G News24 : कोरियन गेम में मिला टास्क और 9वीं मंजिल से कूद गईं 3 बहनें !

 अगर आपके बच्चे को भी है गेमिंग की लत, तो हो जाईए सतर्क ...

 कोरियन गेम में मिला टास्क और 9वीं मंजिल से कूद गईं 3 बहनें !

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12, 14 और 16 साल की तीन नाबालिग बहनों ने कथित तौर पर एक बिल्डिंग की नौवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी. बताया जा रहा है कि उनके माता-पिता ने ऑनलाइन गेम खेलने पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद यह दर्दनाक कदम उठाया गया. इस घटना ने पूरे इलाके और सोशल मीडिया पर लोगों को झकझोर कर रख दिया है.

ऑनलाइन गेमिंग की लत बनी वजह...

पुलिस के अनुसार, तीनों लड़कियां– पाखी, प्राची और विशिका ऑनलाइन गेम्स की आदी हो चुकी थीं. परिवार को उनका यह जुनून पसंद नहीं था और वे चाहते थे कि बेटियां गेम कम खेलें. बताया जा रहा है कि कोरोना महामारी के दौरान जब स्कूल बंद थे और बच्चे घरों में ज्यादा समय बिता रहे थे, तभी उन्हें ऑनलाइन गेमिंग की आदत लग गई. वे एक ऑनलाइन गेम खेलती थीं, जिसे ‘कोरियन लवर गेम’ बताया गया है.

पढ़ाई से दूरी और बढ़ती लत...

पुलिस ने यह भी बताया कि लड़कियां नियमित रूप से स्कूल नहीं जा रही थीं. उनका ज्यादा समय मोबाइल और गेम्स में ही गुजरता था. धीरे-धीरे यह शौक लत में बदल गया. परिवार ने जब इसे रोकने की कोशिश की, तो हालात तनावपूर्ण हो गए. हालांकि, इस बेहद कदम के पीछे असली वजह क्या थी, इसकी जांच अभी जारी है.

रात 2 बजे हुआ हादसा...

यह घटना गाजियाबाद के भारत सिटी नामक रिहायशी टाउनशिप में बुधवार, 4 फरवरी की रात करीब 2 बजे हुई. पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है. फिलहाल अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि तीनों बहनों ने एक साथ इतना बड़ा कदम उठा लिया.

बढ़ती डिजिटल लत बना रही है खतरा...

आजकल बच्चों और किशोरों में ऑनलाइन गेमिंग और मोबाइल की लत तेजी से बढ़ रही है. शुरुआत में यह सिर्फ टाइमपास लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह मानसिक और भावनात्मक असर डालने लगता है. नींद कम होना, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई से दूरी और परिवार से अलगाव इसके आम संकेत हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर मानसिक तनाव में बदल सकता है.

माता-पिता कैसे छुड़वाएं गेमिंग की लत...

ऐसे मामलों से बचने के लिए माता-पिता को सख्ती के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए. बच्चों से खुलकर बात करें और उनकी भावनाओं को समझें. अचानक मोबाइल छीन लेना या डांटना कई बार उल्टा असर डाल सकता है. बेहतर है कि रोज का स्क्रीन टाइम तय करें और धीरे-धीरे गेमिंग का समय कम कराएं.

बच्चों को खेलकूद, किताबें, म्यूजिक या आउटडोर एक्टिविटी जैसी दूसरी चीजों में व्यस्त रखें, ताकि उनका ध्यान मोबाइल से हटे. फैमिली टाइम बढ़ाना भी बहुत जरूरी है. अगर लत ज्यादा बढ़ चुकी हो, तो काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट की मदद लेना फायदेमंद हो सकता है.

नजर कैसे रखें और क्या सावधानी बरतें...

माता-पिता को बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखनी चाहिए. फोन में पैरेंटल कंट्रोल ऐप्स का इस्तेमाल करें, जिससे गेम्स और ऐप्स का समय सीमित किया जा सके. यह भी देखें कि बच्चा किस तरह का गेम खेल रहा है और उसमें क्या कंटेंट है. रात में मोबाइल अपने पास रखने की आदत डालें ताकि देर रात तक गेमिंग न हो सके. सबसे जरूरी है भरोसे का रिश्ता बनाना, ताकि बच्चा अपनी परेशानी या तनाव आपसे शेयर कर सके. टेक्नोलॉजी से पूरी तरह दूर करना समाधान नहीं है, बल्कि संतुलन सिखाना ही असली उपाय है. यह घटना एक चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा और मानसिक सेहत पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी है.

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