नहीं कर पाएंगे दो शादियां, लिव-इन का भी कराना होगा रजिस्ट्रेशन...
गुजरात विधानसभा से भी यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल हुआ पास !
गुजरात विधानसभा में मंगलवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पास हो गया है. यूसीसी बिल पास करने वाला गुजरात देश का दूसरा राज्य है. इससे पहले उत्तराखंड विधानसभा ने फरवरी 2024 में इसे पारित किया था और 27 जनवरी 2025 से यह पूरे राज्य में लागू हो चुका है.
गुजरात विधानसभा से बहुमत के आधार पर UCC बिल विधानसभा सदन में पास हो गया. यूसीसी बिल पास करने वाला गुजरात देश का दूसरा राज्य है. इससे पहले उत्तराखंड विधानसभा ने फरवरी 2024 में इसे पारित किया था और 27 जनवरी 2025 से यह पूरे राज्य में लागू हो चुका है. कुल 7 घंटे 30 मिनट से ज्यादा समय तक UCC बिल पर गुजरात विधानसभा में चर्चा चली. दोपहर 3 बजे विधानसभा सदन में UCC बिल पेश किया गया और रात 10:37 बजे यह विधानसभा सदन में पास हो गया.
कांग्रेस ने कर दिया वॉकआउट
UCC बिल के मतदान के समय कांग्रेस ने सदन से वॉक आउट कर दिया.कांग्रेस ने UCC बिल को प्रवर समिति में अध्ययन के लिए भेजने की मांग रखी है. इस बिल में धर्म की परवाह किए बिना शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों को नियंत्रित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचा बनाने का प्रस्ताव है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने यह बिल तब पेश किया, जब राज्य सरकार की तरफ से नियुक्त एक पैनल ने UCC को लागू करने पर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी थी.
कुछ समुदायों को दी गई छूट
इसका बिल का टाइटल 'गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026' है और यह न सिर्फ पूरे राज्य बल्कि गुजरात के उन निवासियों पर भी लागू होगा जो राज्य की सीमाओं के बाहर रहते हैं. लेकिन यह अनुसूचित जनजातियों और कुछ ऐसे समूहों के सदस्यों पर लागू नहीं होगा, जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित हैं. इस बिल का मकसद एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है. अन्य बातों के अलावा, इसमें लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन और एक औपचारिक घोषणा के जरिए उन्हें खत्म करने का भी प्रावधान है. इस बिल से दो शादियों पर भी रोक लग जाएगी. इसमें कहा गया है कि इस कोड के तहत शादी तभी मान्य मानी जाएगी, जब शादी के समय दोनों में से किसी भी पक्ष का कोई जीवित जीवनसाथी न हो.
लगेगा 10000 का जुर्माना
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर जरूरी रजिस्ट्रेशन पूरे नहीं किए गए तो 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही, कई शादियों से जुड़े प्रावधानों के तहत धोखाधड़ी और दो शादियां करने जैसे अपराधों के लिए सात साल या उससे ज्यादा की जेल हो सकती है. मुख्यमंत्री पटेल ने आगे कहा, 'अदालत की औपचारिक प्रक्रिया के बाहर लिए गए तलाक अमान्य माने जाएंगे, और ऐसा करने पर तीन साल तक की जेल हो सकती है.' इस बिल में यह भी प्रस्ताव है कि सभी लिव-इन रिलेशनशिप को एक महीने के अंदर औपचारिक रूप से रजिस्टर कराया जाए. ऐसा न करने पर जुर्माने सहित कई तरह की सजा हो सकती है. मुख्यमंत्री पटेल ने कहा,'बेटियों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना हमारी ज़िम्मेदारी है. इस बिल में महिलाओं के सम्मान का पूरा ध्यान रखा गया है. यह महिला सशक्तिकरण का ही एक मामला है.'
अब कानूनी दायरे में आएगा लिव-इन
इस कानून में लिव-इन पार्टनरशिप को कंट्रोल करने और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के जरिए उन्हें एक कानूनी दायरे में लाने के उपाय शामिल हैं. यह प्रावधान मौजूदा चलन से एक अलग कदम है, क्योंकि अभी लिव-इन रिलेशनशिप गैर-कानूनी तो नहीं हैं, लेकिन उनके लिए कोई एक जैसा कानून भी नहीं है. UCC बिल, जिसे सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली एक समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है. सरकार की नजर में यह सभी समुदायों के लिए दीवानी कानूनों को एक जैसा बनाने की एक कोशिश है. हालांकि, इसमें उन समूहों को छूट दी गई है जिनके पास संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकार मौजूद हैं.


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