G News 24 : करैरा मंडी फिर से खुली, प्रशासन की पहल से किसानों को मिला बेहतर दाम !

 मंडी खोलने पर प्रशासन का किसानों ने किया सम्मान...

करैरा मंडी फिर से खुली, प्रशासन की पहल से किसानों को मिला बेहतर दाम !

शिवपुरीवर्षों से बंद पड़ी करैरा कृषि उपज मंडी अब फिर से सक्रिय हो गई है। जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देशन में प्रशासन के लगातार प्रयासों से मंडी के पुनः संचालन से क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिली है। मंडी खुलते ही यहां रौनक लौट आई है और किसानों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।

मंडी प्रांगण में विभिन्न गांवों से पहुंचे सैकड़ों किसानों ने एसडीएम अनुराग निगवाल एवं तहसीलदार का सम्मान कर आभार व्यक्त किया। किसानों का कहना है कि मंडी बंद होने के कारण उन्हें खुले बाजार में अनाज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था, जहां न तो उचित मूल्य मिल रहा था और न ही भुगतान में पारदर्शिता थी।

किसानों ने बताया कि बाजार में गेहूं उधारी पर बेचना पड़ता था और पक्का बिल भी नहीं दिया जाता था। व्यापारी कम कीमत पर खरीद कर रहे थे, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।

मंडी शुरू होने के बाद अब हालात में बड़ा बदलाव आया है। प्रतिस्पर्धी बोली के चलते किसानों को गेहूं का बेहतर भाव मिलने लगा है। मंडी में गेहूं 2525 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका, जबकि पहले बाजार में यही अनाज करीब 2200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था।

मंडी प्रांगण में एसडीएम श्री अनुराग निगवाल ने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में प्रशासन लगातार जनहित में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापारी और किसान एक ही व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं।

प्रशासन दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रूप से काम कर रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जो भी नागरिक अपनी जनहित से जुड़ी समस्या लेकर आएगा, उसका समाधान कानून के दायरे में प्राथमिकता से किया जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन हर परिस्थिति में किसानों के साथ मजबूती से खड़ा है।

क्षेत्र में कृषि उपज मंडी के पुनः शुरू होने के बाद किसानों के चेहरों पर राहत साफ दिखाई दे रही है। वर्षों से बाजार में मजबूरी में फसल बेच रहे किसानों ने अब खुलकर अपनी समस्याएं सामने रखी हैं।

• किसान बादाम वंशकार ने बताया कि उन्होंने अपना गेहूं बाजार में बेचा, लेकिन उन्हें पक्का बिल नहीं दिया गया। व्यापारी ने टालमटोल करते हुए कहा कि “तू बिल का क्या करेगा।” ऐसे में किसानों को अपनी उपज का कोई वैध रिकॉर्ड तक नहीं मिल पा रहा था। मंडी खुलने से अब उन्हें पारदर्शी व्यवस्था की उम्मीद है।

• वहीं महेश प्रजापति ने भी बाजार की स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने गेहूं बेचा तो व्यापारी ने एक महीने बाद भुगतान करने की बात कही और केवल एक कच्ची पर्ची थमा दी। आज तक उन्हें उनकी फसल का पैसा नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।

• किसान चेतराम यादव ने बताया कि खुले बाजार में गेहूं के दाम काफी कम मिलते थे। व्यापारी मनमानी करते थे, जिससे फसल सस्ते में बिकती थी। उन्होंने कहा कि मंडी में कई व्यापारी एक साथ बोली लगाते हैं, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं।

प्रशासन की इस पहल को किसानों ने राहतभरा और सराहनीय कदम बताया है। मंडी के पुनः संचालन से न केवल किसानों को आर्थिक लाभ मिला है, बल्कि मंडी व्यवस्था में उनका भरोसा भी फिर से मजबूत हुआ है।

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