एक बैठक के दौरान सर्वे रिपोर्ट का हवाला देकर दी चेतावनी...

परफॉर्मेंस नहीं सुधारी तो कटेगा टिकट : कमलनाथ

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में 15 महीने बाकी हैं। यदि अभी चुनाव कराए जाएं तो कांग्रेस के 95 में से 27 विधायक हार जाएंगे। यह खुलासा पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ द्वारा कराए गए सर्वे में हुआ है। एक निजी कंपनी से कराए गए सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 20 (8 मंत्री इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए) में से 3 मंत्रियों की क्षेत्र में स्थिति खराब है। पूर्व मंत्री व राऊ से विधायक जीतू पटवारी को अपने क्षेत्र में ज्यादा फोकस करने की सलाह दी गई है। कमलनाथ ने एक बैठक के दौरान सर्वे रिपोर्ट का हवाला देकर कमजोर प्रदर्शन वाले विधायकों को चेतावनी दी है कि परफॉर्मेंस नहीं सुधारी, तो टिकट कट जाएगा। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सर्वे में पता चला है कि 27 विधायकों की उनके क्षेत्र में लोकप्रियता का ग्राफ पिछले कुछ समय में गिरा है। इन सभी को क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि 36 विधायकों का परफॉर्मेंस ठीक है। इसमें 15 पूर्व मंत्री शामिल हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति की स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन उपाध्यक्ष रहीं हिना कांवरे की अपने विधानसभा क्षेत्र में लोकप्रियता फिलहाल बरकरार है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा की रिपोर्ट भी बेहतर नहीं है। वे अपनी सीट (सोनकच्छ) छोड़कर आष्टा से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि 22 विधायक ऐसे हैं, जो अब भी जनता के बीच सक्रिय रहें तो मैदान मार सकते हैं। अभी चुनाव में करीब डेढ़ वर्ष हैं। तब तक इन विधायकों को स्थिति सुधारते हुए अपनी सीट बनाए रखने की पुख्ता तैयारी का मौका दिया जा रहा है। सभी सीटों पर हर तीन माह में सर्वे रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद फाइनल रिपोर्ट बनेगी, जो टिकट का पुख्ता आधार बनेगी। भोपाल उत्तर सीट से पूर्व मंत्री आरिफ अकील लंबे समय से विधायक हैं। सर्वे रिपोर्ट में अकील का परफॉर्मेंस बेहतर है, लेकिन वे लंबे समय से अस्वस्थ्य होने के कारण अगला चुनाव लड़ना मुश्किल है। ऐसे में मध्य से विधायक आरिफ मसूद उत्तर सीट से अगला चुनाव लड़ने की संभावना देख रहे हैं। इसी तरह पूर्व मंत्री एवं भोपाल दक्षिण-पश्चिम सीट से विधायक पीसी शर्मा ने सर्वे रिपोर्ट आने के बाद मध्य क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी है।

पिछले चुनाव में कांग्रेस के सर्वाधिक विधायक पहली बार चुनाव जीते थे। इनमें से अधिकांश की कम सक्रियता को लेकर पार्टी चिंतित है। भाजपा ने इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। मौजूदा विधानसभा में 230 में से 84 सदस्य ऐसे हैं जो पहली बार विधायक बने। इसमें से 51 कांग्रेस व 33 बीजेपी के हैं। सर्वे रिपोर्ट में ऐसी करीब 70 सीटों पर 6 महीने पहले उम्मीदवार तय करने की सिफारिश की गई हैं, जहां कांग्रेस वर्षों से नहीं जीती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इन सीटों पर जीत हासिल करनी है तो वहां से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के पास मौका होना चाहिए। साथ ही यहां के लिए पार्टी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाए, जो लगातार उस क्षेत्र की वास्तुस्थिति से अवगत रहें। मुख्य रूप से रीवा, ग्वालियर ग्रामीण, गोविंदपुरा, मंदसौर, इंदौर-4, उज्जैन उत्तर, रतलाम शहर, होशंगाबाद, पिपरिया,खंडवा, जबलपुर कैंट व बालाघाट सीट पर उम्मीदवार चुनाव से 6-7 महीने पहले तय किए जाने की सलाह दी गई है।

कमलनाथ के सर्वे रिपोर्ट में यह भी खुलासा -

  • कालापीपल विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक कुणाल चौधरी की स्थिति संतोषजनक पाई गई है। मतदाताओं से संपर्क और उनकी मांगों को लेकर लगातार मुखर रहना चौधरी के पक्ष में जाता है।
  • गाडरवारा से विधायक सुनीता पटेल की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्हें और मेहनत की दरकार बताई गई है। अवैध रेत खनन का मुद्दा उन्होंने उठाया जरूर पर उसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया। ब्राह्मण मतदाता भी उनसे संतुष्ट नहीं हैं।
  • तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र से संजय शर्मा की स्थिति सर्वे में ठीक सामने आई है पर उन्हें भी सक्रियता बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।
  • लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले रामनिवास रावत (विजयपुर) पिछली बार हार गए थे, लेकिन क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण वे बेहतर स्थिति में हैं।