G News 24 : लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान खूब हुआ हंगामा !

 लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव हुआ पेश !

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा  के दौरान खूब हुआ हंगामा !

नई दिल्‍ली। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 96 (2) के अनुसार, यदि लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव सदन में विचाराधीन हो, तो अध्यक्ष को सदन की बैठक में भाग लेने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार को चर्चा शुरू हो गई है. सोमवार को विपक्ष के हंगामे के कारण चर्चा नहीं हो सकी थी. विपक्ष ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की मांग की थी...

लोकसभा में कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए एक प्रस्ताव सदन में पेश किया. डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को देने की परम्परा रही है. कांग्रेस ने स्पीकर की गैर-मौजूदगी में डिप्टी स्पीकर नियुक्त ना करने पर सवाल उठाए. जिसपर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजजू ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से ध्यान भटकाने के आरोप लगाए.गौरव गोगोई ने अविस्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि देश का नेतृत्व कमजोर है. लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सदन में हंगामा किया. जिस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सदन में हंगामा के लिए जनता विपक्ष को माफ नहीं करेगी. विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया है कि लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने सदन की कार्यवाही चलाते समय ‘‘पक्षपातपूर्ण’’ तरीके से काम किया. 

लोकसभा में कांग्रेस ने मंगलवार को स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि हमें यह प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए खुशी नहीं हो रही है क्योंकि ओम बिरलाजी के साथ हमारे व्यक्तिगत स्तर पर अच्छे संबंध हैं. हालांकि लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें ऐसा करना पड़ रहा है. यह ओम बिरला जी पर कोई व्यक्तिगत हमला नहीं है. उन्होंने कहा कि इस सदन के अंदर हर सदस्य का ये कर्तव्य है कि संसद की गरिमा, संसद की मर्यादा और संसद के कानून और नियमों को बचाया जाए. इस कर्तव्य के अनुसार आज हम ये अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं। व्यक्तिगत रूप से ओम बिरलाजी पर हम हमला नहीं बोलता चाहते हैं. ये सदन की गरिमा को बचाने के लिए, संविधान को बचाने के लिए और भारत के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इस वजह से हम ये अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं.

सिर्फ विपक्ष के सांसद ही क्यों निलंबित...

बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर यह कहते हुए निशाना साधा कि कथित तौर पर “सिर्फ विपक्षी सांसदों” को ही निलंबित किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले किसी भी स्पीकर ने इस तरह सिर्फ विपक्षी सदस्यों को निशाना नहीं बनाया. इस पर आज की कार्यवाही में स्पीकर की कुर्सी संभाल रहे कृष्ण प्रसाद तेनट्टी ने जवाब दिया कि सभी निलंबन सदन ने किए हैं, स्पीकर ने नहीं.

ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे होगी चर्चा

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए चेयर को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि स्पीकर ओम बिरला ने खुद इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का फैसला लिया है। जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर ने नोटिस में मौजूद शुरुआती तकनीकी गलतियों को ठीक करने में उदारता दिखाई और आवश्यक सुधारों की सूचना खुद जारी की। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में पेश किया। अंत में यह तय हुआ कि लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे तक चर्चा होगी।

प्रस्ताव के समर्थन में होने चाहिए 50 सांसद

पीठासीन सभापति द्वारा बुलाए जाने पर सदन के 50 सदस्यों को नोटिस के समर्थन में खड़ा होना होगा और फिर प्रस्ताव सदन के विचार के लिए स्वीकृत माना जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होगा। अगर 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता है। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में खींचतान हो चुकी है। संसद के वर्तमान बजट सत्र के दूसरे चरण का आज दूसरा दिन है और इसके पहले दिन की कार्यवाही में ही इस विषय को सूचीबद्ध किया गया था।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को इस मुद्दे पर विचार के समय सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। सदन में संख्या बल सरकार के पक्ष में काफी अधिक है, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रस्ताव गिर जाएगा।

संविधान के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष नोटिस पर विचार किए जाने के दौरान सदन में उपस्थित रह सकते हैं। वह प्रस्ताव पर अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं, लेकिन जब इस विषय पर चर्चा होगी तब वे कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते।

प्रस्ताव को विपक्षी पार्टियों का समर्थन

इस प्रस्ताव को कई विपक्षी पार्टियों का समर्थन मिला है, जिसमें बिरला पर 'पक्षपातपूर्ण' तरीके से काम करने का आरोप है। इस प्रस्ताव से सत्ताधारी BJP के साथ तीखी बहस होने की उम्मीद है, जिसने सदन में सांसदों की मौजूदगी पक्का करने के लिए व्हिप जारी किया है। सोमवार को स्पीकर विवाद के अलावा, पश्चिम एशिया में तनाव का मुद्दा कार्यवाही पर हावी रहा था।

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