G News24 : माधव विधि महाविद्यालय में ‘क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन’ पर कार्यशाला आयोजित !

 फॉरेंसिक साइंस और तकनीक के समन्वय से अपराधों की जांच को बनाया जा सकता है अधिक प्रभावी...

माधव विधि महाविद्यालय में ‘क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन’ पर कार्यशाला आयोजित !

ग्वालियर। मध्य भारत शिक्षा समिति द्वारा संचालित माधव विधि महाविद्यालय में बी.ए. एलएल.बी., एलएल.बी. एवं एलएल.एम. के विद्यार्थियों के लिए “क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक अपराध जांच में फॉरेंसिक साइंस और तकनीक की भूमिका से अवगत कराना था।

कार्यशाला के संचालक डॉ. नीते पाण्डेय ने बताया कि वर्तमान समय विज्ञान और तकनीक का युग है, जहां अपराधियों द्वारा भी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में अपराधों की जांच को समयबद्ध और प्रभावी बनाने के लिए फॉरेंसिक साइंस का समुचित उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से अपराधियों की पहचान कर उन्हें सजा दिलाना संभव है।

इस अवसर पर सीनियर साइंटिस्ट डॉ. प्रवीण चौबे ने कहा कि सच्चा वैज्ञानिक अन्वेषण सदैव निष्पक्ष होता है। उन्होंने फॉरेंसिक साइंस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आधुनिक अपराधों के विरुद्ध लड़ाई में साइंटिफिक एविडेंस की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि पहले केवल गवाही और रिपोर्ट पर निर्भरता रहती थी, लेकिन अब वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से घटना-स्थल की वास्तविकता को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।

डॉ. चौबे ने बताया कि फॉरेंसिक साइंस घटना-स्थल को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ते हुए यह स्पष्ट करता है कि वहां क्या हुआ था। उन्होंने विद्यार्थियों को घटना-स्थल के निरीक्षण, साक्ष्य संग्रह, पैकेजिंग और संरक्षण की प्रक्रिया की जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया कि “चेन ऑफ कस्टडी” को बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि साक्ष्य की विश्वसनीयता बनी रहे और सही समय पर प्रयोगशाला में परीक्षण किया जा सके।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न रियल और काल्पनिक घटना-स्थलों के माध्यम से केस स्टडीज भी समझाई गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि घटना-स्थल पर ही जांच की दिशा तय हो जाती है और साक्ष्यों के आधार पर ही अपराधी तक पहुंचा जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. पाण्डेय ने कहा कि जांच की प्रत्येक कड़ी में साक्ष्यों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, ताकि न्यायालय में मजबूत और वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत किए जा सकें।


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