जल-गंगा संवर्धन अभियान के तहत भितरवार के गांवों में चलाया जन-जागरण अभियान...
किसानों को नरवाई न जलाने और धान की जगह मूंग बोने की दी गई सलाह !
ग्वालियर। ग्वालियर जिले में पर्यावरण संरक्षण और कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के उद्देश्य से खेतों में नरवाई (पराली) न जलाने के लिए विशेष जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की नवांकुर संस्थाओं और ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारियों ने जल-गंगा संवर्धन अभियान के द्वितीय चरण के अंतर्गत भितरवार विकास खंड के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण किया। इस दौरान 'भूमि सुपोषण' विषय पर किसानों के साथ सीधा संवाद कर उन्हें जागरूक किया गया।
संवाद के दौरान किसानों को बताया गया कि रबी फसल में गेहूं की कटाई के बाद खेतों में शेष बची नरवाई को जलाना अत्यंत नुकसानदायक है। नरवाई जलाने से खेतों की ऊपरी परत की उपजाऊ मिट्टी नष्ट हो जाती है। मिट्टी में मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्म जीव-जंतुओं का विनाश होता है। लगातार आग लगाने से भूमि धीरे-धीरे अनुपजाऊ होने लगती है।
नरवाई प्रबंधन और फसल चक्र अपनाने की सलाह
जन अभियान परिषद के विकास खंड समन्वयक मनोज दुबे ने बताया कि नवांकुर और प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारियों द्वारा किसानों को नरवाई जलाने के बजाय उसे जुताई के साथ मिट्टी में ही मिलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है । इससे प्राकृतिक रूप से खाद तैयार होगी और मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी, जिसका सीधा लाभ आगामी फसलों को मिलेगा।
धान के स्थान पर मूंग की खेती पर जोर
अभियान के तहत किसानों को सलाह दी गई है कि गर्मी के मौसम में अधिक पानी की खपत वाली धान की फसल के स्थान पर मूंग की बुवाई करें। इससे फसल चक्र का पालन होगा। दलहनी फसल होने के कारण मूंग की जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती हैं, जिससे भूमि सुपोषण होता है। साथ ही जल संरक्षण भी होगा। धान की तुलना में मूंग को बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है, जो जल-गंगा संवर्धन अभियान के मूल उद्देश्यों की पूर्ति करता है।
भितरवार विकासखंड में संचालित इस अभियान के माध्यम से परिषद के कार्यकर्ता घर-घर और खेत-खेत पहुंचकर किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ रहे हैं।

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