राक्षसों से अमृत को बचाने के लिए आज ही के दिन भगवान् विष्णु ने धारण किया था मोहिनी स्वृरूप…

मोहिनी एकादशी आज, चार साल बाद बना शुभ संयोग

वैशाख का महीना चल रहा है और आज गुरुवार के दिन शुक्लष पक्ष की एकादशी है। वैशाख, एकादशी और गुरुवार तीनों के स्वामी भगवान विष्णु ही हैं। चार साल बाद ऐसा शुभ संयोग बना है। आज के दिन मातंग व हर्षण योग भी रहेगा। मोहनी एकादशी पर ऐसा संयोग पूजा-पाठ के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है। पंडित रामजीवन दुबे गुरुजी के मुताबिक इस शुभ संयोग में व्रत रखने और पूजा करने से कभी न खत्म होने वाला पुण्य मिलेगा। इससे पहले 26 अप्रैल 2018 को ऐसा शुभ संयोग बना था। इसके बाद 8 मई 2025 को फिर ऐसा योग बनेगा।

पंडित रामजीवन दुबे ने बताया वैशाख शुक्लग एकादशी (मोहिनी एकादशी) पर सूर्य और चंद्रमा के नक्षत्रों से रवियोग बन रहा है। साथ ही उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र होने से मातंग नाम का शुभ योग भी बन रहा है तथा हर्षण योग भी रहेगा। ऐसे शुभ योग में एकादशी व्रत का संयोग कम ही बनता है। इन योगों में पूजा और व्रत का शुभ फल और बढ़ जाएगा। जिससे सुख और समृद्धि मिलेगी। वहीं इस दिन किए जलदान से कभी न खत्म होने वाला कई गुना पुण्य मिलेगा।

वैशाख शुक्ली एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की पूजा की जाती है। भगवान विष्णुे ने समुद्र मंथन के बाद राक्षसों से अमृत को बचाने के लिए मोहिनी स्व रूप धारण किया था। इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से कई यज्ञ करने जितना पुण्य मिलता है। साथ ही जाने-अनजाने में हुए पाप भी खत्म हो जाते हैं।

मान्य ता है कि मोहिनी एकादशी का व्रत करने से मोह बंधन और पाप खत्म हो जाते हैं। माता सीता की खोज करते समय भगवान श्रीराम ने भी इस व्रत को किया था। उनके बाद मुनि कौंडिल्या के कहने पर धृष्टबुद्धि ने और श्रीकृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने भी ये व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से इन सभी को दुख और परेशानियों से मुक्ति मिली थी।