देशभर में टू फिंगर टेस्ट रोक के बाद भी राजस्थान में हो रही ... 

वो घिनौनी प्रक्रिया जिसके बाद फिर रेप जैसा महसूस करती हैं महिला

टू फिंगर टेस्ट अब नहीं होगा. रेप के बाद रेप पीड़िता के लिए टू फिंगर टेस्ट फिर से रेप जैसा ही होता है. देश की सर्वोच्च अदालत ने इस अनुचित प्रक्रिया को महिलाओं की गरिमा के खिलाफ करार दिया है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्यों को निर्देश दिया कि ऐसा आगे से न हो. वर्जिनिटी को जांचने वाला यह घिनौना टेस्ट दरिंदगी की शिकार हुई महिला को झकझोर देता है.

टू फिंगर टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

दरअसल एक मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और हिमा कोहली की पीठ ने टू फिंगर टेस्ट को बैन कर दिया. कोर्ट ने कहा कि बलात्कार पीड़िता की जांच के लिए अपनाया जाने वाला यह तरीका अवैज्ञानिक है जो पीड़िता को फिर से प्रताड़ित करता है. कोर्ट ने आदेश देते हुए इस टेस्ट को मेडिकल कॉलेज की अध्ययन सामग्री से हटाने को भी कहा है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि यह प्रणाली अब भी व्याप्त है. महिलाओं का गुप्तांग संबंधी परीक्षण उनकी गरिमा पर कुठाराघात है. यह नहीं कहा जा सकता कि यौन संबंधों के लिहाज से सक्रिय महिला के साथ दुष्कर्म नहीं किया जा सकता.

आखिर क्या है टू फिंगर टेस्ट

इस टेस्ट में डॉक्टर रेप पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में उंगली डालकर यह बताने का दावा करता है कि वह महिला सेक्सुअली एक्टिव है या नहीं. इसका मतलब यह है कि वह महिला नियमित तौर पर यौन संबंध बनाती है या नहीं? जिससे यह पता लग सके कि महिला के साथ शारीरिक संबंध बने थे या नहीं? अगर प्राइवेट पार्ट में आसानी से दोनों उंगलियां चली जाती हैं तो महिला को सेक्चुीली एक्टिव माना जाता है और इसे ही महिला के वर्जिन या वर्जिन न होने का भी सबूत मान लिया जाता है. ये हाथों से जांच की एक पुरानी प्रक्रिया है.

एक्सपर्ट्स भी मानते हैं गलत

हाइमन को किसी भी लड़की के कैरेक्टर का सर्टिफिकेट मान लिया जाता है. जबकि वास्तविकता इससे बहुत अलग है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बरसों से यह मिथ है कि लड़की जब पहली बार सेक्स करती है, तो उसका हाइमन टूट जाता है. इसकी वजह से उसकी योनि से खून बहने लगता है. इसका मतलब यह लगाया जाता है कि लड़की अपनी वर्जिनिटी खो चुकी है. जबकि सच्चाई यह है कि ऐसा हर लड़की के साथ नहीं होता. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बाइक चलाने या फिर साइकिलिंग करने से भी हाइमन खुल जाता है। यह एक नाजुक झिल्ली है, जो एक बार टूटने के बाद दोबारा नहीं जुड़ती. लिहाजा ऐसे में रेप केस में टू-फिंगर टेस्ट करना उचित नहीं है. 

2014 में ही लग चुकी रोक

2014 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने टू-फिंगर टेस्ट पर रोक लगाते हुए नई दिशा-निर्देश जारी किए थे. जिसके तहत अस्पतालों में बलात्कार पीड़िताओं के लिए एक अलग कमरा बनवाने की बात भी कही गई थी. निर्देश के मुताबिक, अस्पताल में उनके लिए बने कमरे में ही फॉरेंसिक और मेडिकल टेस्ट किया जाना था. सरकार ने दिशा निर्देश तो जारी किए लेकिन इनका सख्ती से पालन नहीं हुआ.

रोक के बाद भी राजस्थान में होता है टेस्ट

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान के अस्पतालों में यह टेस्ट अभी भी किया जाता है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रचलन अधिक है. देश में रेप के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. NCRB के मुताबिक देश में 2021 में बलात्कार के कुल 31,677 मामले दर्ज किए गए, यानी हर रोज औसतन 86 ममले दर्ज किए गए. इनमें से राजस्थान में सर्वाधिक 6337 रेप केस दर्ज किए गए, यानी हर रोज औसतन 17 रेप केस दर्ज किए जाते हैं.