उद्भव ग्वालियर अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव में बढ़ाया साहित्यकारों का मान…

सभ्यता, संस्कृति और सिद्धांत का पाठ पढ़ाता है साहित्य : सिंधिया

ग्वालियर। साहित्य से जीवन को गइराई मिलती है। साहित्य ही हमें संस्कृति, सभ्यता, मूल्य और सिद्धांतों का पाठ पढ़ाता है। इस ब्रह्मांड में साहित्य ही है जो मानव को अध्यात्म से जोड़ता है। साहित्य से ही संस्कृति जुड़ी हुई है। साहित्य से ही पता चलता है कि भारत के अध्यात्म में अपार शक्ति है। इस आशय के विचार केन्द्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय ग्वालियर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए। यह आयोजन उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान, अखिल भारतीय साहित्य परिषद एवं सेंट्रल अकेडमी स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहा है। 

इस चार दिवसीय उद्भव ग्वालियर अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के दूसरे दिन रविवार को केन्द्रीय मंत्री सिंधिया साहित्यकारों से भेंट करने पहुँचे थे। जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट व ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी श्री सिंधिया के साथ साहित्य उत्सव में शामिल होने पहुँचे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्भव के अध्यक्ष डॉ. केशव पाण्डेय ने की। इस अवसर पर इंग्लैंड से आईं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परीन सोमानी, साहित्य परिषद के अध्यक्ष श्रीयुत श्रीधर पराडकर एवं आईआईटीटीएम के डायरेक्टर डॉ. आलोक शर्मा बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद थे। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर में साहित्य का पुराना एवं समृद्ध अध्याय रहा है। मेरे दिल में भारतीय साहित्य के प्रति सदैव एक लगाव और कशिश रही। डॉ. केशव पाण्डेय ने ग्वालियर साहित्य उत्सव के रूप में पुनीत कार्य कर मेरी संकल्पना को पूरा किया है। 

उन्होंने कहा मेरे पूर्वजों ने करीब 300 साल पहले स्थानीय भाषा में रामायण की रचना कराई थी, इस बात से यह समझा जा सकता है कि ग्वालियर में सदैव से साहित्य का सम्मान होता रहा है। श्री सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर में साहित्य का भरपूर खजाना है। हमें उस खजाने को खोजने व संवारने की जरूरत है। खुशी की बात है उद्भव जैसी संस्था इस काम के लिये आगे आई है। संस्था अध्यक्ष डॉ. पाण्डेय ने स्वागत भाषण दिया और सचिव दीपक तोमर ने साहित्य उत्सव की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन मिताली तोमर एवं बृजकिशोर दीक्षित ने और आभार व्यक्त सेंट्रल स्कूल अकेडमी के डायरेक्टर विनय झालानी ने किया। 

इस दौरान स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। अतिथियों को सम्मानित कर उन्हें स्मृति चिंह भेंट किए गए। जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि ग्वालियर योद्धाओं, कला, संस्कृति, विकास और प्रगति की समृद्ध भूमि है। इसके विकास का जो संकल्प स्व. माधवराव सिंधिया जी ने लिया था। ग्वालियर में कला व संस्कृति की समृद्ध परंपरा शनैः-शनैः पूरी हो रही है। उन्होंने कहा साहित्य उत्सव के जरिए इस संकल्प को पूरा किया जा रहा है।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ग्वालियर की इस पवित्र माटी में हमने जन्म लिया है, यह हम सब का सौभाग्य है। ग्वालियर की कला संस्कृति और सभ्यता के साथ ही विकास की परंपरा को सिंधिया परिवार ने समृद्ध किया है। स्व. माधवराव सिंधिया जी का सपना हुआ करता था कि अपना ग्वालियर स्वच्छ और सुंदर हो। आज यह सपना साकार हो रहा है। शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का हवाई अड्डा, उत्तम दर्जे का रेलवे स्टेशन, एलीवेटेड रोड और सिक्स लेन सुपर हाईवे का निर्माण जो होने जा रहा है। साहित्य परिषद के अध्यक्ष श्रीयुत श्रीधर पराडकर ने कहा कि साहित्य ऐसी विधा है मानव को नर से नारायण बनने की प्रेरणा देती है। 

प्रत्येक मानव के जीवन में दर्शन की आवश्यकता होती है, समृद्ध साहित्य इसे पूरा करता है। शब्द केवल बोलने के लिए ही नहीं होते हैं, शब्द के साथ इतिहास, भूगोल व संस्कृति का जुड़ाव होता है। शब्द संस्कृति और सभ्यता के प्रति सम्मान दर्शाते हैं। शब्दों के उपयोग का ध्यान नहीं रखेंगे तो उनकी गरिमा नहीं रहेगी। साहित्यकारों को चाहिए कि वर्तमान हालातों को दृष्टिगत रखते हुए युवाओं के अनुरूप साहित्य का सृजन करें। इस अवसर पर देश भर से आए वरिष्ठ साहित्यकारों सहित सुरेंद्र सिंह कुशवाह, अरविंद सिह जादौन, मनोज अग्रवाल, शरद सारस्वत, सुरेश वर्मा, राजेंद्र मुदगल एवं अमर सिंह परिहार मौजूद थे।