जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में संस्कृत दिवस आयोजित…

देवभाषा से मानवभाषा बनी संस्कृत : प्रो.पाठक

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में आज जीवाजी विश्वविद्यालय व महाकवि भवभूति शोध एवं शिक्षा समिति द्वारा संस्कृत दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप-प्रज्ज्वलन व श्री पीताम्बरा संस्कृत महाविद्यालय दतिया के मनोज, पुनीत आदि विद्वानों के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। शासकीय संस्कृत महाविद्यालय,ग्वालियर की छात्रा कु.शर्मिष्ठा द्वारा सरस्वती वन्दना  एवं कु.सरस्वती व कु. पार्वती द्वारा डॉ.बालकृष्ण शर्मा विरचित देववाणीसंस्कृतगीत व स्वागतगीत का सुन्दर गायन  किया गया। 

अतिथियों का वाचिकस्वागत छात्रकल्याण अधिष्ठाता, जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रो.एस.के.द्विवेदी ने किया। अतिथि परिचय डॉ.मनीष खैमरिया,अध्यक्ष संस्कृत अध्ययन मण्डल,जीवाजी विश्वविद्यालय के करवाया। कार्यक्रम की रूपरेखा व प्रास्ताविक डॉ.बालकृष्ण शर्मा ,अध्यक्ष महाकवि भवभूति शोध व शिक्षा समिति ने प्रस्तुत किया। इस उपलक्ष्य पर संस्कृत कार्य व सर्वदा संस्कृत चिन्तन में निरत रहने वाले दो विद्वानों को शॉल श्रीफल व अभिनन्दन पत्र से सम्मानित किया गया।

 प्रथम अभिनन्दन पत्र से प्रो.मुरली मनोहर पाठक,कुलपति लालबहादुरशास्त्री संस्कृत विद्यापीठ को सम्मानित किया गया व उनके अभिनन्दन पत्र का सस्वर पाठ केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल से समागता डॉ.मोहिनी अरोरा ने किया। द्वितीय अभिनन्दनपत्र से जीवाजी विश्वविद्यालय के छात्रकल्याण अधिष्ठाता प्रो.एसके द्विवेदी को सम्मानित किया गया। जिसका सस्वर वाचन केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के अनौपचारिक संस्कृत शिक्षक कृष्णकान्त पंचारिया ने किया। 

मुख्यातिथि श्री श्री 1008 सन्त शिरोमणि दंदरौआ पीठाधीश्वर स्वामी रामदास जी महाराज ने  संस्कृत सबको पढने की प्रेरणा देते हुए उसके धार्मिक व आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डाला और सबको आशीर्वचन से कृतार्थ किया । 

विशिष्ट अतिथि स्वामी रामभूषणदास जी महाराज, खनैता आश्रम ने संस्कृत ,संस्कृति व संस्कार पर प्रकाश डालते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। सारस्वतातिथि प्रो.मुरलीमनोहर पाठक,कुलपति लालबहादुरशास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली ने संस्कृतभाषा के देवभाषा से मानवों की भाषा बनने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। परा ,पश्यन्ती,मध्यमा व वैखरी में "तुरीयं वाचं मनुष्या: वदन्ति" चतुर्थ बैखरी भाषा हम मनुष्यों द्वारा बोली जाती है,इसका सुन्दर विवेचन किया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अविनाश तिवारी जी ने संस्कृत के उत्थान के लिये हो रहे कार्यों की भूरि भूरि प्रशंसा की व आगे भी सदा संस्कृतकार्यों को करते रहने के लिये प्रेरित किया। आगन्तुको का आभार प्रो.एस.के द्विवेदी व मंच का संचालन डॉ.नौनिहाल गौतम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रो.हेमन्त शर्मा,प्रो.हरेन्द्र शर्मा,डॉ.कृष्णा जैन,डा.चन्द्रशेखर शर्मा,प्राचार्य,IITTM, ओमप्रकाश शर्मा (भिण्ड),डॉ.विकास शुक्ल, डॉ.ज्योत्स्ना राजावत,प्रो.सविता रस्तोगी,पं.प्रेमशंकर अवस्थी,पं.बालेन्दु द्विवेदी ,डॉ.ललितकिशोरी शर्मा,डॉ.नरोत्तम निर्मल, अशोक विश्नोई,पं.नीरज शास्त्री,डॉ.राजू राठौर, टोटन माइति,डॉ.उर्मिला शर्मा सहित ग्वालियर के बडी संख्या में संस्कृतानुरागी व  सुरभारतीसमुपासक उपस्थित रहे।