यह मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन जाएगा...
श्योपुर बनेगा जंक्शन,3 रेल रूटों का केंद्र होगा,3 अलग-अलग दिशाओं से जुड़ेंगी रेल लाइनें !
ग्वालियर। श्योपुर कलां अब महज़ एक टर्मिनल स्टेशन (जहाँ रेल लाइन समाप्त होती है) न रहकर एक प्रमुख रेलवे जंक्शन के रूप में विकसित होने जा रहा है। रेलवे की नई योजनाओं के अनुसार, श्योपुर से 3 अलग-अलग दिशाओं में रेल लाइनें जुड़ेंगी, जिससे यह मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन जाएगा।
ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज लाइन
यह वर्तमान में चल रही सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है। इसमें पुरानी नैरोगेज लाइन को बड़ी लाइन (ब्रॉडगेज) में बदला जा रहा है। वीरपुर तक का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है और 2026-27 तक श्योपुर तक ट्रेन पहुँचने का लक्ष्य है।
श्योपुर-कोटा (दीगोद) नई लाइन
लगभग 94 किमी लंबी यह नई लाइन श्योपुर को राजस्थान के कोटा (दीगोद) से जोड़ेगी。 इसके लिए ड्रोन सर्वे और DPR (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) का काम चल रहा है।
झांसी-शिवपुरी-श्योपुर-सवाई माधोपुर लाइन-यह एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका सर्वे पूरा हो चुका है। यह लाइन उत्तर प्रदेश के झांसी को मध्य प्रदेश के शिवपुरी और श्योपुर के रास्ते राजस्थान के सवाई माधोपुर से सीधे जोड़ेगी।
2. अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत नया स्वरूप
भव्य स्टेशन भवन: श्योपुर स्टेशन को आधुनिक बनाने के लिए ₹22 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है।ऐतिहासिक वास्तुकला: नया रेलवे स्टेशन दो मंजिला होगा और इसका डिज़ाइन श्योपुर किले की ऐतिहासिक वास्तुकला से प्रेरित होगा।
सुविधाएं...
यहाँ 3 रेलवे लाइनें, 4 बड़े प्रतीक्षालय और एक फुट ओवरब्रिज (FOB) जैसी आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।
3. पर्यटन और आर्थिक लाभ
वन्यजीव पर्यटन: यह जंक्शन मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (चीता प्रोजेक्ट) और राजस्थान के रणथंभौर नेशनल पार्क के बीच एक सीधा रेल लिंक प्रदान करेगा, जिससे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
औद्योगिक विकास...
तीन राज्यों के बीच सीधी कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार, कृषि उपज के परिवहन और उद्योगों को नई गति मिलेगी।
वर्तमान स्थिति और समय सीमा...
ग्वालियर-जौरा खंड- इस पर मेमो ट्रेन पहले से ही संचालित हो रही है। नैरोगेज की पटरी उखाड़ने और नए ट्रैक बिछाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। अधिकांश पुलों का काम, जिसमें कूनो नदी पर बना सबसे बड़ा पुल भी शामिल है, पूरा हो चुका है। 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक श्योपुर में बड़ी लाइन की पहली ट्रेन पहुँचने की संभावना है।


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