G News24: भारतीय रेलवे की Rail Madad सेवा ने यात्री छूटा सामान उस तक पहुंचकर इसे मुमकिन कर दिखाया !

 आप भी वापस पा सकते हैं अपना ट्रेन में छूटा सामान,जान इसका लीजिए तरीका !

भारतीय रेलवे की Rail Madad सेवा ने यात्री छूटा सामान उस तक पहुंचकर इसे मुमकिन कर दिखाया !

यात्रा के दौरान अगर लोगों का सामान ट्रेन में छूट जाता है तो अक्सर लोगों का मानना होता है कि उसे दोबारा पाना लगभग नामुमकिन है. लेकिन हाल ही में सामने आई एक सच्ची घटना ने इस सोच को बदल दिया है.लेकिन अब भारतीय रेलवे की Rail Madad सेवा ने यात्री छूटा सामान उस तक पहुंचकर इसे मुमकिन कर दिखाया ! एक व्यक्ति ने रेडिट पर बताया कि कैसे उसकी पत्नी का शॉल, जो ट्रेन में छूट गया था, भारतीय रेलवे की मदद से सुरक्षित वापस मिल गया.

कब और कैसे ट्रेन में छूट गया शॉल?

रेडिट पोस्ट के मुताबिक, यह कपल पत्नी के होमटाउन की यात्रा कर रहा था. सुबह करीब 9 बजे वे ट्रेन से उतरे, लेकिन जल्दबाजी में सीट पर रखा शॉल वहीं रह गया. दिलचस्प बात यह रही कि उन्हें इसका अहसास करीब 1 बजे हुआ, यानी चार घंटे बाद. तब तक दोनों को लगा कि अब शॉल मिलना मुश्किल है. पोस्ट में व्यक्ति ने लिखा कि शुरुआत में उन्होंने शॉल को पूरी तरह खोया हुआ मान लिया था. लेकिन रेडिट पर रेल मदद से जुड़े कुछ सकारात्मक अनुभव पढ़ने के बाद उन्होंने इसे आजमाने का फैसला किया. उन्होंने रेल मदद प्लेटफॉर्म पर ट्रेन नंबर और सीट की पूरी जानकारी के साथ शिकायत दर्ज की.

रेलवे ने इतनी जल्दी कैसे की कार्रवाई?

शिकायत दर्ज होते ही रेलवे के अलग-अलग विभाग सक्रिय हो गए. अगले दो घंटों में अलग-अलग रेलवे स्टेशनों और अधिकारियों से कुल छह कॉल आए. आखिरकार शॉल को उस स्टेशन पर खोज लिया गया, जो उनके गंतव्य से काफी दूर था. यह तेजी देखकर यात्री खुद हैरान रह गया. कहानी में आगे बताया गया कि एक रेलवे अधिकारी ने शॉल की तस्वीर भेजी और पुष्टि करने को कहा कि यही वही शॉल है या नहीं. इसके साथ ही स्टेशन का पता कन्फर्म किया गया ताकि पिकअप की व्यवस्था की जा सके. यह प्रोफेशनल और भरोसेमंद रवैया लोगों को काफी पसंद आया.

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

यह पोस्ट r/indianrailways सबरेडिट पर तेजी से वायरल हो गई. कई यूजर्स ने रेल मदद सेवा की तारीफ की. एक यूजर ने लिखा कि इतनी नकारात्मक खबरों के बीच ऐसी सकारात्मक यात्रा कहानियां सुकून देती हैं. एक अन्य यूजर ने कमेंट में बताया कि उसकी दोस्त का फोन ट्रेन में छूट गया था, जिसे एक सहयात्री प्लेटफॉर्म पर दौड़कर वापस देने आया. ऐसे अनुभव दिखाते हैं कि सिस्टम के साथ-साथ लोग भी ईमानदारी निभा रहे हैं. रेल मदद सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए भरोसे की एक मजबूत कड़ी बनता जा रहा है. सही जानकारी और थोड़ी कोशिश से खोया हुआ सामान भी वापस मिल सकता है.

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