शासकीय विद्यालयों की स्थिति बेहद ही दयनीय...

दुर्दशा का शिकार हुआ शासकीय प्राथमिक विद्यालय दुल्लपुर ग्राम !

मॉनिटरिंग के अभाव में शासकीय प्राथमिक,माध्यमिक विद्यालयों के एचएम एवं शिक्षक शिक्षिकाएं अपनी मनमर्जी के मालिक बन गए हैं। जब इनका मन होता है तब विद्यालय आते हैं और अपनी उपस्थिति, उपस्थिति पत्रक में दर्ज कर चले जाते हैं। विद्यालय कभी भी समय पर खुलता नहीं है। कुछ विद्यालयों में मैं तो तो ऐसा भी देखने में आ रहा है कि विद्यालय लगातार पांच - पांच 10-10 दिन खुलते ही नहीं है । इतना ही नहीं ऐसा करने वाले ये शिक्षक शिक्षिकाएं  उपस्थिति पत्रक पर एडवांस हस्ताक्षर करके रखते हैं जिससे कि कभी उनके विद्यालय का औचक निरीक्षण हो भी जाए तो यह अपना बचाव कर सकें, इस प्रकार ये चालाक शिक्षक शिक्षिकाएं हजारों रूपये वेतन सरकार से पाने के बावजूद भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों एवं शासन - प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर अपनी तनखा बना रहे हैं। ऐसा ही एक प्राथमिक विद्यालय मेला ग्राउंड के पीछे  दुल्लपुर शासकीय प्राथमिक विद्यालय दुल्लपुर ग्राम के नाम से चलता है। 

इस विद्यालय मे ज़ी न्यूज़ 24 की टीम  लगातार 5 दिन तक अलग-अलग समय पर ( सुबह 9 से 12 के बीच) 3 से 8 जून 22 तक (शुक्रवार से बुधवार रविवार छोड़ कर) विद्यालय पहुंची लेकिन टीम को एचएम सहित कोई भी शिक्षक-शिक्षिका मौके पर नहीं मिले। ना ही शिक्षक शिक्षिकाओं से कोई संपर्क को सका। ना ही विद्यालय के बारे में सामान्य जानकारी देने वाले बोर्ड पर कोई मोबाइल नंबर आदि प्रदर्शित किया गया है। पूछताछ करने पर टीम को स्थानीय लोगों ने बताया कि यह स्कूल 10 दिन 15 दिन में, एक या दो दिन खुलता है उसके बाद फिर बंद हो जाता है यह क्रम इसी प्रकार चलता रहता है। इसी प्रयास चलते हमारी खबर भी  काफी देरी से दिखा पा रहे है। स्कूल परिसर के हालात भी कुछ ऐसा ही बयां कर रहे हैं। विद्यालय एवं कार्यालय के मुख्य द्वार अन्य द्वारों पर कचरे के ढेर पशुओं का मल देख कर तो ऐसा ही लगता है की ये स्कूल यदा-कदा ही खुलता होगा। स्कूल परिसर में चारों ओर गंदगी का आलम है। कचरे के जगह जगह ढेर लगे हुए हैं। 

स्थानीय लोग स्कूल कैंपस में कचरा डाल रहे हैं। मुख्य द्वार खुला रहने के कारण स्कूल कैंपस में आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है। गाय कुत्ते सूअर जैसे तमाम जानवर चारों ओर गंदगी करते है। यदि यह विद्यालय प्रतिदिन खुले और कचरा फेंकने वालों को रोका टोका जाए। जानवरों को गेट से प्रवेश रोकने के लिए बंद रखा जाए तो गंदगी पर लगाम अवश्य लगेगी। रोकने टोकने के बाद यदि फिर भी स्थानीय लोग इस कैंपस में कचरा डालने से बाज नहीं आते हैं तो इनकी शिकायत नगर निगम सहित उच्च अधिकारियों से की जाय तो यहां कचरा डलने से रोका जा सकता है।यह तभी संभव हो सकेगा जब यहां स्टाफ लगातार प्रतिदिन विद्यालय आयेगा और बैठेगा। लेकिन जब विद्यालय ही नहीं खुलेगा तो गंदगी का आलम तो यूं ही रहेगा। वही प्रश्न चिन्ह नगर निगम के क्रियाकलाप पर भी लगता है स्मार्ट सिटी में शामिल ग्वालियर में स्वच्छता अभियान के नाम पर करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाया जा रहा है पोस्टर बैनर से यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि ग्वालियर में कहीं गंदगी का नामोनिशान ही नहीं है।

केवल मुख्य सड़कों से ही कचरा कलेक्ट कर लेने भर से ही ग्वालियर स्वच्छ नहीं हो जाएगा।  यह वीडियो क्लिप्स देखकर आप स्वयं अंदाजा लगा लीजिए कि नगर निगम ग्वालियर के दावे कितने सही है। जब एक विद्यालय परिसर के अंदर इतनी गंदगी का अंबार लगा है तो सामान्य बस्तियों में व सड़कों में गंदगी का आलम कैसा होगा। स्कूल ना खुलने का कारण जानने के लिए जब विद्यालय की एचएम लम गुप्ता से इस संबंध में पूछा गया तो वे हमारी टीम को ही झूठा बताने का प्रयास करने लगी उनका कहना था कि वे तो रोजाना स्कूल जा रही है। स्कूल भी खुल रहे हैं उन्होंने यह भी कहा कि उपस्थिति पत्रक पर शिक्षक शिक्षिकाओं के  हस्ताक्षर भी हैं। अब रही बात उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर की, तो उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर कैसे किए जा सकते हैं आप और हम सभी जानते हैं क्योंकि उपस्थिति पत्रक भी तो इन्हीं के पास रहता है। लेकिन यह बात एकदम मिथ्या है क्योंकि हमारी टीम के द्वारा शुक्रवार से लेकर बुधवार तक, सुबह  9:00 से 12:00 के बीच अलग-अलग समय में जाकर के विद्यालय को चेक किया गया। 

जब भी गए स्कूल बंद ही पाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है एक तो विद्यालय रोजाना खुलता नहीं है दूसरा ऐसी गंदगी में हम अपने बच्चों को कैसे भेजें। हम इतने सक्षम नहीं हैं कि बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सकें इसलिए मजबूरी में इस विद्यालय में अपने बच्चों का नाम लिखवाया था लेकिन स्कूल खुलता नहीं है पढ़ाई होती नहीं है तो हमारे बच्चों की तो जिंदगी खराब हो रही है। विद्यालय के जन शिक्षक श्री आर्या एवं मिश्रा जी से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने बगैर कैमरे पर आए हमे बताया कि यहां चार लोगों का टीचिंग स्टाफ है वहीं जब इनसे स्कूल बंद होने के संबंध में बात की गई उन्होंने भी स्टाफ का बचाव करते हुए कहा कि हो सकता है उनकी ड्यूटी चुनाव में लगी हुई हो इसलिए स्कूल नहीं खुल रहा है लेकिन जब एचएम से बात की गई तो वे स्कूल खुलने की बात कहने लगी। जन शिक्षक एवं एचएम की बातों के विरोधाभास को देखते हुए लगता है कि मॉनिटरिंग के अभाव में चल रहे इन स्कूलों की दुर्दशा का कारण स्वयं यह जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी ही है।