शपथ लेते ही बदल जाएगा 57 साल का इतिहास…

नवनिर्वाचित मेयर-पार्षद आज दोपहर 3 बजे लेंगे शपथ

ग्वालियर में नवनिर्वाचित मेयर-पार्षद 1 अगस्त को शपथ लेने जा रहे हैं। जीवाजी यूनिवर्सिटी के अटल बिहारी सभागार में मेयर की शपथ लेते ही कांग्रेस की डॉ. शोभा सिकरवार 57 साल के इतिहास को बदल देंगी। ग्वालियर नगर निगम में 57 साल से भाजपा का मेयर बनता आ रहा था। इसके साथ ही 66 वार्ड के पार्षद भी शपथ लेंगे। इसके बाद परिषद की पहली बैठक 6 दिसंबर को बुलाई गई है। इसी दिन नगर निगम ग्वालियर के सभापति का चुनाव होगा। इसके लिए शनिवार को कलेक्टर ग्वालियर ने आदेश जारी करने के लिए कह दिया है। सभापति कौन होगा इसको लेकर भाजपा-कांग्रेस दोनों दल एडीचोटी का जोर लगा रहे हैं। परिषद में समीकरण अभी भाजपा के पास है, लेकिन कॉग्रेस पूरी कोशिश करेगी कि क्रॉस वोटिंग कराकर महापौर को निर्णायक वोटिंग करने का मौका मिले।

ग्वालियर में नगर निगम सहित 7 निकाय हैं। इनमें से ग्वालियर नगर निगम व डबरा नगर पालिका का नोटिफिकेशन हो चुका है। शेष 5 नगर परिषद का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद वहां परिषद अध्यक्ष के कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। ग्वालियर नगर निगम मं  महापौर और 66 वार्ड के पार्षद 1 अगस्त दोपहर 3 बजे जीवाजी यूनिवर्सिटी के अटल बिहारी सभागार में शपथ लेंगे। नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 17 ख के अनुसार महापौर व प्रत्येक पार्षद को निगम के पहले सम्मेलन में सभापति के चुनाव में भाग लेने या अपना पद ग्रहण करने के पहले कलेक्टर के समक्ष निर्धारित प्रारूप में शपथ या प्रतिज्ञान पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। इससे स्पष्ट है कि सम्मेलन से पहले नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ पर हस्ताक्षर करना जरूरी है। पत्र जारी होने के साथ निगमायुक्त किशोर कन्याल ने शपथ ग्रहण समारोह को लेकर सभी की जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। शपथ की औपचारिकताएं का जिम्मा सचिव को सौंपा गया है।

अब यह तय हो गया है कि नगर निगम ग्वालियर के सभापति के लिए चुनाव पहली बैठक 6 अगस्त को होगा। भाजपा और कांग्रेस ने सभापति के लिए जोड़तोड़ शुरू कर दी है। यहां सभापति का गणित भी समझना जरुरी है। 66 वार्ड में से किसी भी दल को सभापति बनाने के लिए 34 पार्षदों का समर्थन चाहिए। परिषद में इस समय भाजपा के सटीक 34 पार्षद जीतकर आए हैं, जबकि कांग्रेस 25 वार्ड जीता था। 3 निर्दलीय कांग्रेस की सदस्यता ले चुके हैं। जिसके बाद वह 28 पार्षद हो गए हैं। चार पार्षद निर्दलीय कांग्रेस के संपर्क में हैं। उन्हें एमआईसी में सदस्य बनाकर कांग्रेस अपने पास मिला लेगी। तो कुला मिलाकर भाजपा 34 पार्षद और कांग्रेस 32 पार्षद हो रही है। ऐसे में कांग्रेस का प्रयास होगा कि वह भाजपा के एक सदस्य से क्रॉस वोटिंग करा दे। इससे दोनों दल सभापति चुनाव के लिए 33-33 पार्षद पर आ जाएंगे। यदि ऐसा समीकरण बना तो फिर मेयर को वोट डालने का अधिकार मिलेगा। 

ऐसा हुआ तो कांग्रेस बाजी मार ले जाएगी। यही कारण है कि दोनों दल सभापति का नाम घोषित नहीं कर रहे हैं। सभापति को लेकर भाजपा-कांग्रेस दोनों दलों ने शनिवार को बैठकें की हैं।  कांग्रेस की मेयर की मेयर इन काउंसिल में कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षदों को जगह मिलेगी। कांग्रेस के 26 में से 24 पार्षद पहली बार चुनाव जीते हैं। सिर्फ दो पार्षद विनोद यादव उर्फ माटू व उपासना सिंह ही दूसरी बार जीतकर आए हैं। इनका MIC में आना लगभग तय है। इसके अलावा कांग्रेस के पार्षद अवधेश कौरव मेयर पति विधायक सतीश के करीबी हैं। इसके अलावा वार्ड-19 से भाजपा के बागी बलवीर तोमर इस बार कांग्रेस से जीते हैं उनका भी नाम देखने को मिल सकता है। इसके साथ-साथ 6 निर्दलीयों में से 4 या 5 MIC में जगह ले सकते हैं।