भगवान श्री चक्रधर के 78 वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत…

फूलबाग (बालाजी धाम) में अष्ट दिवसीय विशाल श्रीमद्भागवत कथा आरम्भ

ग्वालियर। श्री सनातन धर्म मन्दिर में भगवान श्री चक्रधर के 78 वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत फूलबाग (बालाजी धाम ) में चल रही अष्ट दिवसीय विशाल श्रीमद्भागवत कथा आयोजन में 

सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादी हेतवे। 

तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नुमः।। 

से श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस की कथा का आरम्भ करते हुए वृन्दावन से पधारे विश्वविख्यात भागवत प्रवक्ता पूज्य  कृष्णचन्द्र शास्त्री ठाकुरजी ने सच्चिदानंद का अर्थ बतलाते हुए कहा सत, चित,आनन्द ही सच्चिदानंद है। कि जो पहले था, अब भी है, और आगे भी सदा रहेगा, वह सत्य ही सच्चिदानंद है। जो सबमें व्याप्त चैतन्य स्वरूप,प्रकाश स्वरुप  वह आनन्द स्वरूप परमात्मा श्रीकृष्ण ही सच्चिदानंद है। हम संसार के भोगों  में, अच्छा खाने में, ब्रांडेड पहनने में, पद प्रतिष्ठा में आनन्द ढूंढते हैं पर आनन्द कहीं नहीं मिलता। आनन्द तो केवल श्रीकृष्ण में ही है जो हमेशा एक जैसा रहता है। 

जीवन में तीन प्रकार के ताप हैं, दैहिक ताप दैविक ताप,भौतिक ताप। शरीर  में होने वाले रोग, कोरोना आदि दैहिक ताप हैं। भूकम्प, बाढ़ आदि किसी भी प्रकार की आपदा दैविक ताप है। सभी प्रकार के ताप, पाप,रोग, पीड़ा, परेशानीयां केवल हरि नाम संकीर्तन से समूल नाश हो जाती हैं। इसलिए सच्चिदानंदघन श्रीकृष्ण को सदैव अपने चिंतन में रखना चाहिए। परिवार को निरन्तर सुखी  रखने का मंत्र बताते हुए कहा कि परिवार के सभी सदस्य प्रतिदिन कम से कम एक समय साथ मे भोजन करने का नियम अवश्य ही लेना चाहिए एवं नित्य ही सभी मिलकर कम से कम 25 मिनट कीर्तन और 25 मिनट भागवत जी, रामचरितमानस, भक्तमाल  आदि किसी भी ग्रन्थ को पढ़कर परिवार के सदस्यों को अवश्य सुनाएं। श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य का वर्णन करते हुए कृष्णचन्द्र शास्त्री जी ने कहा नारद जी ने देखा एक युवा स्त्री रो रही है। 

नारद जी ने उसके रोने का कारण पूछा तो उसने बताया कि उसके दोनों पुत्र वृद्ध होकर अचेत पड़े हैं। वह स्त्री भक्तिदेवी है उसके दोनों पुत्र ज्ञान और वैराग्य हैं। नारद जी ने सनकादिक ऋषि से प्रार्थना की। सनकादिक ऋषियों ने हरिद्वार में गंगा के किनारे श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। कथा श्रवण से ज्ञान और वैराग्य पुनः युवा अवस्था को प्राप्त हुए। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से हमारे पितरों का निश्चित ही उद्धार होता है। आत्मदेव धुन्धकारी की कथा श्रवण कराते हुए कहा कि मदिरा का सेवन व्यक्ति के समूल नाश का कारण  बनता है। पूज्यश्री ने कहा जीव मात्र को चाहिए कि निरन्तर अपने आत्म स्वरूप का चिंतन करे। किसी के दोष दर्शन न करें, यदि  दूसरों के दोष देखेंगे तो हमारा जीवन बुराइयों के घर बन जायेगा। 

सबसे प्रेम करने से,जीव मात्र में परमात्मा का दर्शन करने से जीवन स्वतः ही आनन्दमय हो जायेगा। दिनचर्या को नियमित करने पर जोर देते हुए आपने कहा रात्रि में 10:30 तक अवश्य ही सो जाना एवं प्रातः 4 बजे तक बिस्तर छोड़ देना,कम से कम 5 किलोमीटर पैदल वॉक सदैव स्वस्थ रहने के लिए परम आवश्यक है। सुबह  कल से प्रथम स्कंध की कथा का वर्णन होगा। सनातन धर्म मन्दिर के प्रधानमंत्री महेश नीखरा,मुख्य यजमान अमर सिंह सिसोदिया, पुष्पा देवी सिसोदिया, जया सिसोदिया, हिमानी, चेतना, अंशुमान, लतिका, नीलेश,मिरेन्द्र गुप्ता, मुकेश गर्ग,रविन्द्र गर्ग, राजेश गर्ग, अजय गुप्ता ने भागवत जी की आरती की। कथा के उपरांत प्रसाद वितरण भी हुआ।