पंचायत एवं ग्रामीण विकास आरक्षण का कार्यक्रम करेगा घोषित…

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अब सिर्फ SC-ST वर्ग के लिए ही आरक्षित होंगी सीटें

भोपाल। ओबीसी आरक्षण के बिना ही स्थानीय निकाय चुनाव करवाने के आदेश के बाद अब अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए पंचायतों-नगरीय निकायों में आरक्षित सीटें अनारक्षित में परिवर्तित हो जाएंगी। सिर्फ अनुसूचित जाति (अजा) और अनुसूचित जनजाति (अजजा) यानि एससी और एसटी वर्ग के लिए आबादी के हिसाब से सीटें आरक्षित होंगी। 52 जिला पंचायतों में 14 जिला अध्यक्ष के पद अजा और आठ अजजा के लिए आरक्षित होंगे। पंच, सरपंच और वार्ड निर्वाचन क्षेत्र भी जनसंख्या के अनुसार आरक्षित किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारी शुरू कर दी है। विधि विशेषज्ञों से परामर्श किया जा रहा है। शासन को पत्र लिखकर आरक्षण की प्रक्रिया करने के लिए कहा जाएगा। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग आरक्षण का कार्यक्रम घोषित करेगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक भी की। 

सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को दो सप्ताह में आदेश पर अमल करने के लिए कहा है। इसी में अधिसूचना भी जारी करनी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आदेश का शासन स्तर पर परीक्षण कराया जा रहा है। पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग भी इसी स्थिति में है। त्रिस्तरीय पंचायत के पहले चरण का चुनाव छह जनवरी, 2022 को होना था। राज्य निर्वाचन आयोग ने दस दिन पहले 28 दिसंबर, 2021 को चुनाव निरस्त कर दिए। पहले और दूसरे चरण के चुनाव के लिए नाम वापसी के बाद सवा दो लाख से ज्यादा अभ्यर्थी प्रचार में जुटे हुए थे। दरअसल, मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज संशोधन अध्यादेश वापस होने के बाद मतदाता सूची 2019 के परिसीमन के अनुसार नहीं रह गई थी। स्थानीय निकायों के चुनाव में अभी तक ओबीसी को 25 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा था। पंचायत एवं ग्रामीण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिए जाने का प्रविधान है। 

इसके मायने यह हुए कि अजा-अजजा वर्ग के लिए आरक्षित स्थान होने के बाद जो स्थान शेष रहते हैं, उसमें ओबीसी के लिए अधिकतम 25 प्रतिशत स्थान आरक्षित किए जा सकते हैं। आलीराजपुर, झाबुआ जैसे जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में सभी पद इन्हीं वर्गों के लिए आरक्षित होते हैं लेकिन जहां आबादी कम है, वहां अन्य पिछड़ा वर्ग को अधिक पद मिलते हैं। प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव कांग्रेस सरकार भी नहीं करवा पाई थी। उसने पंचायतों का परिसीमन कराया लेकिन यह लागू नहीं हो पाया। नगरीय निकायों के निर्वाचन प्रतिनिधियों का कार्यकाल नवंबर, 2019 में समाप्त हुआ था। वहीं, पंचायतों के प्रतिनिधियों का कार्यकाल मार्च, 2020 में पूरा हो गया था। कुछ समय तो सरकार ने प्रशासकों से निकायों का संचालन कराया फिर पंचायतों में प्रधान की व्यवस्था लागू कर दी। पूर्व पंचायतों के सरपंचों को ही प्रधान बनाकर उन्हें वित्तीय अधिकार दे दिए।

नए परिसीमन के अनुसार पंचायतों की संख्या -

ग्राम पंचायत- 22,985

वार्ड- 3,64,309

जनपद पंचायत- 313

वार्ड- 6771

जिला पंचायत- 52

वार्ड- 875

नगरीय निकाय

नगर निगम- 16

नगर पालिका- 98

नगर परिषद- 301

  • 21 नवंबर, 2021 को मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश जारी हुआ । कमल नाथ सरकार के परिसीमन को निरस्त किया।
  • चार दिसंबर, 2021 को राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।
  • 13 दिसंबर, 2021 से चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ पहले और दूसरे चरण के चुनाव के लिए नामांकन पत्र जमा होना शुरू हुए।
  • 17 दिसंबर, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने अध्यादेश और रोटेेशन की प्रक्रिया का पालन नहीं करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए ओबीसी के लिए आरक्षित पदों को सामान्य के लिए पुन: अधिसूचित करने के आदेश दिए। राज्य निर्वाचन आयोग ने ओबीसी वर्ग के आरक्षित पदों के नामांकन पर रोक लगाई।
  • 23 दिसंबर, 2021 को नामांकन पत्र वापस लेने की प्रक्रिया पूरी हुई और अभ्यर्थियों को प्रतीक चिन्हों का आवंटन किया गया।
  • 23 दिसंबर, 2021 को ही विधानसभा में सर्वसम्मति से ओबीसी आरक्षण के बिना पंचायत चुनाव न कराए जाने को लेकर संकल्प पारित हुआ।
  • 26 दिसंबर, 2021 को कैबिनेट ने अध्यादेश को वापस लेने का निर्णय किया। राज्यपाल ने दी अनुमति।
  • 28 दिसंबर, 2021 को राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव निरस्त किए।
  • 30 दिसंबर, 2021 मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश लागू किया।
  • पांच मई, 2022 को सुप्रीम कोर्ट में पंचायत एवं नगरीय निकायों के चुनाव जल्द कराने को लेकर सुनवाई हुई।