दोनों मामलों में आदेश जारी…

अधिकारियों को शिक्षक का तेज आवाज में बात करना पसंद नहीं आया, किया निलंबित

भोपाल। सरकारी स्कूलों के दो शिक्षकों पर स्कूल शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। एक शिक्षकों को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गलत व्यवहार करने पर निलंबित किया गया है। वहीं दूसरी महिला शिक्षक को अपनी समस्या का समाधान कराने अधिकारियों के पास ना जाकर मुख्यमंत्री कार्यालय में आवेदन भेजने की सजा दी गई है। उनका वार्षिक वेतन रोक दिया गया है। दोनों मामलों में आदेश जारी कर दिए गए हैं।

दरअसल, राजधानी के उमावि पुतली घर में माध्यमिक शिक्षक विकास चौहान को अधिकारियों से ऊंची आवाज में बात करने के कारण निलंबित कर दिया गया है। वे बीते छह मई को अपने दो-तीन साथियों के साथ सीएम राइज स्कूलों में पदस्थापना संबंधित समस्या को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) पहुंचे थे। उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे तेज आवाज में बात करने लगे। यह बात अधिकारियों को अच्छी नहीं लगी। मामले में डीपीआइ आयुक्त अभय वर्मा ने पांच दिन पहले शिक्षक चौहान को बिना नोटिस जारी किए सीधे निलंबन के आदेश जारी कर दिए।

वहीं दूसरा मामला टीकमगढ़ जिले का है, जहां की शिक्षिका पूजा चौधरी बीते कई सालों से स्थानांतरण के लिए आवेदन दे रही थीं। उनका स्थानांतरण नहीं हुआ, तो उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में ट्रांसफर का आवेदन भेज दिया। यह बात अधिकारियों को पता लगी, तो महिला शिक्षक का वार्षिक वेतन रोक दिया गया। यह शिक्षकों की समस्याओं के दो उदाहरण है, लेकिन लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों के पास शिक्षकों की समस्याओं का अंबार लगा हुआ। 

इन समस्याओं को सुलझाने के बजाय अब समस्या बताने वाले शिक्षकों को पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दरअसल, स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने एक साल पहले परिवेदना पोर्टल शुरू किया था। इस पोर्टल के माध्यम से शिक्षक अपनी समस्याएं अपलोड करते, जिससे विभाग के अधिकारियों को इसका निराकरण करना था। परिवेदना पोर्टल पर शुरुआत में कुछ काम हुए, लेकिन अब शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।