प्रभारी और जलसंसाधन मंत्री ने की पत्रकारों से चर्चा...
हर गरीब को रोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो : सिलावट
ग्वालियर। मध्यप्रदेश के जलसंसाधन एवं ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि हर गरीब को रोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो इसके लिये विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप वी.बी. जी राम जी योजना को लाया गया है। इसके तहत अब ग्रामीण रोजगार की गारंटी के तहत 125 दिन रोजगार मिलेगा। मंत्री सिलावट ने कहा कि यह विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन योजना महात्मा गांधी जी की भावना के अनुरूप है और इसे राम राज्य की स्थापना के लिये लाया गया हैं। इसके अलावा इस नई योजना में हर सप्ताह भुगतान की भी व्यवस्था की गई है।
सोमवार को ग्वालियर में पत्रकारों से चर्चा में प्रभारी और जलसंसाधन मंत्री ने कहा कि इस नई योजना में काम के दिन ज्यादा होंगे और 125 दिनों की रोजगार गारंटी होगी, जबकि यह पहले मात्र 100 दिन की थी। इसके साथ ही वन क्षेत्र में काम करने वाले एसटी कामगारों को हर साल 15 दिन का रोजगार और अधिक मिलेगा। प्रभारी मंत्री सिलावट ने इस बात को इंकार किया कि यह योजना बंद की गई है। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना वी.बी. जी.राम.जी. के नाम से बेहतर तरीके शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दुष्प्रचार कर रही हैं। मनरेगा पर सबके अधिक खर्च मोदी सरकार ने ही किया है।
जबकि मनरेगा पर अब तक 11.74 लाख करोड़ रूपये खर्च किये गये है, जिसमे मोदी सरकार ने 8.53 लाख रूप्ये इस योजना पर खर्च किये हैं। मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि मनरेगा योजना 2005 से शुरू हुई थी, लेकिन अब ग्रामीण भारत का स्वरूप विकास आधारित है। 2011-12 में ग्रामीण करीबी 25.7 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 4.86 प्रतिशत रह गई है और कनेक्टिविटी सुधार के साथ आजीविका में भी विविधता आई है। अब पुराना ओपन एंडेड माडल अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मेल नहीं खाता, 2005 में हमारी जरूरतें अलग थी और अब अलग है। इसीलिये इस ग्रामीण योजना को 2025 की आवश्यकताओं के अनुरूप पुनः व्यवस्थित करना आवश्यक हैं।
सिलावट ने कहा कि रोजगार योजना का नाम पहले से महात्मा गांधी जी के नाम पर नहीं था। 1980 में इंदिरा गांधी ने सभी पुरानी रोजगार योजनाओं को मिलाकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम योजना का नाम दिया जिसे राजीव गांधी ने जवाहर रोजगार योजना का नाम दे दिया था, सोनिया मनमोहन की सरकार ने 2004 में इसे नरेगा कर दिया गया जिसे फिर 2005 में मनरेगा किया गया। कांग्रेस की सरकार ने जब जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान नहीं था। इसी प्रकार आवास योजना का नाम पहले ग्रामीण आवास योजना था, राजीव गांधी ने 1985 में इसका नाम बदल कर इंदिरा आवास योजना कर दिया था।
अप्रैल 2005 में कांग्रेस सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना कर दिया। हर योजना में इन्होंने गांधी - नेहरू के नाम जबरन डाले। मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है। सिलावट ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में मनरेगा में कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं थी, अब इसमे रियल टाइमउ डेटा अपलोड होगा। जीपीएस और मोबाइल मानीटरिंग होगी और एआई के द्वारा फ्राड डिटेक्शन होगा। इससे सही लाभार्थियों को काम मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आयेगा। इसी प्रकार नये कानून का फोकस 4 प्राथमिकताओं पर है।
जल सुरक्षा से खेती को बढ़ावा मिलेगा, सडकें और कनेक्टिविटी से बाजार में सुधार होगा, भंडारण और आजीविका संपत्तियां ग्रामीण आय में वृद्धि लायेगी और जलवायु अनुकूल कार्य गांवों को सशक्त बनायेंगे। सिलावट ने बताया कि व्ही.बी. जी.राम.जी. बिल में प्रावधान किया गया है कि बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिन काम बंद कर दिया जायेगा। इसका उददेश्य बुआई और कटाई के समय मजदूरों की कमी नहीं होने देना है। मनरेगा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया, ग्रामीण जिलाध्यक्ष प्रेमसिंह राजपूत, जिला कलेक्टर रूचिका चैहान, जिला महामंत्री विनोद शर्मा भी उपस्थित थे।









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