चोट के कारण नहीं ले पाएंगे हिस्सा...

नीरज चोपड़ा कॉमनवेल्थ खेलों से बाहर !

मंगलवार 26 जुलाई को भारतीय दल को राष्ट्रमंडल खेलों से पहले बड़ा झटका लगा है। भारत के स्टार एथलीट और जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा इंजरी के कारण बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर हो गए हैं। हाल ही में उन्होंने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। गौरतलब है कि यूजीन में हुई इस चैंपियनशिप के फाइनल राउंड में भी वह कुछ परेशानी में नजर आए थे। आपको बता दें कि 28 जुलाई से बर्मिंघम में शुरू होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए नीरज चोपड़ा को भारत के लिए पदक की एक बड़ी उम्मीद माना जा रहा था। लेकिन ग्रोइन इंजरी यानी जांघ में चोट के कारण वह अब इन खेलों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। 

उनकी यह समस्या वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के फाइनल राउंड में भी नजर आई थी जहां आखिरी दो प्रयासों में वह फाउल करते और डगआउट में बैठकर जांघ पर पट्टी बांधते दिखे थे। आईओए के सेक्रेटी जनरल राजीव मेहता ने नीरज के कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर होने की पुष्टि की है। राजीव मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि, मुझे आज सुबह भारतीय एथलेटिक्स महासंघ द्वारा यह जानकारी दी गई कि नीरज पूरी तरह फिट नहीं हैं। उन्हें ग्रोइन इंजरी है और स्कैन के बाद उन्हें एक महीने के लिए आराम करने के लिए कहा गया है। परिणामस्वरूप वह बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं लेंगे। फाइनल मुकाबले में चौथे थ्रो के बाद नीरज चोपड़ा को जांघ पर जकड़न महसूस हुई और आखिरी दो थ्रो फाउल निकले। उन्होंने मैच के बाद कहा था,‘‘चौथा थ्रो भी और आगे जा सकता था। उसके बाद मुझे जांघ में जकड़न लगी और आखिरी दो थ्रो अच्छे नहीं गए। मैने जांघ पर पट्टी बांधी थी। 

मुझे कल सुबह ही पता चलेगा क्योंकि शरीर अभी भी गर्म है। उम्मीद है कि राष्ट्रमंडल खेलों से पहले कोई दिक्कत नहीं होगी।’’ कॉमनवेल्थ खेलों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का स्तर थोड़ा कम होता है। ऐसे में यह संभावना थी कि नीरज गोल्ड मेडल भारत की झोली मंॉ डाल सकते हैं। लेकिन अब उनके बाहर होने के बाद भारतीय दल को बड़ा झटका लगा है। नीरज 2018 कॉमनवेल्थ खेलों के चैंपियन भी हैं। वह इस बार अपने स्वर्ण पदक को डिफेंड करने के लिए उतरने वाले थे लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में नीरज ने 86.47 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के हामिश पीकोक (82.59 मीटर थ्रो) को मात दी थी।