G News 24 : PM मोदी को आतंकवादी कह बुरे फंसे खरगे,चुनाव आयोग ने भेजा कारण बताओ नोटिस !

 कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मुश्किलें बढ़ी ...

PM मोदी को आतंकवादी कह बुरे फंसे खरगे,चुनाव आयोग ने भेजा कारण बताओ नोटिस !

पीएम मोदी को लेकर विविवाद बयान देकर बुरे फंसे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मुश्किलें बढ़ गई है। दरअसल, भारत के चुनाव आयोग ने बुधवार को कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उनके "आतंकवादी" कमेंट पर नोटिस जारी किया। भारतीय चुनाव आयोग ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।

तमिलनाडु की सियासत में दिया गया एक बयान अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘आतंकवादी’ कहे जाने के आरोप के बाद चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए खरगे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

बयान से बढ़ा विवाद, आयोग हुआ सक्रिय

मामले की शुरुआत मंगलवार को हुई, जब खरगे ने तमिलनाडु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “वह एक आतंकवादी हैं,” और साथ ही भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए। यह बयान सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री का अपमान बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी और तत्काल चुनाव आयोग से शिकायत की।

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा कि आयोग ने इस बयान को गंभीरता से लिया है। अधिकारी के अनुसार, “कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा आचार संहिता के दायरे में आती है, इसलिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।” अब खरगे को तय समयसीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण देना होगा।

सफाई में बदले सुर

विवाद बढ़ने के बाद खरगे ने अपने बयान पर सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि उनका आशय प्रधानमंत्री को ‘आतंकवादी’ कहना नहीं था, बल्कि यह दर्शाना था कि सरकार विरोधियों को डराने और दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया है। हालांकि, उनकी इस सफाई से विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। भाजपा ने इसे “बचाव का प्रयास” करार दिया है और कहा है कि सार्वजनिक मंच से दिए गए बयान की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।

भाजपा का पलटवार और शिकायत

भाजपा ने इस मुद्दे को गंभीर राजनीतिक हमला बताते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू के नेतृत्व में पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से मुलाकात की और खरगे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

इस प्रतिनिधिमंडल में निर्मला सीतारमण, अर्जुन राम मेघवाल समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। रिजिजू ने आयोग से मुलाकात के बाद कहा, “हम भारी मन और गहरी नाराजगी के साथ यहां आए हैं। आमतौर पर हम चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में आयोग से संपर्क करते हैं, लेकिन आज हमें कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की गई अपमानजनक भाषा के कारण आना पड़ा।”भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए उसे “शहरी नक्सल विचारधारा से प्रभावित पार्टी” तक करार दे दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

तमिलनाडु राजनीति का संदर्भ

खरगे का यह बयान तमिलनाडु में राजनीतिक गठबंधनों को लेकर दिए गए बयान के दौरान आया था। वे AIADMK द्वारा भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने सामाजिक न्याय और समानता की विचारधारा को आगे बढ़ाया, उनके नाम पर राजनीति करने वाले दल भाजपा के साथ कैसे जा सकते हैं। उन्होंने अपने बयान में सी. एन. अन्नादुरई, के. कामराज, ई. वी. रामासामी पेरियार और भीमराव अंबेडकर जैसे नेताओं के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन इन विचारों के विपरीत है।

बढ़ सकती हैं कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें

चुनाव आयोग का नोटिस इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है। यदि खरगे का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो आयोग आगे की कार्रवाई कर सकता है, जिसमें चेतावनी, फटकार या अन्य चुनावी प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। भाजपा इसे कांग्रेस के खिलाफ प्रचार में इस्तेमाल कर सकती है, वहीं कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक आलोचना के दायरे में रखने की कोशिश करेगी।

सियासी तापमान चरम पर

इस पूरे घटनाक्रम ने देश की राजनीति में शब्दों की मर्यादा और राजनीतिक बयानबाजी की सीमाओं पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक ओर भाजपा इसे प्रधानमंत्री का अपमान बता रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक बयान की गलत व्याख्या बता रही है। अब सबकी नजरें चुनाव आयोग के अगले कदम और खरगे के जवाब पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहेगा या कानूनी और राजनीतिक स्तर पर और गहराएगा।

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