करने के पश्चात ही विश्वास करने की समझाइस दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता हेतु पंपलेट वितरित किये गये और उन्हे बताया गया कि साइबर अपराध होने पर तत्काल साइबर क्राइम हेल्प लाइन नम्बर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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