जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज की दिव्य प्रेरणा से...
कालजयी रामायण का अब पीतल के पन्नों और पाषाण शिलाओं पर उकेरा गया इतिहास !
हरिद्वार/इंदौर। जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज की दिव्य प्रेरणा से रामायण को एक ऐसा स्वरूप प्रदान किया गया है जो युगों-युगों तक अक्षुण्ण रहेगा। 'समर्पण से संसार' अभियान के तहत आधुनिक लेजर तकनीक और प्राचीन श्रद्धा के संगम से दुनिया की पहली 'अजर-अमर' पीतल और पाषाण रामायण का निर्माण किया गया है।
पीतल के पन्नों पर अंकित सात कांड...
महर्षि वाल्मीकि जयंती पर संकल्पित यह कार्य स्वामी जी के जन्मोत्सव पर पूर्ण हुआ। अत्याधुनिक PLT तकनीक और कुशल हस्तशिल्प के मेल से तैयार इस रामायण में कुल 1,241 पीतल के पृष्ठ हैं।
विशाल संरचना- रामायण के सातों कांडों को दर्शाने के लिए 2,481 डिजिटल डिजाइन तैयार किए गए।
दुर्लभ शिल्प- पीतल की चादरों को हाथों से काटकर उन पर लेजर के जरिए अक्षर उकेरे गए हैं, जो कला और संस्कृति की एक अमिट छाप छोड़ते हैं।
108 पत्थरों पर जीवंत हुई हनुमान जी की स्मृति...
त्रेतायुग में हनुमान जी द्वारा शिलाओं पर रामायण लिखने की परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए, इंदौर में लोकेश मंगल के निर्देशन में 108 पाषाण शिलाओं पर रामायण उकेरी गई है।
प्रक्रिया- नवरात्रि के प्रथम दिन से शुरू होकर विजयादशमी को पूर्ण हुई इस कृति में $4 \times 4$ इंच के पत्थरों का उपयोग हुआ है।
विशेषता- पत्थरों की कटाई, फिनिशिंग और लेजर प्रिंटिंग के जरिए इसे एक चित्रमय और ऐतिहासिक दस्तावेज का रूप दिया गया है।
तकनीक और आस्था का यह मेल न केवल धार्मिक दृष्टि से अद्वितीय है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक धरोहर को 'अमर' करने का एक अभूतपूर्व प्रयास है।


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