हिन्दू पक्ष के वकील बोले- फैसला पक्ष में नहीं तो करेंगे HC का रुख...

ज्ञानवापी विवाद में फैसले का आज बड़ा दिन

वाराणसी l वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद से जुड़े मामले में आज अहम फैसला आ सकता है. आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस केस को लेकर सुनवाई होनी है. हाईकोर्ट को मुख्य रूप से यह तय करना है कि 31 साल पहले 1991 में वाराणसी की जिला अदालत में दाखिल किए गए मुकदमे की सुनवाई हो सकती है या नहीं. इसके साथ ही एएसआई से सर्वेक्षण कराए जाने समेत कुछ दूसरे बिंदुओं पर भी हाईकोर्ट को आज अपना फैसला सुनाना है. बता दें कि सुनवाई दोपहर 2 बजे से जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच में होगी. इस मामले की सुनवाई अब अंतिम दौर में है.

आज जो फैसला सुनाया जाना है वह ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन पूजन की मांग को लेकर वाराणसी के जिला जज ए के विश्वेश की अदालत में चल रहे मुकदमे की पोषणीयता (सुनवाई योग्य है या नहीं) पर होगा. 24 अगस्त को अदालत ने फैसला आज के लिए सुरक्षित रख लिया था. मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील शमीम अहमद ने अदालत को बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है, इसलिए अदालत को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है.इधर हिंदू पक्ष की मांग है कि पूरा ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपा जाए और भगवान विश्वेश्वर की नियमित पूजा के इंतजाम हों. हिंदू पक्ष ने ये भी मांग की है कि ज्ञानवापी में मुसलमानों की एंट्री बंद होनी चाहिए और मस्जिद के गुंबद को ध्वस्त करने का आदेश दिया जाना चाहिए.

हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने बताया कि उन्होंने अपनी दलील में कहा है कि ज्ञानवापी कहीं से मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर का ही हिस्सा है इसलिए इस मामले में 1991 का उपासना स्थरल अधिनियम किसी भी तरह से लागू नहीं होता. ये भी दावा किया कि मुस्लिम पक्ष के वकील ने ज्ञानवापी को वक्फ की संपत्ति बताते हुए जो दस्तावेज प्रस्तुत किया है वह असल में बिंदु माधव का धरहरा स्थित आलमगीर मस्जिद का दस्तावेज है. उनके अनुसार यह मस्जिद ज्ञानवापी से दूर स्थित है. उन्होंने अदालत को बताया है कि औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया था. उनके मुताबिक ऐसा उसने सिर्फ हिंदुओं का मान मर्दन के लिए कराया था.वहीं इस मामले में कोर्ट के अहम फैसले के बाद माहौल खराब न होने पाए इसके लिए नगर में धारा 144 लगा दी गई है.