G News 24 : CM मोहन यादव के परिवार की 168 एकड़ जमीन खरीद पर मचा बवाल,कांग्रेस ने खोला मोर्चा !

 हाईवे प्रोजेक्ट और मास्टर प्लान क्षेत्रों में निवेश के आरोप... 

CM मोहन यादव के परिवार की 168 एकड़ जमीन खरीद पर मचा बवाल,कांग्रेस ने खोला मोर्चा !

मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब एक राष्ट्रीय अखबार की पड़ताल में मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़ी जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर कई गंभीर दावे किए गए। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन तथा आसपास के उन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी, जहां सड़क और अन्य विकास परियोजनाएं प्रस्तावित थीं या उन पर काम चल रहा था। इन खुलासों के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव को निशाने पर लेना शुरू कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से लेकर दिसंबर 2025 तक मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे। इन प्लॉटों का कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ बताया गया है। दावा किया गया है कि इनमें से बड़ी संख्या में जमीनें उन इलाकों में खरीदी गईं जहां बाद में सड़क, हाईवे या अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू हुईं या विस्तार पाया।

पड़ताल में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री के परिजन केवल जमीन खरीदने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कई मामलों में उन जमीनों के विकास के लिए बिल्डरों के साथ समझौते भी किए गए। कुछ परियोजनाओं में परिवार के सदस्य स्वयं डेवलपर की भूमिका में भी दिखाई दिए। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या विकास परियोजनाओं की जानकारी का फायदा उठाकर निवेश किया गया।

रिपोर्ट में उज्जैन के गांगेड़ी क्षेत्र का विशेष उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री के चचेरे भाई गोविंद यादव और उनके सहयोगियों ने अप्रैल 2024 से जुलाई 2025 के बीच 16 अलग-अलग सौदों के जरिए लगभग 41 एकड़ जमीन खरीदी। यह क्षेत्र उज्जैन-बदनगर और उज्जैन-इंदौर हाईवे के जंक्शन के पास स्थित है, जहां सड़क परियोजनाओं के कारण भूमि की कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई जा रही थी।

दावा किया गया है कि जमीन खरीदने के कुछ महीनों बाद ही जुलाई 2024 से सितंबर 2025 के बीच इन भूखंडों को पांच चरणों में इंदौर की एक निर्माण कंपनी को विकास के लिए सौंप दिया गया। समझौते के अनुसार डेवलपर को अपनी लागत और जोखिम पर 24 महीने के भीतर परियोजना पूरी करनी थी। इसके बदले विकसित संपत्ति का लगभग 67.8 प्रतिशत हिस्सा जमीन मालिकों यानी गोविंद यादव और उनके सहयोगियों को वापस मिलना था, जिसे वे बेच सकते थे या अपने उपयोग में ला सकते थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उज्जैन में महालोक परियोजना बनने के बाद शहर में रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ा है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन से उज्जैन निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। इसी बढ़ती संभावनाओं के बीच मुख्यमंत्री के परिवार और उनके करीबी रिश्तेदारों द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के आरोप लगाए गए हैं।

सरकारी रिकॉर्ड के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि जमीन खरीदने वालों में मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, बेटे वैभव यादव की पत्नी शालिनी यादव, भाई नंदलाल यादव और नारायण यादव, नारायण यादव की पत्नी रेखा यादव, उनके पुत्र अभय यादव तथा चचेरे भाई गोविंद यादव और नीलेश यादव शामिल हैं। इन नामों के आधार पर कांग्रेस यह आरोप लगा रही है कि विकास परियोजनाओं से लाभ लेने के उद्देश्य से व्यवस्थित रूप से जमीनों में निवेश किया गया।

पड़ताल में यह भी दावा किया गया है कि सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों और लैंड पूलिंग को लेकर किसानों के विरोध के बीच भी मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने लगभग 92 एकड़ क्षेत्रफल वाले 62 प्लॉट खरीदे। यह खरीद ऐसे समय हुई जब स्थानीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण और विकास योजनाओं को लेकर बहस चल रही थी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए हलफनामे का भी उल्लेख किया गया है। उसमें उनके पास लगभग 17 एकड़ जमीन होने की जानकारी दी गई थी, जिसमें कुछ हिस्सा पैतृक संपत्ति और कुछ खरीदी गई जमीन थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम पर भी जमीन दर्ज है और परिवार की कंपनी सिद्धि विनायक डेवकॉन प्राइवेट लिमिटेड के पास भी बड़ी मात्रा में भूमि मौजूद थी। इसी कंपनी के माध्यम से कुछ जमीनों की खरीद-बिक्री होने का दावा भी रिपोर्ट में किया गया है।

सबसे बड़ा आरोप यह लगाया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदी गई कुल 168 एकड़ जमीन में से लगभग 111 एकड़ भूमि उन इलाकों में स्थित है जो उज्जैन और आसपास की घोषित सड़क विकास परियोजनाओं के करीब हैं। इनमें इंदौर, भोपाल, नागदा, बड़नगर, झालावाड़ और गरोठ से जुड़े सड़क मार्ग शामिल बताए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मास्टर प्लान में बदलाव कर कुछ क्षेत्रों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई, हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अभी कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

कांग्रेस द्वारा यह भी दावा किया गया है कि दिसंबर 2023 के बाद दो साल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन में ₹45 करोड़ की लागत से 168 एकड़ में फैले 137 प्लॉट खरीदे. जानें क्या किया जा रहा है दावा.मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार पर उज्जैन और आसपास बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने का आरोप लगाया।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है कि विकास परियोजनाओं के बीच मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के पीछे क्या कारण थे। कांग्रेस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

हालांकि अब तक मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भारतीय जनता पार्टी ने भी इस विषय पर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा और अटकलों का दौर जारी है।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में है। रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच या आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री, भाजपा और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को भ्रष्टाचार, हितों के टकराव और सत्ता के दुरुपयोग से जोड़कर जनता के बीच उठाने की तैयारी में दिखाई दे रहा है।




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