डिप्टी कलेक्टरों को हटाकर जिला प्रबंधकों को बनाया प्राधिकृत अधिकारी...
मप्र में 55 साल बाद बदली राशन आपूर्ति की निगरानी व्यवस्था !
भोपाल। प्रदेश सरकार ने जिलों में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी, उप जिलाधीशों से नागरिक आपूर्ति के जिला प्राधिकृत अधिकारी का जिम्मा छीन लिया है। मप्र नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा करीब 55 साल पुरानी व्यवस्था में यह बदलाव किया गया है। अब मप्र राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधकों को ही प्राधिकृत अधिकारी बनाया गया है। इस व्यवस्था से जिलों में राशन के भंडारण से लेकर वितरण तक की व्यवस्था में जिला प्रशासन का दखल कम हो जाएगा।
मौजूदा व्यवस्था में जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत नागरिकों को वितरित की जाने वाली राशन सामग्री के भंडारण, परिवहन एवं वितरण की निगरानी के लिए कलेक्टरों द्वारा संबंधित अनुविभागीय अधिकारी, अपर कलेक्टर या उपजिलाधीशों को सौंपी जाती रही है। जबकि खाद विभाग का अमला इनके अधीन रहता था। खाद, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने नई अधिसूचना जारी की है। जिसमें मप्र स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के जिला प्रबंधकों को अनुविभागीय अधिकारी या डिप्टी कलेक्टरों की जगह प्राधिकृत अधिकारी बनाया गया है। जिससे राशन वितरण की व्यवस्था पूरी तरह से खाद विभाग के नियंत्रण में आ गई है।
गड़बड़ी के लिए विभाग ही करेगा जांच
राशन व्यवस्था में किसी भी गड़बड़ी या भ्रष्टाचार के लिए अभी तक जिला प्रशासन जांच कराता था, अब खाद विभाग के अधीन जिला प्रबंधक ही जांच कराएंगे। यानी नई अधिसूचना जारी होने से राशन व्यवस्था में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की जांच भी विभागीय अधिकारी करेंगे। अब सार्वजनिक वितरण एवं निगरानी की पूरी व्यवस्था खाद विभाग के पास आ गई है।
6 महीने से चल रही थी प्रक्रिया
नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधकों को प्राधिकृत अधिकारी घोषित करने के लिए पिछले छह महीने से प्रक्रिया चल रही है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने पिछले साल इसके निर्देश दिए थे कि जिलों में प्राधिकृत अधिकारी विभाग के ही रखे जाएं।










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