सुमन शर्मा ने CM को सौंपी गद्दारों के नाम की लिस्ट…

न ताे व्यवस्था नाम की कोई चीज थी, न संगठन ने काम किया : सुमन शर्मा


ग्वालियर। भाजपा की महापौर पद की प्रत्याशी सुमन शर्मा की मुख्यमंत्री को सौंपी चिट्ठी ग्वालियर की सियासत में क्या गुल खिलाएगी यह फिलवक्त भविष्य के गर्भ में समाया है, अलबत्ता ग्वालियर नगर निगम चुनाव में महापौर पद पर भाजपा की हार पर सुमन शर्मा द्वारा सौंपी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपी कैफियत से जिले के दिग्गज संघ और भाजपा नेताओं के चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई हैं। दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई मुआयना कर रहे हैं और इसी दौरान बुधवार की शाम मुख्यमंत्री ग्वालियर आए, जहां उन्होंने ग्वालियर-चंबल संभाग के प्रशासन के बड़े नौकरशाहों की बैठक भी ले डाली। हवाई अड्डे पर जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा नेताओं से मुलाकात कर रहे थे, तभी भाजपा की महापौर पद की पराजित प्रत्याशी सुमन शर्मा ने लगे हाथ मुख्यमंत्री के हाथ एक चिट्ठी थमा दी। 

दरअसल सुमन शर्मा द्वारा सौंपी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपी यह चिट्ठी नहीं उन नेताओं का कच्चा चिट्ठा था, जिसमें उन्होंने सुमन शर्मा को हराने का कब, कैसे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भाजपा सहित अनुषांगिक संगठनों से जुड़े एक राष्ट्रवादी अखबार के समूह मुखिया ने किस स्तर तक जाकर भाजपा प्रत्याशी की हार सुनिश्चत करने के लिए षडयंत्र रचा, इसका खुलासा किया है। सुमन शर्मा ने अपनी इस चिट्ठी में सिलसिलेवार ब्योरा दिया है कि उन्हें कैसे पार्टी के ही नेताओं ने हरवा दिया जिससे 57 सालों के बाद कांग्रेस महापौर की कुर्सी पर काबिज हो गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार शाम भाजपा नेताओं से हवाई अड्डे पर मिले। इसी दौरान उन्होंने यह चिट्ठी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपी। इस चिट्ठी में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, ग्वालियर सांसद विवेक शेजवलकर, भाजपा जिला अध्यक्ष कमल माखीजानी और जेपी राजोरिया जैसे कई नेताओं के नाम हैं, जिन्होंने भाजपा प्रत्याशी सुमन शर्मा को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चिट्ठी पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फोरी तौर पर नजर डालने के बाद अपने पीए को देते हुए कहा कि भोपाल जाकर पढूंगा, मुझे देना। इस दौरान मौके पर मौजूद जिला भाजपा अध्यक्ष कमल माखीजानी ने सुमन द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपी चिट्ठी पर नजर डालनी चाही मगर मुख्यमंत्री द्वारा उनकी ओर देखने की वजह से ठीक से नहीं देख पाए।

यह बात अलहदा है कि जब मुख्यमंत्री चिट्ठी पढ़ रहे थे, तब सुमन शर्मा मुस्करा रहीं थीं। सूत्रों का कहना है कि सुमन शर्मा ने मुख्यमंत्री को दी चिट्ठी में सुमन शर्मा ने लिखा है कि चुनाव में व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं थी। प्रत्याशी के चुनावी दौरे भी इस तरह बनाए गए थे कि एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में एक घंटे का समय लगता था। भाजपा की महापौर पद की पराजित प्रत्याशी सुमन शर्मा चुनाव के बाद से ही चुप्पी साधे हुए हैं और सार्वजनिक रुप से उन्होंने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री के हाथ आई चिट्ठी के बाद से ही भाजपा नेताओं ने इस मामले में चुप्पी साध ली है। बता दें कि चिट्ठी में जिन नेताओं के नामों का जिक्र है उसके अलावा भी कई बड़े नाम हैं, जिन्होंने सुमन शर्मा को हराने में पूरी ताकत लगा दी थी। इनमें संघ के कुछ पदाधिकारी भी हैं। नगरीय निकाय चुनाव के दौरान देसराग इन नामों का खुलासा भी कर चुका है।