5 हजार लेते ही लोकायुक्त ने दबोचा…

भिंड का स्कूल एज्युकेशन डिपार्टमेंट भ्रष्टाचार का अड्‌डा !

भिंड का स्कूल एज्युकेशन डिपार्टमेंट भ्रष्टाचार का अड्‌डा बना हुआ है। यहां बिना लेन-देन के कोई काम नहीं होता। डिस्ट्रिक एज्युकेशन डिपार्टमेंट के एक क्लर्क ने चरथर गांव के निजी स्कूल की मान्यता दो साल से अटका रखी थी। क्लर्क ने स्कूल संचालक से साफ तौर पर कह दिया था। जब तक रिश्वत नहीं दोगे तब तक स्कूल नहीं चला पाओगा। स्कूल संचालक ने इस बात की शिकायत शिक्षा विभाग के अफसरों से की। इसके बाद लोाकयुक्त पुलिस कार्यालय ग्वालियर की। लोकायुक्त टीम द्वारा बिछाए गए जाल में रिश्वतखोर क्लर्क फंस गया। 

लोकायुक्त पुलिस ने पांच हजार की रिश्वत लेते हुए दबोच लिया। दरअसल, मामला यह है कि भिंड जिले के चरथर गांव में यदुनाथ सिंह तोमर ने एक स्कूल खोला। स्कूल की मान्यता के लिए वो पिछले दो साल से फरियादी जिला शिक्षा विभाग कार्यालय के चक्कर काट रहा था। स्कूल शिक्षा विभाग के सभी नियम पूरे करने के बाद ऑनलाइन मान्यता के लिए आवेदन करने के बाद भी हर बार आवेदन निरस्त कर दिया जाता था। इस बात की शिकायत फरियादी ने शिक्षा विभाग के अफसरों से की। परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई। शिक्षा विभाग में पदस्थ रामेंद्र सिंह से जब स्कूल की मान्यता को लेकर स्कूल संचालक तोमर ने बातचीत की तो उन्होंने रिश्वत देने के बाद ही स्कूल शुरू होने पाने की बात कही। इस बात की शिकायत स्कूल संचालक तोमर ने लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर में जाकर की। यहां लोकायुक्त टीम ने रिश्वत की राशि का मोल तोल करने और आवाज टैप कराई। 

जिसमें रिश्वत खोर बाबू ने 12 हजार में स्कूल की मान्यता किए जाने और पहली किश्त 5 हजार दिए जाने पर राजी हो गया। लोकायुक्त पुलिस द्वारा बिछाए गए जाल के मुताबिक गुरुवार की दोपहर करीब 2 से 3 बजे क्लर्क रामेंद्र सिंह ने स्कूल संचालक को बुलाया। यहां रिश्वत की पहली किश्त स्कूल संचालक ने क्लर्क को डीईओ ऑफिस परिसर में दी। रिश्वत की किस्त लेने के बाद स्कूल संचालक ने लोकायुक्त टीम को इशारा कर दिया। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने छापामार कर रिश्वतखोर बाबू को पकड़ लिया। पकड़े गए क्लर्क के हाथ धुलाए गए। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया।