G News 24 : का दावा,सपा के 25-26 सांसद टूटने को तैयार,यूपी की सियासत में आया भूचाल :डिप्टी CM श्री मौर्य

लखनऊ और दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल...

का दावा,सपा के 25-26 सांसद टूटने को तैयार,यूपी की सियासत में आया भूचाल :डिप्टी CM श्री मौर्य 

लोकसभा के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले देश और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव गुट) में मची भगदड़ के बीच अब उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी (सपा) पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के एक ताजा और बेहद सनसनीखेज दावे ने सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। डिप्टी सीएम मौर्य ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के 25 से 26 सांसद इस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संपर्क में हैं और वे पार्टी तोड़ने को तैयार बैठे हैं।

 केशव प्रसाद मौर्य ने सपा पर तीखा तंज कसते हुए कहा, समाजवादी पार्टी के 25-26 सांसद अभी टूटने को तैयार हैं, लेकिन हम अभी उन्हें तोड़ नहीं रहे हैं। सपा चाहे जितने भी सम्मेलन या मंथन कर ले, उसका कोई भला होने वाला नहीं है। समाजवादी पार्टी का भविष्य अब खत्म होने की कगार पर है और वह दिन दूर नहीं जब सपा सिर्फ सैफई तक सिमट कर रह जाएगी। इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक रणनीतिकारों के कान खड़े हो गए हैं, क्योंकि हाल ही में सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने भी सपा में बड़ी टूट का दावा किया था। 

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की राजनीति में क्षेत्रीय दलों के भीतर एक बड़ा असंतोष देखने को मिल रहा है। संसद सत्र से ठीक पहले विपक्षी खेमे को दो बड़े झटके लग चुके हैं: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी है। इन सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) नामक नए क्षेत्रीय दल में विलय का ऐलान कर दिया है और केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की है। इस बागी गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग भी सौंप दी है।

 महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में भी एक बार फिर बगावत की सुगबुगाहट तेज है। सूत्रों के मुताबिक, उद्धव गुट के कम से कम 5 लोकसभा सदस्य पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं और वे जल्द ही किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो सकते हैं या अपने अलग गुट का विलय कर सकते हैं। मौर्य ने इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि देश में जो भी पार्टियां टूट रही हैं, उसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं है। यह इन पार्टियों का आंतरिक अंतर्विरोध और नेतृत्व के प्रति अविश्वास है। उन्होंने कहा कि सपा का भविष्य भी जल्द ही टीएमसी जैसा होने वाला है। 

डिप्टी सीएम के इस दावे ने निश्चित रूप से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की धड़कनें बढ़ा दी हैं। याद दिला दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपना अब तक का सबसे ऐतिहासिक और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। सपा ने सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से अकेले 37 सीटों पर परचम लहराया था, जिसमें भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली अयोध्या (फैजाबाद) सीट को छीनना भी शामिल था। इस बड़ी जीत के बाद अखिलेश यादव संसद में विपक्ष की एक मजबूत आवाज बनकर उभरे थे। लेकिन राजनीति में परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती। जानकारों का मानना है कि यदि केशव प्रसाद मौर्य के दावों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो यह सपा के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

विरोधी खेमे का मानना है कि चुनाव जीतने के बाद कई सांसदों में टिकट वितरण, स्थानीय राजनीति और पार्टी के भविष्य के रुख को लेकर असंतोष पनप रहा है। हालांकि, सपा के शीर्ष नेताओं ने इस दावे को पूरी तरह से 'भ्रामक और मानसिक दबाव बनाने की राजनीति' करार दिया है। भाजपा के फायरब्रांड नेता केशव प्रसाद मौर्य ने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा पूरी मजबूती और दबदबे के साथ लखनऊ की सत्ता में बनी हुई है और आगे भी रहेगी। उन्होंने सपा पर हमला जारी रखते हुए कहा की 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी का वजूद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। उनका प्रभाव केवल उनके गृह जनपद और सैफई के दायरे तक ही सीमित रह जाएगा।

जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन के साथ है। विपक्ष के पास न तो कोई नीति है और न ही नियत। अगर कानूनी और रणनीतिक चश्मे से देखा जाए, तो समाजवादी पार्टी के पास वर्तमान में 37 लोकसभा सांसद हैं। दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सांसद एक साथ अलग नहीं होते, तो उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है। 37 सांसदों वाली सपा में कानूनन रूप से बड़ी टूट के लिए कम से कम 25 सांसदों का एक साथ आना जरूरी है ताकि उनकी संसद सदस्यता बची रहे। दिलचस्प बात यह है कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में ठीक यही आंकड़ा (25-26 सांसद) लिया है।

इससे यह साफ संकेत मिलता है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ी कानूनी और राजनीतिक गोटियां सेट की जा रही हैं, जो दल-बदल कानून के दायरे से सुरक्षित दूरी पर हों। उत्तर प्रदेश में जल्द ही कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी होने वाले हैं। ऐसे माहौल में इस तरह के बड़े दावों का आना मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित करने का एक बड़ा जरिया माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के दौरान संसद के भीतर का नजारा बेहद दिलचस्प होने वाला है। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के अपने ही कुनबे में मची यह रार उसकी धार को कमजोर कर सकती है। 

फिलहाल, समाजवादी पार्टी के खेमे में इस बयान के बाद आंतरिक समीक्षा और डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हो गई है। अखिलेश यादव अपने सांसदों को एकजुट रखने के लिए लगातार संपर्क में हैं। अब देखना यह होगा कि मानसून सत्र की शुरुआत के साथ क्या वाकई यूपी की सियासत में कोई बड़ा उलटफेर होता है, या फिर यह केवल मानसून से पहले की राजनीतिक बयानबाजी और मनोवैज्ञानिक युद्ध ही साबित होता है।

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