G News 24 : UGC के 2009-12 में बने नियमों में बदलाव, रैगिंग तो सिर्फ शुरुआत थी,अब 'भेदभाव' पर गिरेगी गाज !

  UGC के2026 के नए नियमों के बाद,वो बड़े अंतर जो हर छात्र को जानने चाहिए...

UGC के 2009-12 में बने नियमों में बदलाव, रैगिंग तो सिर्फ शुरुआत थी,अब 'भेदभाव' पर गिरेगी गाज ! 

देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र सुरक्षा की परिभाषा अब बदल गई है. अब तक रैगिंग को ही कैंपस की सबसे बड़ी समस्या माना जाता था लेकिन UGC के नए Promotion of Equity Regulations 2026 ने बहस को एक नए मोड़ दे दिया है. यह नियम सिर्फ शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न तक सीमित नहीं है बल्कि भेदभाव, बहिष्कार और असमान व्यवहार जैसे मामलों को सीधे चुनौती देता है. जहां एक ओर UGC इसे समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर इसका विरोध भी तेज हो गया है. 

देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक बार फिर बड़ा बदलाव हुआ है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC ने इक्विटी विनियम 2026 को लागू किया है. इस नियम का उद्देश्य कैंपस को सुरक्षित बनाना है और साथ ही समानता और सम्मान पर आधारित बनाना है. लेकिन यूजीसी के इन नियमों को लेकर देशभर में विरोध शुरू हो गया है.

जनरल कैटेगरी के छात्रों के बीच इसे लेकर गहरी नाराजगी उभरकर सामने आ रही है. अब तक जहां छात्र सुरक्षा एंटी-रैगिंग नियमों से होती रही है वहीं यूजीसी का दावा है कि नया इक्विटी विनियम भेदभाव, बहिष्कार और असमान व्यवहार जैसे गहरे सामाजिक मुद्दों को खत्म करने का काम करेगा. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इक्विटी विनियम 2026 क्या है और यह UGC के एंटी-रैगिंग नियमों से किस तरह अलग है? आइए आज के इस आर्टिकल में विस्तार से समझते हैं...

पहले जानिए क्या है UGC का नया कानून ...

UGC ने 15 जनवरी 2026 से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026 लागू कर दिए हैं. इस नए नियम का लक्ष्य उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव खत्म करना और सभी छात्रों को बराबरी का मौका देना है. खास बात यह है कि अब एससी, एसटी के साथ-साथ ओबीसी भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किए गए हैं. इन नियमों के तहत SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा पर खास जोर दिया गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि संस्थानों में ऐसा माहौल बने, जहां सभी छात्र खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें.

पुराने नियमों की जगह नया कानून...

UGC Equity Regulations 2026 ने साल 2012 में बने पुराने नियमों की जगह पर लाया गया है. UGC के मुताबिक पुराने नियम समय के साथ कमजोर होते गए और उनमें कई जरूरी बदलावों की आवश्यकता थी. नए नियमों को ज्यादा सख्त बनाया गया है जिससे उन्हें सही तरीके से लागू किया जा सके.

इन नए नियमों के अनुसार...

इन नियमों के अनुसार, किसी भी संस्थान के प्रमुख यानी कुलपति के खिलाफ सीधे जवाबदेह बनाया गया है. हर संस्थान को एक Equity Cell बनानी होगी जो छात्रों की शिकायतें सुनेगी और भेदभाव से जुड़े मामलों को देखेगी. इस कमेटी में महिला ओबीसी, एससी,एसटी वर्ग के लोगों का होना जरूरी है, साथ ही यह कमेटी साल में दो बार बैठक करेगी. अगर किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ गलत हुआ है, तो वह इस सेल में शिकायत कर सकता है. इस नियम के तहत सभी कॉलेज को एक Equity हेल्पलाइन भी बनानी होगी जो 24 घंटें काम करे.

अगर कोई छात्र इस कमेटी से शिकायत करता है और मामला SC-ST Act का बनाता है तो कमेटी तुरंत पुलिस को सूचित करेगा. अगर ऐसा नहीं है तो 24 घंटे के अंदर मीटिंग करना होगा. इस पर 15 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी. संस्थान के हेड उस रिपोर्ट के आधार पर एक्शन लेंगे. इस नए नियम में क्या दंड मिलेगा ये अभी स्पष्ट नहीं है.

क्यों हो रहा है विवाद...

