पत्थर नहीं फूल हैं मेरी पहचान...

देता हूं अमन और शांति का संदेश, मैं हूं मध्यप्रदेश...

मैं मध्य प्रदेश हूं...हिंदु-मुस्लिम दोनों मेरी बाजुएं हैं। बीते कुछ दिनों से मैं काफी दर्द में था। खरगोन में रामनवमी के दिन कुछ दंगाइयों ने मेरी एक बाजू को घायल करने की कोशिश। इसका आरोप भी मेरी दूसरी बाजू पर ही लगा। तब से लेकर अब तक मैंने दंगा, कर्फ्यू और घरों पर बुलडोजरों की कार्रवाई का दर्द झेला, लेकिन अब मुझे सुकून मिल रहा है। हनुमान जयंती पर खरगोन के गिले-शिकवे भूल भोपाल में मेरी दोनों बाजुए साथ खड़ी हो गई हैं। 

खरगोन में मेरी जिस बाजू पर पत्थर चले थे, भोपाल में उसी बाजू पर फूल बरसे हैं। हनुमान जयंती पर पूरे देश में उल्लास रहा। गली-गली में शोभा यात्राएं निकाली गईं, लेकिन खरगोन दंगों के बाद मध्य प्रदेश में त्यौहार पर सुरक्षा का कड़ा पहरा है। इस बीच मेरी राजधानी ने मुझे दोबारा से खड़े होने का ढाढ़स दिया। मेरी राजधानी के संवेदनशील इलाकों में हनुमान जयंती की शोभा यात्रा के दौरान छतों से फूलों की बरसात हुई। जय जय श्रीराम के जयकारों की गूंज के बीच हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का संदेश दिया गया। 

हिंसा के बाद हालात भले ही सामान्य हो जाएं, लेकिन उसके निशां रह जाते हैं। साथ ही रह जाती है एक दर्दनाक दास्तां। जी हां। कुछ ऐसा ही हाल है मेरा। मेरी बाजुओं में हुए आघात का दर्द कम जरूर हुआ है, लेकिन बना रहेगा। जुलूस के दौरान हुई हिंसा मेरे लिए भूलना मुश्किल है, पर मेरे अपनों के साथ आने से मैं उन्हें भूलने की कोशिश कर रहा हूं। अब मेरी दोनों बाजुएं साथ खड़ी हो गई हैं। अब मुझे सुकून है। क्योंकि मैं मध्य प्रदेश हूं...