G News24: विपक्ष हर समय सरकार को घेरने की कोशिश करता है,न कि असलियत को जानने की कोशिश:सहगल

 जनरल नरवणे सीडीएस बनने वाले थे लेकिन,किताब से उठे विवाद ने ऐसा होने नहीं दिया...

विपक्ष हर समय सरकार को घेरने की कोशिश करता है,न कि असलियत को जानने की कोशिश:सहगल 

जब से पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब चर्चा में आई है, उनके बारे में नई-नई जानकारी सामने आ रही है. अब एक डिफेंस एक्सपर्ट ने दावा किया है कि जनरल नरवणे सीडीएस बनने वाले थे लेकिन कुछ ऐसा था जिसके कारण वह नहीं बन पाए. 

डिफेंस एक्सपर्ट मेजर जनरल पी. के. सहगल (रिटायर्ड) ने दावा किया है कि ऐसा लग रहा था कि जनरल मनोज मुकुंद नरवणे अगले सीडीएस बनेंगे लेकिन वह अग्निवीर के खिलाफ थे और सरकार इसे लाना चाहती थी शायद इसीलिए उन्हें सीडीएस नहीं बनाया गया. उनकी जगह जनरल रावत को सीडीएस बनाया गया. पब्लिशर के पास रुकी किताब पर मचे विवाद के बीच उन्होंने साफ कहा कि पूर्व सेना प्रमुख की किताब में ऐसा कुछ भी नहीं, जो आज देश की सुरक्षा के खिलाफ हो. 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे की बिना पब्लिश किताब के कुछ अंशों का जिक्र किया. इसका जबरदस्त विरोध हुआ. इस पर रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने अपनी राय दी है. 

सहगल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि जनरल नरवणे 2022 में रिटायर हुए हैं. देश की सुरक्षा से जुड़ी कोई भी जानकारी रिटायरमेंट के बाद 5 साल तक नहीं दी जा सकती और न ही उसका जिक्र किया जा सकता है. अगर उनकी किताब में ऐसे कुछ अंश हैं, जिन्हें सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर रिलीज नहीं करना चाहती, तो यह समझने योग्य है. 

राहुल गांधी को लेकर उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनरल नरवणे की किताब का जिक्र कर रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि डोकलाम में जब संघर्ष हुआ तो चीन के टैंक डोकलाम तक आ गए. गलवान में भी टैंक बेहद करीब आ गए थे, लेकिन डोकलाम 2017 में हुआ था और 73 दिन तक स्टैंडऑफ रहा था. असल में उस वक्त हम चीन के ऊपर हावी थे.

Delhi: Defence expert Major General P.K. Sehgal (Retd.) says, "General Naravane retired in 2022, and it is being said that nothing can be officially mentioned for five years after retirement. Since he retired in 2022, those five years will be completed in 2027. There are some… pic.twitter.com/65qPLMiD6T— IANS (@ians_india) February 2, 2026

पीके सहगल के मुताबिक उस वक्त चीन कह रहा था कि हम आपको 1962 से भी बड़ी हार देंगे. उनकी मीडिया और सरकार की तरफ से रोज धमकी दी जा रही थी, लेकिन तब हमारी सरकार, फौज और मीडिया ने सूझबूझ दिखाई. उनकी धमकियों को दरकिनार किया और साफ किया कि भारत शांति चाहने वाला देश है.

उन्होंने कहा कि तनाव के वक्त भारत ने साफ कर दिया था कि हम लड़ाई नहीं चाहते हैं, लेकिन अगर लड़ाई थोपी गई तो हम हर तरह से तैयार हैं. इसके बाद 73 दिन के तनाव के बाद चीन पीछे हट गया. मुझे नहीं लगता कि चीन के टैंक वहां आए थे, क्योंकि चीन एक सड़क बनाना चाहता था, जिसके जरिए वह सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर हावी हो सकता था. वह हमारी मूवमेंट पर भी हावी हो सकता था, लेकिन हमारी फौज ने उन्हें सड़क नहीं बनाने दिया. उस समय चीन को पीछे हटना पड़ा.

पीके सहगल ने कहा कि जनरल नरवणे ने अपने कई भाषणों में अपनी किताब के कुछ अंशों का जिक्र किया है. इससे लोगों की दिलचस्पी बढ़ चुकी है कि आखिर उनकी किताब में क्या है, लेकिन उसमें ऐसा कुछ भी नहीं है, जो आज वास्तव में देश की सुरक्षा के खिलाफ हो. पारदर्शिता और लोगों की दिलचस्पी को देखते हुए सरकार को उनकी किताब को पब्लिश करने की अनुमति दे देनी चाहिए.

कैलाश रेंज पर चीनी टैंक...

उन्होंने कहा कि कैलाश रेंज पर जहां तक चीन के टैंक पहुंचने की बात कही गई है, हो सकता है कि उनकी बात सही हो, लेकिन हम इतनी मजबूत स्थिति में थे कि वास्तव में अगर हम चाहते तो उन्हें जवाब दे सकते थे. चीन को भी यह पता था. चीन ने सबसे पहले यही कहा था कि भारत की फौज सबसे पहले कैलाश रेंज से पीछे हटे. शायद यही हमारी गलती थी कि इसके बाद चीन को वहां से हटने में चार से पांच साल लगे. अगर हमें ऐसा न करना पड़ा होता, तो चीन भी तुरंत पीछे हट जाता क्योंकि हम वहां मजबूत स्थिति में थे.

उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी द्वारा इसका जिक्र किया जाना ठीक भी है और ठीक नहीं भी है. हमारा विपक्ष भी डिस्ट्रक्टिव विपक्ष है. हर समय सरकार को घेरने की कोशिश करता है, न कि असलियत को जानने की कोशिश. 

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