UGC ने 13 जनवरी 2026 को नई नियमावली लागू की है. 15 जनवरी से प्रभावी हुए इन नियमों के मुताबिक जाति-आधारित भेदभाव इससे समाप्त होगा. हालांकि यूजीसी के इस नए नियम ने देशभर में आरक्षण जैसे एक नए विवाद को जन्म दे दिया है. जनरल वर्ग के विभिन्न संगठनों ने इसे सामान्य वर्ग विरोधी बताते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया है. इस नियम को लेकर जनरल वर्ग के लोगों का आरोप है कि झूठी शिकायतों के खिलाफ दंड का प्रावधान न होना और सवर्णों को इस सुरक्षा चक्र से बाहर रखना है.

अब समझिए एंटी-रैगिंग नियमों से कैसे है,अलग...

 एंटी-रैगिंग रेजुलेशन (2009)

इन नियमों का मुख्य फोकस कैंपस से रैगिंग को खत्म करना था. इसका उद्देश्य नए छात्रों को सीनियर छात्रों द्वारा किए जाने वाले दुर्व्यवहार, मेंटल स्ट्रेस और अश्लील व्यवहार से बचाना था. यह मुख्य रूप से प्रवेश के समय होने वाली हिंसा पर केंद्रित है.

भेदभाव के नए आयाम...

इक्विटी रेजुलेशन (2026)

यह नियम हिंसा तक सीमित नहीं है बल्कि यह नियम समानता की बात करता है. इसका दायरा जाति, धर्म, जेंडर और शारीरिक अक्षमता के आधार पर होने वाले छोटे से छोटे भेदभाव तक फैला हुआ है. यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी छात्र को उसकी पृष्ठभूमि के कारण संस्थान में अलग-थलग महसूस न कराया जाए. 2009 के नियमों में मुख्य रूप से उत्पीड़न की बात थी लेकिन नए नियम 2026 में इन पहलुओं पर कड़ा रुख अपनाते हैं-

  1. जातिगत और क्षेत्रीय भेदभाव SC/ST और पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों के साथ गलत व्यवहार.
  2. पहली बार OBC को भी जातिगत भेदभाव के दायरे में शामिल किया गया है.
  3. LGBTQ+ समुदाय के छात्रों के प्रति संवेदनशीलता.

रैगिंग 2009 के लिए सजा क्या है...

दोषी पाए जाने पर क्लास से निलंबित किया जा सकता है. परीक्षा का रिजल्ट रोका जा सकता है. स्कालरशिप समेत दूसरी सरकारी सुविधाएं रोकी जा सकती हैं. हॉस्टल से निलंबित या निष्काषित किया जा सकता है. किसी भी अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होने से रोका जा सकता है. एडमिशन कैंसिल किया जा सकता है. किसी एक संस्थान से निकाले जाने के बाद कहीं और एडमिशन पर भी रोक लगाई जा सकती है. 25 हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. 

जहां 2009 के नियम संस्थानों को केवल निगरानी के लिए प्रोत्साहित करते थे वहीं 2026 के नियम संस्थानों को सांस्कृतिक बदलाव के लिए बाध्य करते हैं. सरल शब्दों में कहें तो एंटी-रैगिंग नियम 2009 एक ढाल के जैसे है जो छात्रों को चोट लगने से बचाती है. वहीं इक्विटी रेजुलेशन 2026 वह पुल के जैसे है जो छात्र को बिना किसी भेदभाव के मुख्यधारा से जोड़ता है.  

विशेष - शिक्षा संस्थानों में सामान्य वर्ग के जो विद्यार्थी  शिक्षा ग्रहण करने और अपनी मेहनत से अपना कॅरिअर बनाने के मकसद से एडमिशन लेते हैं उन्हें नए या पुराने नियमों में होने वाले बदलावों से कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन जो अपनी पैतृक संपत्ति और प्रभाव के आधार पर यहां आते हैं, जिनका मकसद पढ़ाई से कहीं ज्यादा विद्यार्थियों के बीच अपना रुतबा और वर्चस्व दिखाना होता है,उन्हें आगे चलकर राजनीति करना है ऐसे लोगों को जरूर भविष्य में इन नए नियमों से परेशानी होने वाली है, इसलिए ये अभी से चीखने और चिल्लाने लगे हैं। 

जो सोसाइटी में अपने आपको सबसे श्रेष्ट समझते हैं बाकी सभी को दोयम दर्जे का मानते हैं, समाज में दूसरे की समानता पर,उन्ही को दिक्क्त होती है। वे कभी नहीं चाहते कि समानता आए,इसलिए हमेशा विरोध ही करते हैं। लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि ये विरोध ही सामाजिक एकता दुश्मन है,और जब समाज टूटता है तो उसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ता है उन्हें ये भी याद रखना  चाहिए।  

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